comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

जिम चलाने वाले युवाओं की सेहत से कर रहे खिलवाड़, किडनी फेल से लेकर नपुंसकता तक का खतरा

जिम चलाने वाले युवाओं की सेहत से कर रहे खिलवाड़, किडनी फेल से लेकर नपुंसकता तक का खतरा

डिजिटल डेस्क, नागपुर। युवाओं में फिटनेस व हेल्थ की बढ़ती चाहत का फायदा उठाकर शहर के जिमों में बगैर रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर या हेल्थ वर्कर की सलाह पर प्रोटीन पाउडर समेत विभिन्न प्रकार के हेल्थ सप्लीमेंट दिए जा रहे हैं। जल्दी रिजल्ट के चक्कर में खतरनाक रसायनयुक्त प्रोटीन पाउडर तक का इस्तेमाल हो रहा है। देश-विदेश से ऑनलाइन मंगवाए जा रहे इन पाउडरों पर 50 से लेकर 300 फीसदी से भी अधिक मुनाफे के चक्कर में जिम चलाने वाले युवाओं की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।

शहर में बॉडी बिल्डिंग की स्पर्धाएं आयोजित करने वाली संस्था के अध्यक्ष डॉ गिरीश पांडे के अनुसार शहर में मध्यमक्रम के अधिकतर जिमों में पूर्ण प्रशिक्षित ट्रेनर व डाइटीशियन का अभाव है जिसके कारण प्रोटीन पाउडर के सही अनुपात में उपयोग में गड़बड़ी सामान्य हैं। कई बार ज्यादा लाभ और जल्दी रिजल्ट के चक्कर में भी युवाओं को जरूरत से ज्यादा प्रोटीन पाउडर देना आम है। शहर के कई जिम केवल ट्रेनर के भरोसे चल रहे हैं और ट्रेनर ही अपने अनुभवों के आधार पर प्रोटीन पाउडर व अन्य हेल्थ सप्लीमेंट का डोज तय कर रहे हैं, जो खतरनाक साबित हो सकता है। शहर में गिनती के कुछ ही जिमों में आहार विशेषज्ञ की सलाह पर डाइट प्लान तैयार किया जाता है।

यह है समस्या
रिजल्ट की जल्दी और अत्यधिक मुनाफे के कारण जिमों में धड़ल्ले से हो रहा है खतरनाक रसायनयुक्त प्रोटीन पाउडर का उपयोग, जबकि इसे डॉक्टर की उचित सलाह के आधार पर ही सेवन करना चाहिए। अधिक मात्रा में लेने से कई तरह के साइड इफेक्ट हो रहे हैं।

ऐसा इसलिए
जिम में देश-विदेश से ऑनलाइन मंगवाए जा रहे प्रोटीन पाउडर। इसमें 50 से लेकर 300 फीसदी तक मुनाफा कमाते हैं, इसलिए हर किसी को लेने की दी जाती है सलाह।

किडनी फेल से लेकर नपुंसकता तक का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर में अत्यधिकम मात्रा में प्रोटीन पाउडर जाने से किडनी पर दबाव बढ़ जाता है। कई बार प्रोटीन पाउडर लेने वाला उतनी मात्रा में पानी नहीं पीता है जितना प्रोटीन पाउडर के खाने के बाद जरूरी होता है। इसके कारण भी किडनी पर दबाव बढ़ जाता है और उसके फेल होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। बॉडी बिल्डिंग से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार हार्माेन्सयुक्त प्रोटीन पाउडर के कारण नपंुसकता का भी खतरा होता है। इसके साथ ही हार्माेन संबंधी गड़बड़ियां, मांसपेशियों में दर्द, डिस्क खिसकने जैसी परेशानियां भी आम हैं।

पांच से दस हजार तक खर्च कर रहे युवा
कई युवाओं ने माना कि ट्रेनर की सलाह वे प्रोटीन पाउडर व सप्लीमेंट पर प्रति माह 2500 से 5000 रुपए तक खर्च कर रहे हैं। इसके साथ ही जिम की मासिक फीस, डाइट का खर्च अलग है। 20 से 30 वर्ष आयु वर्ग के आधे युवा भी जिम जा रहे हैं तो यह हर माह करोड़ों से ज्यादा का व्यवसाय बन चुका है।

कम समय में मसल्स बनाना खतरनाक
ज्यादातर लोग तीन महीने में बॉडी बनाने की कोशिश करते हैं, ये पूरी तरह से गलत है। कम समय में अच्छी बॉडी नहीं बन सकती है। ज्यादातर लोग जिम या फिटनेस सेंटर फिट होेने के लिए जाते हैं, लेकिन कुछ दिनों में सिक्स पैक बनाने में लग जाते हैं। उसी के बाद पावडर और खतरनाक ड्रग्स के चक्कर में फंस जाते हैं। शर्मा के अनुसार शुरुआती एक साल तक केवल बेसिक एक्सरसाइज करना चाहिए। इसके बाद ही हेवी वेट के एक्सरसाइज शुरू करने चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रोटीन लेना गलत नहीं है, लेकिन शरीर के वजन की क्षमता के अनुसार प्रोटीन लेना चाहिए। इसलिए ये डाक्टर की सलाह के बिना लेना गलत है।
संजय शर्मा, महासचिव, इंडियन फिटनेस और बॉडी बिल्डिंग फेडरेशन

