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धान की वर्तमान फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर खरीदा गया, इस सत्र में सरकारी एजेंसियों ने रिकार्ड खरीदी की

October 14th, 2020 18:02 IST
धान की वर्तमान फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर खरीदा गया, इस सत्र में सरकारी एजेंसियों ने रिकार्ड खरीदी की

डिजिटल डेस्क, दिल्ली। कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय धान की वर्तमान फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधार पर खरीदा गया। इस सत्र में सरकारी एजेंसियों ने रिकार्ड खरीद की गेहूं की खरीद भी इसी तरह की जाएगी और किसी किसान को कोई दिक्कत पेश नहीं आएगीः हरदीप पुरी पंजाब में इस वर्ष 11.10.2020 तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीफ फसल की खरीद में अप्रत्याशित वृद्धि, पिछले वर्ष के 7.4 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले इस वर्ष 26.1 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 251 प्रतिशत की वृद्धि है भारत भर में धान की खरीद 35 प्रतिशत बढ़ी और यह पिछले वर्ष के कुल 31.7 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले इस वर्ष कुल 42.5 लाख मीट्रिक टन हो गई वर्ष 2020-21 के दौरान रबी सत्र में गेहूं के खरीद केंद्रों की संख्या बढ़कर 21,869 हो गई। पिछले वर्ष के 14,838 केंद्रों की तुलना में यह करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि है वर्ष 2020-21 के खरीफ सत्र के दौरान 39,130 खरीद केंद्र खोलने की योजना बनाई गई जोकि पिछले वर्ष (2019-20) के दौरान खोले गए 30,549 खरीद केंद्रों की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है रबी और खरीफ दोनों के लिए जहां 2016-17 में कुल 48,550 खरीद केंद्र थे वहीं कुल चार साल में 2019-20 में ये बढ़कर 64,515 हो गए जो 33 प्रतिशत की वृद्धि है वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई धान की खरीद से लाभान्वित हुए किसानों की संख्या में 72 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री, नागर विमानन राज्य मंत्री और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पंजाब में कुछ लोग यह झूठ और ग़लत प्रचार फैला कर किसानों को सरकार के खिलाफ भड़का रहे हैं कि नए कृषि कानून किसान विरोधी हैं जबकि वे यह जानते हैं कि इन कानूनों से किसानों की आमदनी बढ़ेगी और उन्हें इनका लाभ मिलेगा । उन्होंने कहा , एमएसपी बरकरार रहेगा । मौजूदा धान की फसल एमएसपी पर ही खरीदी जा रही है। सरकारी एजेंसियों ने इस सत्र में रिकार्ड खरीद की है । इसी तरह इस सत्र में गेहूं की भी खरीद की जाएगी और किसी भी किसान को कोई परेशानी पेश नहीं आएगी। वह आज कृषि सुधार कानून पर तरनतारन ,अमृतसर के वैज्ञानिकों , प्रोफेसरों और अन्य वरिष्ठ कृषि संबंधी लोगों को वीडियो प्रेस कांफ्रेंस के जरिए संबोधित कर रहे थे। आढ़तिया समुदाय के लिए इन सुधारों के लाभ गिनाते हुए श्री पुरी ने कहा कि इन कानूनों से हमारे आढ़तियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे जोकि मंडियों में अपनी मौजूदा भूमिका के अलावा बेहतर बीज, जानकारी ,सप्लाई चेन में मदद भी मुहैया करा सकेंगे। विनिवेश से इस क्षेत्र के सभी भागीदारों को सप्लाई चेन के लाभ दिलाने में मदद मिलेगी और कृषि उत्पाद की बर्बादी कम होगा जो कि अभी 30 प्रतिशत होती है। संवाद के दौरान श्री पुरी ने यह भी बताया कि पंजाब में एमएसपी पर खरीद में वृद्धि हुई है। मौजूदा खरीफ सत्र में 11.10.2020 तक खरीद में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और यह पिछले वर्ष के 7.4 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 26.1 लाख मीट्रिक टन हो गई है जोकि पिछले वर्ष के मुकाबले 251 प्रतिशत वृद्धि है। 11 अक्तूबर 2020 को, भारत के सभी राज्यों में धान की खरीद पिछले वर्ष के 31.7 एलएमटी के मुकाबले 35 प्रतिशत बढ़कर 42.5 एलएमटी हो गई।पिछले पांच वर्षों में 3,069 एलएमटी धान की खरीद 4,95,043 करोड़ रूपये के समर्थन मूल्य पर की गई जबकि 2009-14 के दौरान 1,768 एलएमटी धान की खरीद मात्र 2,06,059 करोड़ रुपये के समर्थन मूल्य पर की गई थी। एमएसपी की कीमत में 2.40 गुना की वृद्धि देखी जा सकती है। इसी तरह पिछले पांच वर्ष में 2,97,023 करोड़ रुपये के समर्थन मूल्य पर 1,627 एलएमटी गेहूं की खरीद की गई जबकि 2009-14 के दौरान 1,68,202 रुपये के समर्थन मूल्य पर 1,395 एलएमटी गेहूं की खरीद की गई थी। यहां भी एमएसपी की कीमत में 1.77 गुना की वृद्धि देखी जी सकती है। वर्ष 2020-21 के दौरान रबी सत्र में गेहूं के खरीद केंद्रों की संख्या बढ़कर 21,869 हो गई। पिछले वर्ष के 14,838 केंद्रों की तुलना में यह करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष 2020-21 के खरीफ सत्र के दौरान 39,130 खरीद केंद्र खोलने की योजना बनाई गई जोकि पिछले वर्ष (2019-20) के दौरान खोले गए 30,549 खरीद केंद्रों की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक है। रबी और खरीफ दोनों के लिए जहां 2016-17 में कुल 48,550 खरीद केंद्र थे वहीं कुल चार साल में 2019-20 में ये बढ़कर 64,515 हो गए जो 33 प्रतिशत की वृद्धि है। वर्ष 2017-18 से 2019-20 के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य पर हुई धान की खरीद से लाभान्वित हुए किसानों की संख्या में 72 प्रतिशत की वृद्धि हुई। राजग द्वारा पिछले छह वर्ष में किसानों के हित में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम : 1. स्वामीनाथन समिति की एमएसपी को तय करने संबंधी सिफारिशों को लागू किया गया जिससे उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ हुआ। 2. 2020-21 के दौरान कृषि बजट 1,34,399 करोड़ रहा जोकि 2009-10 में 12,000 करोड़ था। 3. आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत 1 लाख करोड़ रुपये।

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