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सरकारी ऑफिसों के साथ निजी संस्थानों और कारखानों के समय में बदलाव की तैयारी

सरकारी ऑफिसों के साथ निजी संस्थानों और कारखानों के समय में बदलाव की तैयारी

डिजिटल डेस्क, मुंबई। राज्य की परिवहन व्यवस्था पर पड़ने वाले बोझ को देखते हुए भीड़ कम करने के लिए राज्य सरकार जल्द ही ऑफिसों, निजी संस्थानों और कारखानों के समय में बदलाव की रूपरेखा तैयार कर रही है। इस बाबत बातचीत अंतिम चरण में है और मजदूर संगठनों की सहमति के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे इस पर अंतिम मुहर लगा सकते हैं। दूसरे राज्यों के मुकाबले महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण हुआ है। इसके चलते सरकारी कर्मचारियों के साथ निजी संस्थानों में भी कर्मचारियों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सार्वजनिक परिवहन में होने वाली भीड़ और भगदड़ को देखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस ने सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव किया था। इसके तहत कुछ सरकारी कार्यालयों में कर्मचारियों और अधिकारियों को देर से आने और देर से जाने की इजाजत दी गई थी। फडणवीस का यह प्रयोग सफल साबित हुआ था। इसे देखते हुए मौजूदा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने एक कदम और आगे बढ़ाते हुए निजी संस्थानों में कामकाज के समय बदलाव की इच्छा जाहिर की। कोरोना संक्रमण के दौरान लगे लॉकडाउन और पाबंदियों से भी यह साफ हो गया कि अगर सरकार विभिन्न संस्थानों के कामकाज के समय में बदलाव कर दे तो पीक आवर में लोकल ट्रेनों, बसों में होने वाली भीड़भाड़ कम की जा सकती है। इसके आधार पर अधिकारियों को आगे की रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए गए।

राज्य के मुख्य सचिव संजय कुमार ने बताया कि संस्थानों के कामकाज में बदलाव के लिहाज से चल रही बातचीत अंतिम चरण में है। उन्होंने बताया कि संस्थाओं के कामकाज का समय अलग-अलग हो सकता है और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे समय और इसके लागू होने से जुड़ा ऐलान करेंगे। राज्य में फिलहाल 17 लाख सरकारी कर्मचारी हैं जिनमें से 8 लाख मुंबई महानगर विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) भेत्र में कार्यरत हैं। जबकि निजी संस्थानों में इसके तीन गुना सरकारी कर्मचारी कार्यरत हैं। कुछ ऑफिस और कारखानों को छोड़ दें तो बाकी सभी कर्मचारी लगभग एक ही समय काम पर जाने के लिए निकलते हैं। ऐसे में खासकर मुंबई में लोकल और बस जैसे सार्वजनिक परिवहन के साथ सड़क पर भी निजी वाहनों की भारी भीड़ हो जाती है। महाराष्ट्र राजपत्रित अधिकारी महासंघ के सलाहकार जीडी कुलथे ने समय में बदलाव की इस पहल का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि निजी और सरकारी ऑफिस खुलने समय में 2 घंटे का अंतर रखा जाना चाहिए। कारखानों भी सुबह जल्दी शुरू कर मजदूरों को शाम को जल्दी छोड़ दिया जाना चाहिए। इससे भीड़भाड़ कम करने में काफी मदद मिल सकती है

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।