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बारिश का असर : छोटे दुकानदार और संतरा उत्पादक हुए प्रभावित

बारिश का असर : छोटे दुकानदार और संतरा उत्पादक हुए प्रभावित

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोंढाली और ग्रामीण इलाकों में शनिवार की सुबह से ही हल्की बारिश का दौर जारी था, लेकिन दोपहर करीब 12 बजे के दौरान अचानक हुई तेज बारिश ने दिवाली पर्व पर दुकान सजाए छोटे दुकानदारों की फजीहत कर दी। सामना भीगने से दुकानदारों को काफी नुकसान हुआ, वहीं बारिश के चलते ग्राहक नहीं पहुंचने से आमदनी भी प्रभावित हुई। उसी प्रकार संतरा उत्पादक किसान के अंबिया बहार की फसल विगत तीन दिन से डेरा जमाए बादलों के कारण व शनिवार को हुई तेज बारिश के चलते संतरों के बाजारभाव में अचानक गिरावट हुई। फलस्वरूप  संतरा उत्पादक  किसान तथा व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह जानकारी संतरा व्यापारी श्याम बागड़े, जितेंद्र पोकले, धनराज ठवले, तौसिफ पठाण व संतरा उत्पादक किसान सुरेंद्रसिंह व्यास ने दी है।

कपास, सोयाबीन व संतरे को क्षति

कलमेश्वर की बात करें तो छोटे दुकानदारों को खासी परेशानी हुई। कलमेश्वर में दोपहर 12 बजे के दौरान अचानक बारिश की दस्तक हुई, जो तकरीबन एक घंटा बनी रही। इससे बाजारपेठ की बढ़ती रौनक पर मानो कर्फ्यू लग गया। छोटी दीपावली पर महिलाएं खरीददारी के लिए अपने घरों से नहीं निकल पाई। बाजार में लघु उद्योग वाले छोटे व्यापारियों की रंगोली, दीया, सजावट का सामान, फूल, फल विक्रेताओं का सामान आदि भीगने से काफी नुकसान हुआ। कलमेश्वर तहसील के किसानों को बारिश ने परेशानियों में डाल दिया। खेतों में खड़ी कपास की फसल व  खेत में काटकर रखी गई सोयाबीन की फसल भीग जाने से काफी नुकसान का सामना करना पड़ा। हालांकि शनिवार को हुई बारिश से कितना नुकसान हुआ। इस बारे में प्रशासन से कोई सटिक जानकारी नहीं मिल पाई। ऐन दीपावली पर्व पर हुई बारिश से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई। 

बाजारों में दिखा बारिश का असर, देर रात तक जमकर हुई खरीदी

बाजार में हर दुकानों में खरीदारों की भीड़ देर रात तक बनी रही, लेकिन शनिवार की दोपहर को अचानक हुई बारिश ने दीपावली बाजार में खलल डाल दी। अचानक हुई बारिश से कुछ देर के लिए बाजारों में विरानी छा गई, बारिश थमने के बाद देर शाम दोबारा बाजारों में रौनक लौटने लगी थी। धनतेरस के दिन बाजार में जमकर खरीदारी हुई। इस साल दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहकों में भी उत्साह देखते ही बन रहा था। रविवार को दीपावली पर्व पर शहर के बाजार ग्राहकों की भीड़ से भरे हुए थे, लेकिन शनिवार की दोपहर अचानक बिजली की गड़गड़ाहट के साथ तेज बारिश हुई। इससे ग्राहक इधर-उधरे भागते नजर आए तो कुछ ग्राहकों ने दुकानों में ही सहारा लिया। एक-डेढ़ घंटे जारी बारिश से फुटपाथ दुकानदारों का धंधा चौपट हो गया। हालांकि देर शाम बारिश थमने के बाद दोबारा बाजारों में लौटी रौनक देर रात तक बनी रही। इस वर्ष बाजारों में मंदी का असर नहीं पड़ा। पिछले साल के मुकाबले इस साल अच्छी ग्राहकी होने से दुकानदारों के भी चेहरे खिल उठे है।
 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।