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सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी, कार्डियोलॉजी में बढ़ेंगी सीटें, एक और कैथलैब भी बनेगा

सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारी, कार्डियोलॉजी में बढ़ेंगी सीटें, एक और कैथलैब भी बनेगा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेडिकल) स्थित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में हार्ट ट्रांसप्लांट की तैयारियां कर ली गई हैं।  अब सिर्फ अस्पताल प्रबंधन को हार्ट ट्रांसप्लांट की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही प्रबंधन अपना पूरा फोकस ब्रेनडेड मरीजों पर करेगा, जिससे मरीजों को हार्ट मिल सके। सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में फिलहाल सिर्फ किडनी ट्रांसप्लांट किया जाता है। ऐसे में काफी समय से हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए प्रयास किया जा रहा है। विशेष बात यह है कि ट्रांसप्लांट के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा की जा चुकी है, ऐसे में अस्पताल को सिर्फ मंजूरी का इंतजार है। वहीं एक बार मंजूरी मिलने के बाद प्रबंधन का सारा ध्यान ट्रांसप्लांट की ओर है।

विशेष बात यह है कि इसको लेकर सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में हार्ट फेल्यूर क्लीनिक पिछले कुछ समय से संचालित हो रहा है। यहां हार्ट की बीमारी से ग्रसित मरीजों की जांच की जाती है और यदि नियमानुसार उनकी हार्ट की स्थिति 50 से 60 फीसदी है तो उसे सामान्य की श्रेणी में गिना जाता है, लेकिन यदि वह 10, 12 और 15 फीसदी पर पहुंच जाती है तो उक्त मरीज का हार्ट ट्रांसप्लांट करने की आवश्कयता पड़ती है। ऐसे में हार्ट के मरीजों की   हार्ट फेल्यूर क्लीनिक के माध्यम से स्क्रीनिंग की जा रही है।

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बढ़ेगी संख्या
विगत दिवस सुपर स्पेशलिटी के कार्डियोलॉजिस्ट विभाग में 2 से बढ़ाकर 4 सीट कर दिया है। ऐसे में वहां एक साल में प्रशिक्षण लेने वालों की संख्या 12 हो जाएगी। वर्तमान में फिलहाल वहां एक ही कैथलैब है, लेकिन अब सुपर स्पेशलिटी का प्रशिक्षण लेने वाले डॉक्टर्स की संख्या बढ़ने वाली है। ऐसे में डॉक्टर्स की संख्या बढ़ने पर एक और कैथलैब बनाने की योजना है।

क्या कहते हैं आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दुनियाभर  में 110 करोड़ युवाओं को  उच्च रक्तचाप है, जिसका अर्थ है कि 5 में से सिर्फ 1 ही युवा का रक्तचाप नियंत्रण में है। हार्ट फेल्यूर होने से लगातार मृत्यु की संख्या बढ़ रही है। भारत में हर साल 1.79 करोड़ मृत्यु का कारण हृदयरोग है, जो पूरी दुनिया में होने वाली हृदयघात की मृत्यु का 31 फीसदी है।

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