दैनिक भास्कर हिंदी: सीएए पर शिवसेना-राकांपा आमने-सामने, उद्धव बोले- महाराष्ट्र में नहीं रोका जाएगा एनपीआर

February 18th, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर प्रदेश की महाविकास आघाडी सरकार के दो दलों शिवसेना और राकांपा के बीच मतभेद सामने आए हैं। मंगलवार को राकांपा के अध्यक्ष शरद पवार ने कहा कि सीएए को लेकर पार्टी का विरोध है। संसद में राकांपा ने सीएए के विरोध में वोटिंग की थी। पवार ने कहा कि सीएए पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे का अपना नजरिया हो सकता है। लेकिन जहां तक राकांपा का सवाल है। इस पर हमारा विरोध कायम है। पवार ने कहा कि गठबंधन के सरकारों में घटक दलों के बीच कई मुद्दों पर अलग-अलग राय हो सकती है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि सरकार पर कोई परिणाम होगा। जबकि रत्नागिरी में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अगर सीएए लागू होता है तो किसी को डरने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सीएए और एनआरसी दो अलग-अलग कानून है। जबकि एनपीआर अलग विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में एनआरसी लागू नहीं किया जाएगा। क्योंकि एनआरसी लागू हुआ तो न केवल मुस्लिमों को बल्कि हिंदुओं और आदिवासियों पर असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआरसी लागू करने के संबंध में केंद्र सरकार ने कुछ कहा नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एनपीआर के जरिए जनगणना है। मुझे नहीं लगता है कि उसमें कोई आपत्ति की बात होगी। क्योंकि हर दस साल में जनगणना होती रहती है। 

महाराष्ट्र में नहीं रोका जाएगा एनपीआर: उद्धव ठाकरे

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि वह राज्य में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) की प्रक्रिया को नहीं रोकेंगे।ठाकरे ने आश्वासन दिया कि वह एनपीआर के सभी कालम की जांच खुद करेंगे। उन्होंने कहा कि एनपीआर तैयार करने की प्रक्रिया में महाराष्ट्र में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।ठाकरे ने ट्वीट कर कहा कि सीएए और एनआरसी अलग हैं और एनपीआर अलग है। अगर सीएए लागू होता है तो किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है। एनआरसी अभी नहीं है और राज्य में लागू नहीं किया जाएगा।”उन्होंने कहा कि एनपीआर राज्य में लागू होगा क्योंकि उसमें कुछ भी विवादास्पद नहीं है।ठाकरे ने कहा कि वह राज्य में एनआरसी लागू नहीं होने देंगे।उन्होंने कहा, “अगर एनआरसी लागू होगा तो इससे हिंदू या मुस्लिम ही नहीं आदिवासी भी प्रभावित होंगे। एनपीआर जनगणना है और मुझे नहीं लगता कि इससे कोई प्रभावित होगा क्योंकि यह हर दस साल में होती है।” इसके पहले सोमवार को राकांपा मंत्रियों के साथ शरद पवार की बैठक के बाद राकांपा की तरफ से कहा गया था कि एनपीआर पर पार्टी को एतराज नहीं हैं। इसके बाद मंगलवार को मुख्यमंत्री का यह बयान आया है। 
 

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