दैनिक भास्कर हिंदी: उद्धव- पवार और अखिलेश को एक मंच पर लाने में जुटी है सपा

January 18th, 2021

डिजिटल डेस्क, मुंबई। देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश और देश की सबसे समृद्धिशाली महानगरपालिका मुंबई मनपा (बीएमसी) के चुनाव अगले साल होने वाले हैं। 2022 में होने इन दोनों चुनावों से पहले महाराष्ट्र सरकार में शामिल समाजवादी पार्टी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उत्तर प्रदेश पूर्व मुख्यमंत्री व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और राकांपा अध्यक्ष शरद पवार को एक मंच पर लाने की कोशिश में है। पार्टी की योजना मुंबई में तीनों नेताओं की बड़ी रैली करने की है। 

मुंबई दौरे पर आए पूर्व सांसद व सपा नेता रामचरित्र निषाद ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि उत्तर भारतीय अब समझदार हो गया है। वह भाजपा के बहकावे में नहीं आएगा। यूपी के जौनपुर जिले की मछलीशहर लोकसभा सीट से भाजपा सांसद रहे निषाद ने कहा कि आने वाले दिनों में उत्तर भारतीय समाज उस महागठबंधन के साथ जाएगा, जहां उसकी चिंता की जाएगी। उसकी रक्षा की जाएगी और उसे मान-सम्मान दिया जाएगा। महाराष्ट्र की महाविकास आघाड़ी सरकार को समाजवादी पार्टी के विधायकों का समर्थन है। 2022 में होने वाले मुंबई मनपा चुनाव में सपा बड़ी मजबूती से चुनाव लड़ेगी। हम लोगों की कोशिश रहेगी कि जैसे महागठबंधन सरकार में हम मजबूती से हैं वैसे ही मुंबई मनपा में भी रहें।

निषाद ने कहा कि आज भाजपा पूरे देश में नफरत की राजनीति कर रही है। जाति, धर्म और मजहब को आपस में लड़ाकर के देश को गुलाम की ओर से जा रही है। हमने रामायण युग को तो देखा नहीं परंतु भाजपा भी रावण रूपी है। वह तमाम तरह की मायावी चाल चलती है। ऐसे रावण रूपी भाजपा को हराने के लिए हम सभी लोग एक होंगे। और महाराष्ट्र से लेकर जिस जिस प्रदेश में चुनाव होगा। हम लोग साथ मिलकर भाजपा को पराजित करने का काम करेंगे। इस संकल्प की शुरुआत हम महाराष्ट्र से करने का प्रयास कर रहे हैं। 

भाजपा में उत्तरभारतीयों को नहीं मिलता सम्मान

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में जब भाजपा सरकार थी उस वक्त उत्तर भारतीयों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। भाजपा ने कभी भी उत्तर भारतीयों को न तो सम्मान दिया, न पद दिया और न ही प्रतिष्ठा दी। मैं पांच साल तक भाजपा में रहा, परंतु महाराष्ट्र से मेरा हमेशा गहरा लगाव रहा है। क्योंकि मेरी पुरानी लोकसभा सीट मछलीशहर क्षेत्र के लाखों लोग मुंबई और उसके आस-पास के इलाकों में रहते हैं। मैंने भाजपा में रहते हुए देखा कि भाजपा कभी भी मुंबई में उत्तर भारतीयों के मुद्दे पर उनके साथ खड़ी नहीं रही। 

 
 

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