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प्लास्टिक पर सख्ती : गाइडलाइन जारी, जुर्माने के साथ हो सकती है सजा, मल्टीलेयर प्लास्टिक पर नहीं बैन

प्लास्टिक पर सख्ती : गाइडलाइन जारी, जुर्माने के साथ हो सकती है सजा, मल्टीलेयर प्लास्टिक पर नहीं बैन

डिजिटल डेस्क, नागपुर।   प्लास्टिक पर प्रतिबंध के मामले में राज्य के पर्यावरण विभाग और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बाेर्ड की ओर से गाइडलाइन जारी की गई है। इसके अनुसार अब 200 मिली की पानी की बॉटल, पाॅलिथीन, थर्मोकोल के डिस्पोजल, कप-प्लेट व स्ट्रा के साथ ही सिंगल यूज प्लास्टिक पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। पहली बार नियम तोड़ने पर पांच हजार रुपए जुर्माना, दूसरी बार दस हजार और तीसरी बार जुर्माना 25 हजार तथा तीन माह कैद की भी सजा हो सकती है। 

इन पर है प्रतिबंध
पानी की बोतल- 200 एमएल से कम क्षमता वाली,पानी पाउच, पॉलिथीन- सभी तरह के पॉली बैग,  हैंडल व बिना हैंडल वाले दोनों तरह के बैग्स पर प्रतिबंध, डिस्पोजेबल आइटम में प्लास्टिक की प्लेट, ग्लास, कप, चम्मच, कांटे। इनमें  थर्माकोल से बनी वस्तुएं भी शामिल हैं। प्लास्टिक के डिब्बे, स्ट्रॉ, होटल/रेस्तरां में अब भोजन के लिए प्लास्टिक के डिब्बों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। प्लास्टिक के स्ट्रॉ पर प्रतिबंध, सजावटी उपयोग के प्लास्टिक में विभिन्न गिफ्ट आइटम में प्रयुक्त होने वाले, सजावटी आइटम, फूल-माला वाले प्लास्टिक व थर्माकोल पर प्रतिबंध।  

यह प्लास्टिक प्रतिबंध से बाहर 
इलेक्ट्रॉनिक और अन्य उत्पादों में सुरक्षा के लिए प्रयुक्त प्लास्टिक व थर्माकोल पर प्रतिबंध नहीं है। दूध और अन्य दुग्ध उत्पादों में पैकिंग में प्लास्टिक  प्रतिबंध से बाहर है, ऐसे पैकेट में 50 माइक्रॉन व इससे अधिक मोटाई का प्लास्टिक होनी चाहिए। साथ ही इसमें बाई बैक (वापसी की खरीद) की राशि दर्ज होनी चाहिए। दवाओं की पैकिंग, ग्लूकोज की बोतल व अन्य दवा उत्पादों में प्रयुक्त प्लास्टिक पर प्रतिबंध का नियम लागू नहीं होगा। थर्माकोल के डिब्बे, जिनमें मछलियों को लाया-ले जाया जाता है। वह प्रयोग में रहेंगे। कार्यालय व शिक्षण संस्थानों की स्टेशनरी के रूप में प्रयोग किए जा रहे हैं, उन पर प्रतिबंध नहीं रहेगा।

मल्टीलेयर प्लास्टिक
चिप्स, कुरकुरे, बिस्कुट, नूडल्स आदि की पैकिंग वाले मल्टीलेयर प्लास्टिक भी प्रतिबंध से बाहर रहेंगे। प्लास्टिक के बर्तन, डस्टबिन, पानी की बोतल समेत घरेलू उपयोग (खाद्य पदार्थों समेत) वाले प्लास्टिक पहले की तरह चलन में रहेंगे। डिपार्टमेंट या अन्य स्टोर में दाल, चावल, मसाले, पापड़, बेकरी उत्पाद समेत तमाम वस्तुएं प्लास्टिक की पैकिंग में आ रही हैं। इन्हें इस शर्त के साथ के छूट दी जा रही है कि इनकी मोटाई 50 माइक्रॉन से अधिक होनी चाहिए। साथ ही ऐसे पैकेट में बाई बैक की राशि भी दर्ज होनी चाहिए। बड़े उत्पादों की पैकिंग में प्रयुक्त होने वाले प्लास्टिक व थर्माकोल को इस शर्त के साथ छूट मिलेगी कि उनमें कम से कम 20 फीसदी मटेरियल रीसाइकल युक्त हो और उनकी मोटाई 50 माइक्रॉन से अधिक हो।  
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।