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नागपुर में गुप्त मार्ग, हर साल 5000 मवेशियों की तस्करी

नागपुर में गुप्त मार्ग, हर साल 5000 मवेशियों की तस्करी

डिजिटल डेस्क, नागपुर। पशुओं की तस्करी के लिए नागपुर को तस्कर सबसे सुरक्षित ठिकाना मानते हैं। पड़ोसी राज्यों से पशुओं को तस्कर नागपुर लाते हैं। उसके बाद यहां के कुछ गुप्त मार्ग से होते हुए इन पशुओं को हैदराबाद, आंध्रप्रदेश सहित अन्य राज्यों में चल रहे अवैध बूचड़खानों में भेज दिया जाता है। नागपुर में कई बूचड़खानों को पुलिस बंद करा चुकी है, लेकिन कामठी, पीली नदी, माजरी, पांचपावली सहित कई ठिकानों पर पशुओं का बूचड़खाना चोरी छिपे चलाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नागपुर में  हर साल 5 हजार से अधिक पशुओं की तस्करी हो रही है। शहर के पांचपावली, कलमना, कामठी, मानकापुर, जरीपटका, कोराड़ी, खापा, खापरखेड़ा, भिवापुर पुलिस थानों के कर्मचारियों ने गुप्त सूचनाओं के आधार पर नाकाबंदी और छापामार कार्रवाई करते हुए गत 1 वर्ष में 1 हजार से अधिक पशुओं को बूचड़खाना जाने से बचा चुके हैं। उपराजधानी में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, राजस्थान और उत्तर भारत के कई जिलों से पशु तस्करी के तार जुड़े हैं। कुछ लोग पशुओं को बाकायदा खरीदकर लाते हैं, तो कुछ तस्कर रात में खूंटे में बंधे पशुओं की चोरी कर उन्हें मालवाहक वाहनों और ट्रकों में लादकर उन्हें बूचड़खाना भेज देते हैं। पशुओं को मालवाहक वाहनों व ट्रकों में लादकर लाते समय यातायात पुलिस ने कई बार कार्रवाई की है। यह तो वह कार्रवाई है, जो उजागर हो गई, लेकिन जो उजागर नहीं हो पाती है, वह पशु बूचड़खानों में पहुंचा दिए जाते हैं। उसके बाद मांस को समुद्री मार्ग से पश्चिमी देशों में निर्यात किया जा रहा है। अनुमान है कि इस सीमा से हर साल करीब 10 लाख मवेशियों की तस्करी बांग्लादेश में होती रही है। जैसे-जैसे कस्बे पार होते गए खेत-खलिहानों में चरने वाले मवेशियों की तादाद भी बढ़ती चली गई। वैसे-वैसे इनकी तस्करी बढ़ती जा रही है। स्लीपर सेल का काम करने वाले लोग अब भी बिहार, यूपी, पंजाब, हरियाणा से आने वाले पशुओं को एक से दो दिन में बॉर्डर के पार पहुंचा देते हैं। बार्डर पर कई बार तस्कर हमला भी कर देते हैं। राज्य की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मवेशियों की तस्करी रोकने के लिए टास्क-फोर्स बनाई गई है, काफी तस्कर पकड़े गए हैं। ये समस्या खत्म तो नहीं हुई, लेकिन इसमें कमी आई है। 

अवैध रूप से ले जा रहे मवेशियों को छुड़ाया

अवैध रूप से मवेशियों को ले जा रहे एक आरोपी को सावनेर की केलवद पुलिस ने गिरफ्तार करते हुए करीब 8 मवेशियों को छुड़ाया। कार्रवाई शनिवार की शाम करीब 5 बजे के दौरान  पांढुर्णा मार्ग पर तलेखेड़ी में नाकाबंदी के दौरान की गई। पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पीआई सुरेश मट्टामी को किसी वाहन में अवैध रूप से मवेशी लेकर जाने की गुप्त सूचना मिली। सूचना के आधार पर पांढुर्णा मार्ग पर तलेखेड़ी में नाकाबंदी लगाई गई। जांच के दौरान वाहन क्रमांक एमएच- 49, डी- 3462 में अवैध रूप से 8 मवेशी पाए गए। मामले में लिप्त आरोपी का नाम तौसिफ अली जहांगीर अली (31) गोवा कॉलोनी, कामठी रोड, नागपुर निवासी बताया जा रहा है। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि, कलमेश्वर के तिष्टी से मवेशी नागपुर के किसी अवैध कत्लखाना ले जा रहा था। मवेशियों को छुड़ाकर सावनेर की गौशाला भेजा गया। आरोपी को गिरफ्तार कर वाहन सहित कुल 4 लाख 75 हजार का माल जब्त किया गया। कार्रवाई को थानेदार सुरेश मट्टामी के नेतृत्व में अमरदीप कामठे, रवींद्र डोरले, गुणवंता ढाखोले, सचिन येलकर, धोंडू देवकते, सुनील झाड़े, रोशन झाड़े, अतुल कोल्हे आदि ने अंजाम दिया।
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।