दैनिक भास्कर हिंदी: राज बोले- पैसों के लिए बीजेपी का विरोध करती है शिवसेना, राऊत ने कहा- हमारे बगैर विपक्ष का बंद फ्लाप

September 10th, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने केंद्र और राज्य की सत्ता में भागीदार शिवसेना पर तीखा हमला बोला है। राज ने कहा कि सत्ता में रहकर भाजपा सरकार का विरोध केवल पैसों के लिए होता है। उन्होंने कहा कि पैसों से जुड़े काम अटकने पर शिवसेना सरकार से निकलने की धमकी देती है। पर काम होने के बाद पार्टी शांत हो जाती है। सोमवार को विपक्ष के भारत बंद में मनसे के शामिल होने को लेकर राज ने पत्रकारों से बातचीत की। राज ने कहा कि शिवसेना के पास कोई भूमिका नहीं है। पार्टी की स्थिति कुत्ते जैसी हो गई है। इसलिए पार्टी क्या बोलती है इस पर ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए। राज ने भारत बंद का असर नहीं होने के शिवसेना के आरोप पर भी जवाब दिया। राज ने कहा कि असर देखने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है। केवल पार्टी के मुखपत्र सामना में अग्रलेख लिखने से काम नहीं चलता है। राज का निशान शिवसेना सांसद संजय राऊत पर था।

मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के शिवसेना के लिए किया अपशब्दों का इस्तेमाल

राज ने कहा कि भारत बंद किसने बुलाया यह महत्वपूर्ण नहीं है। पेट्रोल और डीजल की दर वृद्धि के कारण लोग त्रस्त हो चुके हैं। लेकिन भाजपा के नेताओं को महंगाई नजर नहीं आ रही है। राज ने कहा कि भारत बंद में आंदोलन करने वाले मनसे के कार्यकर्ताओं पर कानून की सख्त धाराएं लगाई गई हैं। ऐसा कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस के शासनकाल में कभी नहीं हुआ था। राज ने कहा कि भाजपा याद रखे कि वह आज सत्ता में भले है लेकिन कभी वह भी विपक्ष में आएगी। उस समय पार्टी को भारी पड़ेगा। भारत बंद के बहाने कांग्रेस और मनसे के साथ आने पर राज ने कहा कि आज जिस तरह के आरोप मनसे पर लग रहे हैं, ऐसे ही आरोप तत्तकालिन मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक के शासनकाल में शिवसेना पर भी लगते थे। शिवसेना को लोग वसंत सेना कहते थे। राज ने कहा कि देश का प्रधानमंत्री राजा की तरह होना चाहिए व्यापारी जैसे नहीं।

बंद में शामिल न होने के फैसले में भाजपा की कोई भूमिका नहीं: शिवसेना

पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती कीमतों को लेकर कांग्रेस सहित विपक्ष के भारत बंद को महाराष्ट्र में बेअसर बताते हुए शिवसेना ने कहा कि हम जनता से जुड़े मुद्दे उठाने में विपक्ष की ताकत देखना चाहते हैं। शिवसेना सांसद संजय राउत ने सोमवार को इन बातों को खारिज किया कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने शिवसेना से पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ते दाम के विरोध में कांग्रेस द्वारा आहूत राष्ट्रव्यापी बंद से दूर रहने के लिए कहा है। राउत ने कहा कि ‘भारत बंद’ में भाग नहीं लेने का फैसला शिवसेना का अपना फैसला है और इसका भाजपा से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा के किसी नेता ने शिवसेना से बंद से दूर रहने के लिए नहीं कहा है। यह हमारा अपना निर्णय है। राउत ने यह बयान राजनीतिक गलियारों में इस तरह की चर्चा के बीच दिया है कि भाजपा ने केन्द्र और महाराष्ट्र में अपनी गठबंधन सहयोगी शिवसेना को कांग्रेस द्वारा प्रायोजित बंद से दूर रहने के लिए राजी किया।

विपक्ष की ताकत देखना चाहते हैं

शिवसेना ने सोमवार को विपक्षी दलों पर तंज कसते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों में इजाफे के खिलाफ बुलाया गया राष्ट्रव्यापी बंद लंबी नींद से हाल में जागे लोगों का अचानक उठाया गया कदम नहीं लगाना चाहिए। पार्टी ने कहा कि वह लंबे समय से विपक्षियों दलों का बोझ अपने कंधों पर उठाती आ रही है और अब यह देखना चाहती है कि ये संगठन जनता से जुड़े मुद्दों पर कहां खड़े हैं। शिवसेना भाजपा की सहयोगी पार्टी है लेकिन वह अक्सर उसकी आलोचना करती है। पार्टी ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा कि अब तक हम विपक्षी नेताओं का बोझ अपने कंधों पर उठाते आ रहे हैं और अब हम विपक्ष की ताकत देखना चाहते हैं। जब विपक्षी पार्टियां प्रभावशाली ढंग से अपना काम कर रही हों तो लोगों के हितों की रक्षा होती है। संपादकीय में कहा गया है कि लोग यह पूछ सकते हैं कि पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ कांग्रेस के बुलाए गए बंद में शामिल होने के बारे में शिवसेना का क्या रूख है।

अपने ही सवाल का जवाब देते हुए उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली पार्टी ने कहा कि वह महत्वपूर्ण मुद्दों पर विपक्षी पार्टियों की शक्ति देखना चाहती है।  पार्टी ने महाराष्ट्र के मंत्री और भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल पर भी निशाना साधा जिन्होंने कथित रूप से टिप्पणी की थी कि सरकार चलाना कितना मुश्किल है यह समझने के लिए खुद को भाजपा नेताओं की जगह रखकर देखना चाहिए। संपादकीय में कहा गया है कि पाटिल को पता होना चाहिए कि भाजपा का नेता होना आम आदमी होने से अधिक आसान है। पार्टी ने कहा, ‘‘मोदी सरकार जिस तरह से जीडीपी वृद्धि का प्रचार कर रही है, उसी तरह से उसे पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में इजाफे का प्रचार भी करना चाहिए।’’