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राजदंड उठाने के मामले में उपाध्यक्ष ने किया था निलंबित

राजदंड उठाने के मामले में उपाध्यक्ष ने किया था निलंबित

डिजिटल डेस्क, नागपुर। विधानसभा में अध्यक्ष के आसन के सामने राजदंड को सभागृह के सर्वोच्च सम्मान के तौर पर रखा जाता है। अगर कोई राजदंड उठा ले तो सभागृह की कार्यवाही नहीं हो पाती है। लेकिन अपना विरोध जताते हुए सदस्यों की ओर अक्सर राजदंड उठाने के प्रयास किए जाते हैं। महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष चुने गए नाना पटोले राजदंड उठाने के मामले में सजा पा चुके हैं। दिसंबर 2013 में नागपुर में विधानमंडल के शीत सत्र के समय पटोले ने प्रदर्शन किया था। तब वे भाजपा के सदस्य थे। उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन मंत्रियों के भ्रष्ट्राचार के मामले उठाए थे। तत्कालीन दागी मंत्रियाें में नितीन राऊत, अनीस अहमद शामिल थे। पटोले ने विपक्ष के सदस्याें के साथ मिलकर विधानसभा में हंगामा किया। तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष प्रा.वसंत पुरके ने उन्हें समझाने का प्रयास किया लेकिन वे नहीं माने। राजदंड उठाकर सभागृह से बाहर जाने लगे । तब उपाध्यक्ष के कहने पर सभागृह के संतरियों ने पटोले को रोका था। उनसे भी धक्कामुक्की हुई थी। पूरे मामले को लेकर उपाध्यक्ष ने नाराजगी जतायी थी। पटोले को सत्र समाप्त होने तक के लिए निलंबित कर दिया था। फिलहाल पुरके पटोले समर्थक कांग्रेस नेता हैं। नितीन राऊत मंत्री हैं।

पटोले के स्वभाव के कारण राजनीतिक दलों में उनको लेकर अन्य नेताओं की राय सदैव अच्छी नहीं रही है। भंडारा जिले में जिला परिषद चुनाव से उन्होंने राजनीति शुरु की। 1992 में निर्दलीय लड़कर उन्होंने कांग्रेस के मधुकर कुकड़े को पराजित किया था। कुछ समय शिवसेना में भी रहे। बाल ठाकरे के समय शिवसेना काफी आक्रामक थी। हालांकि विदर्भ क्षेत्र में वह आक्रामकता नहीं दिखती थी। लेकिन पटोले ने शिवसेना की उस कथित स्टाइल का अपनाकर सूर्खियां बंटोरी थी। लेकिन जल्द ही शिवसेना को छोड़ गए। कांग्रेस में शामिल हाे गए। लेकिन कांग्रेस में भी नेताओं के साथ उनका सामंजस्य नहीं बन पाया। 1995 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। लाखांदूर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार प्रमिला के विरोध में उन्होंने चुनाव लड़ा। भाजपा को लाभ मिला। पटोले भी पराजित हुए थे। उसके बाद फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। 1999 ,2004 व 2009 में उन्होंने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीता। लेकिन 2009 के अंत तक वे पार्टी में असहज महसूस करने लगे। विदर्भ  व किसानों के मुद्दे को लेकर उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। उसी वर्ष उन्होंने भंडारा गोंदिया लोकसभा क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव लड़ा।

राकांपा उम्मीदवार प्रफुल पटेल पराजित हुए थे। उस चुनाव में पटोले नहीं जीते पर पटेल की पराजय का कारण बने थे। फिर भाजपा में शामिल हो गए। 2014 में उन्होंने पटेल को पराजित किया। बाद में भाजपा में भी असहज हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध मोर्चा खोल बैठे। प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर बयान व भाषण के साथ पटोले ने लोकसभा सदस्य रहते हुए भाजपा छोड़ी थी। लिहाजा भंडारा गोंदिया में उपचुनाव कराना पड़ा था। 2019 में पटोले नागपुर लाेकसभा क्षेत्र से कांग्रेस उम्मीदवार थे। उन्हें भाजपा के नितीन गडकरी  ने पराजित किया। विधानसभा चुनाव में साकोली में पटोले ने बतौर कांग्रेस उम्मीदवार भाजपा के परिणय फुके को पराजित कर दिया। 

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