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सीमा विवाद : कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री पर राऊत का पलटवार, बोले -  हमें सूरज और चंद्रमा के ज्ञान की जरूरत नहीं

सीमा विवाद : कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री पर राऊत का पलटवार, बोले -  हमें सूरज और चंद्रमा के ज्ञान की जरूरत नहीं

डिजिटल डेस्क, मुंबई। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी के सूरज और चंद्रमा के रहने तक बेलगाम कर्नाटक का अविभाज्य बना रहेगा वाले बयान पर महाविकास आघाड़ी सरकार के मंत्रियों और नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रविवार को बेलगाम और कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों में मराठी भाषियों की ओर से बनाए गए काला दिवस का समर्थन में महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों ने काली पट्टी बांधकर किया। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री सावदी के बयान पर शिवसेना सांसद संजय राऊत ने पलटवार किया। राऊत ने कहा कि सूरज और चंद्रमा तो रहेगा इसलिए सूरज और चंद्रमा के बारे में हमें किसी से ज्ञान लेने की जरूरत नहीं है। कर्नाटक को अपनी ओर देखना चाहिए। राऊत ने कहा कि महाराष्ट्र और कर्नाटक सीमा विवाद की लड़ाई 60 सालों से शुरू है। कर्नाटक के बेलगाम सहित सीमावर्ती इलाकों के मराठी भाषी लोग यदि अपनी इच्छा से महाराष्ट्र में आना चाहते हैं, तो उनकी इच्छा का आदर होना चाहिए। राऊत ने कहा कि केरल और आंध्रप्रदेश में कन्नड भाषी लोग हैं अगर वे अपने राज्य कर्नाटक में वापस आना चाहते हैं तो उनकी इच्छा का भी सम्मान होना चाहिए। 

प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि सावदी का उपमुख्यमंत्री पद का कार्यकाल पूरा होने से पहले बेलगाम सहित सीमावर्ती इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल कराकर रहेंगे। मुश्रीफ ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में सीमावर्ती इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल किया जाएगा। राकांपा प्रदेश अध्यक्ष तथा राज्य के जलसंसाधन मंत्री जयंत पाटील ने कहा कि सरकार सीमावर्ती इलाकों के लोगों के लिए पूरी ताकत से खड़ी है।    

शिवसेना नेता तथा प्रदेश के नगर विकास मंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि पिछले कई सालों से बेलगाम समेत कर्नाटक के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली मराठी भाषिक लोग महाराष्ट्र में शामिल होने के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन कर्नाटक सरकार दबाव डालकर मराठी स्कूल और मराठी फिल्म को बंद करने, मराठी भाषा का अपमान करने की कोशिश करती है। जबकि कर्नाटक के कई लोग महाराष्ट्र में निडर होकर अपना व्यवसाय करते हैं। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बेलगाम सहित सीमावर्ती इलाकों में काला दिवस मनाने वाले मराठी भाषियों पर कर्नाटक पुलिस कार्रवाई कर रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने कहा कि बेलगाम समेत सीमावर्ती इलाकों के मराठी भाषिक गांवों को महाराष्ट्र को शामिल किया जाना चाहिए। सीमावर्ती इलाकों के मराठी भाषिकों के आंदोलन को पार्टी का समर्थन है। 
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।