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वोटर लिस्ट तैयार करने ली जा सकती है शिक्षकों की सेवाएं: हाईकोर्ट

वोटर लिस्ट तैयार करने ली जा सकती है शिक्षकों की सेवाएं: हाईकोर्ट

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में स्पष्ट किया है कि शिक्षक चुनाव तंत्र को इसलिए प्रभावित नहीं कर सकते कि उनकी ड्यूटी सिर्फ मतदान के लिए लगाई जाए। मतदाता सूची तैयार करने व उसकी विश्वसनीयता को परखने के लिए उनकी सेवा ली जा सकती है।   महाराष्ट्र राज्य प्राथमिक शिक्षक समिति ने शिक्षकों को मतदाता सूची की विश्वसनीयता परखने का काम दिए जाने के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका में दावा किया गया था कि शिक्षकों को यदि मतदाता सूची तैयार करने व उसकी विश्वसनीयता परखने के काम में लगाया गया तो बच्चों की पढ़ाई व अध्यापन कार्य प्रभावित होगा। यह शिक्षा के अधिकार कानून (आरटीआई) की धारा 27 के प्रावधानों के खिलाफ है। न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति रियाज छागला की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई।  इस दौरान याचिकाकर्ता संगठन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सौरभ बुटाला व एनवी बांदिवाडेकर ने कहा कि यदि शिक्षकों ने मतदाता सूची से संबंधित कार्य को नहीं स्वीकार किया तो उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने व उनका कैरियर नष्ट करने संबंधित कार्रवाई प्रस्तावित है। इसलिए मतदाता सूची की विश्वसनीयता परखने संबंधी कार्य को करने को लेकर जारी की गई नोटिस पर रोक लगाई जाए। जबकि चुनाव आयोग की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रदीप राजगोपालन ने याचिका का विरोध किया।

उन्होंने कहा कि चुनाव शब्द हो संकीर्णता के दायरे में रखकर नहीं देखना चाहिए। चुनाव का अर्थ सिर्फ मतगणना व मतदान का दिन ही नहीं होता है। यदि ऐसा होगा तो इससे जनप्रतिनिधत्व कानून का उद्देश्य प्रभावित होगा।  मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव शब्द काफी व्यापक है। चुनाव की शुरुआत मतदाता सूची तैयार करने व जारी करने से होती है। हमें नहीं लगता कि शिक्षक चुनावी ड्यूटी को लेकर चुनाव आयोग पर दबाव बना सकते हैं लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि इससे बच्चों की पढाई और परीक्षाएं प्रभावित न हो। इसके लिए उचित दिशा-निर्देश व कदम उठाने पड़ेंगे। जिससे चुनावी ड्यूटी व शैक्षणिक कार्य के बीच संतुलन बना रहे। यह कहते हुए खंडपीठ ने शिक्षकों को किसी प्रकार की अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया। 

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