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शिवसेना के मंत्री परब ने कहा - अब मुंबई से बोरिया बिस्तर समेट लें कंगना 

शिवसेना के मंत्री परब ने कहा - अब मुंबई से बोरिया बिस्तर समेट लें कंगना 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। अभिनेत्री कंगना रनौत की ओर से मुंबई की तुलना पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) से करने वाले बयान को सही ठहराने पर शिवसेना ने पलटवार किया है। सोमवार को शिवसेना प्रवक्ता तथा प्रदेश के परिवहन मंत्री अनिल परब ने कहा कि कंगना को मुंबई पीओके की तरह लग रही है तो उन्हें बोरिया बिस्तर उठा लेना चाहिए। 

अभिनेत्री कंगना द्वारा शिवसेना को सोनिया सेना कहने पर परब ने कहा कि कंगना का दोहरा व्यक्तित्व है। दोहरे व्यक्तित्व वाले व्यक्तियों पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता। क्योंकि कब क्या बोलेंगे इसका अनुमान नहीं लगाया जा सकता है। कंगना को जिस तरीके की स्क्रिप्ट मिलती हैं वैसे बोलती हैं। परब ने कहा कि कंगना को एक अच्छे डॉक्टर की जरूरत है। यदि कंगना को डॉक्टर नहीं मिल रहा है तो शिवसेना उनके पास जांच के लिए डॉक्टरों की टीम भेज सकती है। 

परब ने कहा कि कंगना के कार्यालय में अवैध निर्माण हुआ है। इसलिए मुंबई मनपा ने उसको गिराया है। यदि राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी अवैध निर्माण करने वाली कंगना को मिलने के लिए समय देते हैं तो उन्हें मुंबई में उन गरीबों से भी मिलना चाहिए जिनकी अवैध झोपड़पट्टी हर दिन गिराई जाती है। गरीबों को भी राज्यपाल से न्याय मांगने का अधिकार है। परब ने कहा कि कंगना का अवैध निर्माण तोड़े जाने से भाजपा को इतनी मिर्ची क्यों लग रही है। इसका मतलब साफ है कि भाजपा की तरफ से बोलने वाले तोता को धक्का लगा। इससे विपक्ष को वेदना हुई है।

परब ने नौसेना के पूर्व अधिकारी मदन शर्मा से मारपीट करने वाले शिवसैनिकों को बचाव किया है। उन्होंने कहा कि हम मारपीट का समर्थन नहीं करते हैं। लेकिन मर्यादा का पालन दोनों तरफ से होना चाहिए। शिवसेना सत्ता में है इसका मतलब यह नहीं है कि पक्ष प्रमुख तथा मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ कोई कुछ भी बोल देगा और अशब्दों का इस्तेमाल करेगा तो ऐसी स्थिति में शिवसेना के कार्यकर्ता की प्रतिक्रिया आ सकती है। इसमें कार्यकर्ता का क्या दोष है। शर्मा को मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्टून पोस्ट करने का अधिकार किसने दिया था। 

महाराष्ट्र में ठाकरे ब्रांड का विकल्प नहीं

परब ने कहा कि महाराष्ट्र में ठाकरे ब्रांड का विकल्प नहीं है। महाराष्ट्र की राजनीति ठाकरे ब्रांड के इर्ध-गिर्द घुमती है। विपक्ष की कोशिश ठाकरे ब्रांड को कमजोर कर शिवसेना को खत्म करने की है लेकिन यह ब्रांड बहुत मजबूत है। इसलिए ठाकरे ब्रांड के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री ठाकरे और प्रदेश के पर्यटन मंत्री आदित्य ठाकरे इस ब्रांड को संभालने के सक्षम हैं। मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे के शिवसेना के साथ आने के सवाल पर परब ने कहा कि राज को शिवसेना के साथ आना है अथवा नहीं यह फैसला उन्हें ही करना है।  इससे पहले रविवार को शिवसेना सांसद संजय राऊत ने कंगना मामले पर मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे का साथ मांगा था।

आंदोलन से मराठा समाज को नहीं होगा फायदा

परब ने कहा कि आरक्षण के लिए मराठा समाज को आंदोलन कर कोई फायदा नहीं मिलने वाला है क्योंकि राज्य सरकार मराठा समाज के साथ है। जब कोई सुनता नहीं है तब आंदोलन करना पड़ता है पर आरक्षण के मुद्दे पर सरकार मराठा समाज के साथ में है।  आठवले मतलब आधा शटर बंद दुकान 

परब ने अभिनेत्री कंगना और नौसेना के पूर्व शर्मा को समर्थन देने वाले आरपीआई अध्यक्ष तथा केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले पर निशाना साधा। परब ने कहा कि आठवले का मतलब आधा शटर बंद दुकान है। आठवले अपनी दुकान का पूरा शटर खोलने का प्रयास कर रहे हैं। इसलिए उनके बोलने का कितना महत्व है यह हम सभी जानते हैं। 

राज्यपाल कहें कि सरकार सूची भेजें, मैं मंजूर करूंगा 

विधान परिषद में राज्यपाल नामित 12 सीटों के लिए राज्य सरकार की ओर से सूची नहीं भेजे जाने के संबंध में राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी की टिप्पणी पर परब ने कहा कि राज्यपाल सार्वजनिक रूप से कहें कि सरकार सूची भेजें और मैं तत्काल मंजूर करूंगा। इसके बाद सरकार अगले दिन ही सूची भेज देगी। इससे पहले राज्यपाल ने कहा था कि सरकार 12 सीटों पर विधायकों को नामित करने के लिए सूची नहीं भेज रही है। 
 

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HoaKP
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Bala September 15th, 2020 16:32 IST

Ek Mahila (Kangana Ranaut) ke peeche ek puri sarkar aur uske kai minsters pade hain. ... Kangna ek Sherni hai...

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।