दैनिक भास्कर हिंदी: जो छात्र नहीं देंगे परीक्षा, उनको कैसे मिलेगा रिजल्ट-  हाईकोर्ट ने आईसीएसई बोर्ड से पूछा 

June 17th, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन बोर्ड (आईसीएसई) से जानना चाहा कि जो छात्र कक्षा दसवीं की परीक्षा नहीं देना चाहते हैं, उनके परीक्षा परिणाम के निर्धारण के लिए कौन सा तरीका अपनाया जाएगा। साथ ही 12 वीं के विद्यार्थियों के रिजल्ट का निर्धारण कैसे किया जाएगा। हाईकोर्ट ने बोर्ड को सोमवार को इस विषय पर अपना रुख स्प्ष्ट करने को कहा है। हाईकोर्ट में कोरोना के प्रकोप के मद्देनजर दसवीं की परीक्षा रद्द किए जाने की मांग को लेकर पेशे से वकील अरविंद तिवारी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई चल रही हैं। दो जुलाई से दसवीं की परीक्षा शुरु होने वाली हैं। मामले की पिछली सुनवाई के दौरान बोर्ड ने विद्यार्थियों को दो विकल्प दिए थे। पहले के तहत विद्यार्थियों को परीक्षा देने की छूट अथवा दूसरे विकल्प के तहत जो विद्यार्थी परीक्षा नहीं देना चाहते हैं, उनके रिजल्ट निर्धारण आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा। बोर्ड से संलग्न स्कूलो से इस विषय पर जानकारी मंगाई गई हैं। 

बुधवार को यह याचिका मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता की खंडपीठ के सामने सुनवाई के लिए आई। इस दौरान अधिवक्ता तिवारी ने कहा कि परीक्षा न देने वाले विद्यार्थियों के रिजल्ट का निर्धारण कैसे होगा, इसे लेकर कोई पारदर्शिता नहीं है। ऐसे में भला विद्यार्थी कैसे बोर्ड की ओर से दिए गए विकल्प का चयन कर पाएंगे। दो अभिभावकों के वकील भी तिवारी से सहमत नजर आए। उन्होंने कहा कि बोर्ड यदि कोई नई जानकारी जारी करता है, तो अभिभावकों को भी इसकी पूर्व सूचना दी जाए। ताकि उन्हें निर्णय लेने में आसानी हो। 

परीक्षा लेने के पक्ष में नहींं है सरकार

वहीं राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुम्भकोणी ने कहा कि राज्य सरकार सैद्धांतिक रुप से परीक्षा के आयोजन के पक्ष में नहीं है। क्योंकि कोरोना के चलते स्थिति ठीक नहीं है। महामारी की स्थिति में राज्य सरकार के पास परीक्षा को रोकने का भी अधिकार है। फिर भी हम चाहते हैं कि बोर्ड हमें परीक्षा देने के इच्छुक विद्यार्थियों की जानकारी दे। ये विद्यार्थी रेड जोन में रहते हैं या फिर गैर रेड जोन के निवासी हैं। इसकी सूचना दी जाए। इसके बाद परीक्षा की अनुमति के विषय में अंतिम निर्णय लेने पर विचार किया जाएगा। उन्होंने हलफनामा दायर कर स्पष्ट किया कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर कागज का ज्यादा इस्तेमाल होगा। कागज से कोरोना के प्रसार का खतरा है। इस पर बोर्ड के वकील ने कहा कि यदि राज्य सरकार परीक्षा की अनुमति नहीं देने का निर्णय लेगी तो उसका पालन किया जाएगा। लेकिन बोर्ड परीक्षा के आयोजन के दौरान सुरक्षा से जुड़े सारे उपाय करेगा। मामले जे जुड़े सभी पक्षों को सुनने के बाद  खंडपीठ ने कहा कि जो बच्चे कक्षा दसवीं की परीक्षा नहीं देना चाहते हैं उनके परीक्षा परिणाम के निर्धारण के लिए कौन सा तरीका अपनाया जाएगा। इसकी जानकारी हमे दी जाए। खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को रखी हैं।