दैनिक भास्कर हिंदी: लावारिस वाहनों का उचित प्रबंधन करें : हाईकोर्ट

August 1st, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने ट्रैफिक पुलिस विभाग को शहर में लावारिस स्थिति में पड़े वाहनों का उचित प्रबंधन करने को कहा है। शहर में जगह-जगह चार पहिया वाहन कई माह तक खड़े नजर आते हैं। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था खतरे में पड़ती है, बल्कि ट्रैफिक की समस्या भी होती है।  हाईकोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस को आदेश दिए कि वे मनपा की मदद से पब्लिक नोटिस जारी कर ऐसे लावारिस वाहनों का इंतजाम करें। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान शहर में अस्वच्छता का मुद्दा भी उठा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि केंद्र सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत मनपा को बड़ी राशि मिलती है, लेकिन शहर में साफ-सफाई नजर नहीं आती। मनपा ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर में क्या प्रबंध किए हैं, इसकी पूरी जानकारी हाईकोर्ट ने 2 सप्ताह में मांगी है। मनपा को स्वच्छता से जुड़ी जानकारी उनकी वेबसाइट पर अपलोड करने को भी कहा है। मामले में एड.श्रीरंग भंडारकर न्यायालयीन मित्र हैं। मनपा की ओर से एड.सुधीर पुराणिक ने पक्ष रखा। 

चरमराई व्यवस्था पर याचिका

नागपुर शहर में चरमराई ट्रैफिक व्यवस्था पर सू-मोटो जनहित याचिका दायर की गई है। सुनवाई में सामने आया था कि शहर में ट्रैफिक लोड को देखते हुए पर्याप्त ट्रैफिक बूथ नहीं है। बुधवार को  हाईकोर्ट में मनपा ने जानकारी दी कि उन्होंने दो बार ट्रैफिक बूथ लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया आयोजित की, लेकिन प्रस्ताव नहीं मिले। हाईकोर्ट ने मनपा को नए सिरे से प्रक्रिया आयोजित करने को कहा। 

ट्रैफिक के पर्याप्त प्रबंध नहीं

नागपुर शहर में कुल 16 लाख 80 हजार 191 वाहन हैं, लेकिन इसके प्रबंधन के लिए आरटीओ के पास पर्याप्त मनुष्यबल नहीं है। वहीं, नागपुर के 200 चौराहों में से सिर्फ 157 में ट्रैफिक सिग्नल हैं। अगर ट्रैफिक पुलिस विभाग की स्थिति देखें तो यहां 615 पुलिसकर्मी और 27 अधिकारी हैं। इस महकमे को ट्रैफिक प्रबंधन के लिए कुल 5000 पुलिसकर्मियों की जरूरत है। 

होती है भारी परेशानी

शहर में सुबह और शाम के पीक समय में ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है। जगह-जगह जाम हो जाता है, पर उसके प्रबंधन के लिए वहां ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद नहीं रहते। वहीं, ऑटो चालक बीच सड़क पर वाहन खड़े कर सवारी बिठाने-उतारने लगते हैं, इससे भी भारी परेशानी होती है। इसके अलावा हॉकर्स द्वारा सड़क पर दुकान लगाने जैसे कई मुद्दे इस जनहित याचिका में उठाए गए हैं।