दैनिक भास्कर हिंदी: देव दीपावली: प्रधानमंत्री मोदी के दीया जलाते ही जगमगाई काशी, लाखों दीयों से जगमगाए मां गंगा के घाट, देखें तस्वीरें

November 30th, 2020

हाईलाइट

  • नेक नीयत किए गए काम को सिद्धि मिलती है-पीएम
  • किसान आंदोलन पर बोले- नए काम का विरोध होता है
  • 'जब समाज, राष्ट्रहित में बदलाव होते हैं, तो विरोध होता है'

डिजिटल डेस्क, वाराणसी। भगवान शिव की नगरी काशी आज एक बार भी ऐतिहासिक नजारों की गवाह बनी। देव दीपावली के मौके पर पहली बार कोई प्रधानमंत्री गंगा घाट पहुंचे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दीया जलाते ही गंगा किनारे रखे लाखों दीये जगमगा उठे। हर तरफ अलौकिक छटा बिखर गई।

 देव दीपावली पर लाखों दीयों से जगमगाया बनारस (फोटो आजतक)

बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद मोदी अलकनंदा रोरो यान से राजघाट पहुंचे। घाट के विशाल प्लेटफार्म पर बनाए गए मंच पर विराजमान हुए। देव दीपावली का पहला दीप जलाया और काशी की विशाल घाट श्रृंखला पर मानो छोटे-छोटे दीपों के रूप में सितारों की बरसात हो गई। शहर के इस उत्तरी छोर पर स्थित राजघाट से ही दक्षिण ओर फैली घाट श्रृंखला के साथ ही उस पार रेत तक उभर आई देव। देव दीपावली की अद्भुत छटा पर नजर डाल मोदी विभोर हो उठे।

बोले मोदी- हर अच्छे काम में अड़चनें आती ही हैं
दीप जलाने के बाद पीएम मोदी ने राजघाट पर जनसभा को संबोधित किया। नए कृषि कानून के खिलाफ हो रहे धरना-प्रदर्शन पर कहा कि नए काम के दौरान इस तरह के विरोध होते रहे हैं।  पीएम मोदी ने कहा कि आज हम सुधार की बात करते हैं। समाज और व्यवस्था में सुधार के बहुत बड़े प्रतीक तो स्वयं गुरु नानक देव जी ही थे। हमने ये भी देखा है कि जब समाज, राष्ट्रहित में बदलाव होते हैं, तो जाने-अनजाने विरोध के स्वर जरूर उठते हैं। लेकिन जब उन सुधारों की सार्थकता सामने आने लगती है तो सब कुछ ठीक हो जाता है। यही सीख हमें गुरुनानक देवजी के जीवन से मिलती है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देव दीपावली के कार्यक्रम में हुए शामिल

पीएम ने नए कृषि कानूनों के खिलाफ हो रहे विरोध के संदर्भ में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर और राम मंदिर का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि काशी के लिए जब विकास के काम शुरू हुए थे, विरोध करने वालों ने सिर्फ विरोध के लिए विरोध तब भी किया था। जब काशी ने तय किया था कि बाबा के दरबार तक विश्वनाथ कॉरिडॉर बनेगा, विरोध करने वालों ने तब इसे लेकर भी काफी कुछ कहा था। लेकिन आज बाबा की कृपा से काशी का गौरव पुनर्जीवित हो रहा है। सदियों पहले, बाबा के दरबार का मां गंगा तक जो सीधा संबंध था, वो फिर से स्थापित हो रहा है।

 देव दीपावली पर लाखों दीयों से जगमगाया बनारस (फोटो आजतक)

घाट पर जहां आयोजकों की ओर से तैयारियों को दोपहर तक पूरा कर आयोजन को भव्य रूप देने की तैयारी पूरी की, वहीं सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी का इंतजार था। मोदी के दीप जलाते ही उत्तरवाहिनी मां गंगा समेत नदियों और सरोवर कुंडों के तट पर लाखों दीपों की माला जगमगा उठी।

धूप-दीप, गुग्गुल-लोबान की सुवास ने श्रद्धा के भाव संग शाम होते ही घाटों को गमकाया, तो घाटों की अर्ध चंद्राकार श्रृंखला भी आस्था के अपार सागर से ओतप्रोत नजर आई। घाटों की साज सज्जा ऐसी कि मानो स्वर्ग साक्षात मां गंगा के आंचल में समाने व्याकुल नजर आने लगा।

रंग-बिरंगी झालरों की रोशनी से जगमग घाट।


उन्होंने राजघाट पर ही पर्यटन विभाग की ओर से बनाई गई पावन पथ वेबसाइट को भी लॉन्च किया। पावन पथ वेबसाइट में श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर को केंद्र में रख कर सभी देवालयों के बारे में जानकारी दी गई है। इसमें नौ दुर्गा, नौ गौरी, द्वादश ज्योतिर्लिग, छप्पन विनायक, अष्ट भैरव समेत लगभग डेढ़ सौ देवालयों का इतिहास-भूगोल सहेजा गया है। इस पर काशी से जुड़े तीज-त्योहारों के बारे में भी बताया गया है। पीएम मोदी का यह तेइसवां काशी दौरा है। हालांकि वे देव दीपावली पर पहली बार काशी आए हैं।

देव दिवाली पर जगमगाए बनारस के घाट।
अनूठे जल प्रकाश उत्सव के रूप में विश्व विख्यात देव दीपावली के मौके पर उत्तरवाहिनी मां गंगा के घाटों पर खास नजारा देखने के लिए देश-दुनिया से लोगों का हुजूम दोपहर बाद ही घाटों की ओर बढ़ चला था। भीड़ देखकर नहीं लग रहा था कि कोरोना जैसी कोई महामारी भी फैली है। प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर क्रूज में सवार होकर ललिता घाट के लिए निकल चुके हैं। इसके बाद वो राजघाट जाएंगे और यहां के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। 

काशी आस्था के रंग में रंगी नजर आ रही है (फोटो आजतक)

 देव दीपावली पर लाखों दीयों से जगमगाया बनारस (फोटो आजतक)

देव दीपावली पर लाखों दीयों से जगमगाया बनारस (फोटो आजतक)

पीएम मोदी के दीप प्रज्ज्वलित करते ही लोगों ने भी घाटों को रोशन किया।

पीएम मोदी के दीप प्रज्ज्वलित करते ही लोगों ने भी घाटों को रोशन किया।

21 बटुक और 51 कन्याएं गंगा आरती में शामिल हुईं।

21 बटुक और 51 कन्याएं गंगा आरती में शामिल हुईं।