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ईडी के सामने पेश होने की बजाय क्वारेंटाईन हो गए शिवसेना विधायक सरनाईक

ईडी के सामने पेश होने की बजाय क्वारेंटाईन हो गए शिवसेना विधायक सरनाईक

डिजिटल डेस्क, मुंबई। मनी लांडरिंग के संदेह में छापेमारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शिवसेना विधायक प्रताप सरनाईक को समन भेजकर बुधवार को पूछताछ के लिए बुलाया था लेकिन राज्य के बाहर से लौटने और कोरोना संक्रमण से जुड़े नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने खुद को क्वारेंटाईन कर लिया है। उन्होंने क्वारेंटाईन का हवाला देते हुए जांच एजेंसी से खुद को पूछताछ के लिए एक सप्ताह की मोहलत मांगी है। सरनाईक के बेटे विहंग को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया था। लेकिन उनकी पत्नी छापेमारी के बाद हाइपर टेंशन (उच्च रक्तचाप) के चलते अस्पताल में भर्ती है इसका हवाला देते हुए उन्हें भी एक सप्ताह बाद जांच के लिए बुलाने को कहा गया है। इससे पहले मंगलवार को ईडी ने टॉप्स ग्रुप और सरनाईक परिवार के 10 ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच एजेंसी ने सरनाईक के ठाणे के हीरानंदानी इस्टेट स्थित घर और समता नगर स्थित पुराने घर के साथ उनके बेटे विहंग के वसंत लॉन्स स्थित घर और वर्तक नगर स्थित ऑफिस पर भी छापेमारी की थी। 

दरअसल मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा टॉप्स ग्रुप के पूर्व कर्मचारियों की शिकायत पर कंपनी के प्रमोटर राहुल नंदा और दूसरे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने इंफोर्समेंट केस इंफर्मेशन रिपोर्ट (ईसीआईआर) दर्ज की है। इसी साल 28 अक्टूबर को दर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक टॉप्स ग्रुप ने मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) को 175 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। टॉप्स ग्रुप को एमएमआरडीए के ठिकानों पर सुरक्षा रक्षकों की नियुक्ति का ठेका मिला है। आरोप है कि नंदा के पुराने दोस्त सरनाईक ने उन्हें यह ठेका दिलाने में मदद की। यह भी शक है कि सरनाईक की कंपनियों ने टॉप्स ग्रुप के जरिए पैसे विदेश भेजे। यूके में किए गए निवेश और मॉरीशस में स्थित ट्रस्ट के चलते भी नंदा संदेह के घेरे में हैं लेकिन उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।   

     
क्या सबको करेंगे कोरेंटाईन-सोमैया

कोरेंटाईन होने का हवाला देकर जांच एजेंसी से मोहलत मांगने वाले प्रताप सरनाईक पर भाजपा नेता किरीट सोमैया ने निशाना साधा है। सोमैया ने सवाल किया है कि क्या जिन लोगों ने सरनाईक से मुलाकात की है, उन सभी को क्वारेंटाईन होने के लिए कहेंगे। सोमैया ने ट्वीट करते हुए सवाल किया कि सरनाईक को कोरोना से डर लग रहा है या ईडी, मनी लांडरिंग और बेनामी लेन देन से।    
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।