हेल्थ सप्लीमेंट विशेषज्ञों की सलाह पर ही लें
फूड एंड ड्रग अथॉरिटी के एक्ट के अनुसार प्राेटीन पाउडर समेत सभी तरह के हेल्थ सप्लीमेंट रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर या हेल्थ वर्कर की सलाह पर ही ली जानी चाहिए। -शरद कोलते, सहायक कमिश्नर, एफडीए

18 से 20% की दर  से बढ़ रही है खपत
डाॅक्टर भले ही प्रोटीन पाउडर जैसे डाइट्री सप्लीमेंट बगैर डाॅक्टरी सलाह के लेने का मना करते हों, लेकिन देश में इसकी खपत हर साल करीब 18 से 20 प्रतिशत बढ़ रही है। अच्छे मसल्स और बाॅलीवुड हीरो जैसे सिक्स पैक बनाने की चाहत में युवा वर्ग प्रोटीन पाउडर सहित विटामिन गोलियां, एनर्जी ड्रिंक जैसे डाइट्री सप्लीमेंट्स भारी मात्रा में ले रहे हैं। वर्ष 2018 तक डायट्री सप्लीमेंट्स का बाजार 8 से 8.5 हजार करोड़ रुपए से अधिक होने का अनुमान है। एक दावे के अनुसार बिक्री में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी प्रोटीन पाउडर की है। कई जिम 20 से 25 फीसदी कमीशन पर ऐसे ब्रांड युवाओं को लेने की सलाह दे रहे हैं।

78% शहरी युवा कर रहे सेवन
ऐसोचैम की ओर से कराए गए एक सर्वे के मुताबिक 78 फीसदी शहरी युवाओं के डायट्री सप्लीमेंट का सेवन कर रहे हैं। 47 फीसदी ने कहा कि वे प्रोटीन पाउडर का प्रयोग करते हैं।

हाईडोज से युवक पहुंचा अस्पताल
हाल ही में सामने आए एक मामले में 23 साल के संदीप ठाकुर को मसल पावर बढ़ाने की हाईडोज के कारण अस्पताल में भर्ती कराना पड़ गया। तीन महीने में उसे 18 लाख के इंजेक्शन और कैप्सूल दे दिए। अधिकतर जिमों में ट्रेनर एक्सरसाइज करने के गुर बताने के साथ युवाओं को मसल पावर बढ़ाने के लिए दवाएं और ड्रग्स दे रहे हैं।

हार्माेनयुक्त प्रोटीन पाउडर खतरनाक
जिमों में कई बार जल्दी मसल्स बनाने के लिए स्टेरायडयुक्त प्रोटीन पाउडर का इस्तेमाल किया जाता है। किशोर व युवा भ्रामक विज्ञापनों से प्रेरित होकर भी ऐसे पाउडर का उपयोग करने लगते हैं। किशोर कैंप में जल्दी बॉडी बनाने के लिए इस तरह के पाउडर का उपयोग के कई मामले सामने आते हैं। स्टेरॉयडयुक्त प्रोटीन पाउडर सेहत के लिए खतरनाक हैं। इससे कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं, यहां तक कि किडनी भी प्रभावित हो सकता है। -अविनाश गावंडे, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, जीएमसीएच नागपुर

जिम संचालक ऑनलाइन मंगवा रहे हैं प्रोटीन पाउडर
प्रोटीन पाउडर के नाम पर बिक रहे अधिकतर सप्लीमेंट्स में एस्टेरॉयड समेत कई तरह के खतरनाक रसायन हैं। एसोसिएशन इस तरह की चीजों की बिक्री के खिलाफ है। शहर की दवा दुकानों में अधिकतर ऐसे प्रोटीन पाउडर मिलते हंै, जो गर्भवती महिलाओं के लिए होते हैं। शहर में जिमों में कसरत करने वाले 70 फीसदी युवा आज इन खतरनाक प्रोटीन पाउडरों का उपयोग कर रहे हैं। ये पाउडर जिम संचालक ऑनलाइन मंगवा रहे हैं और 50 से 300 फीसदी तक कमीशन ले रहे हैं।
-हेतल ठक्कर, सचिव केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, नागपुर

लाइसेंस व पंजीकरण होना जरूरी
जिम शुरू करने के लिए फिलहाल किसी भी प्रकार के पंजीकरण या लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है। हालांकि तेजी से बढ़ते और सीधे युवाओं से जुड़े इस व्यवसाय के लिए कुशल व प्रशिक्षत ट्रेनर के साथ-साथ लाइसेंस व पंजीकरण आवश्यक किया जाना चाहिए।
-गिरीश पांडे, अध्यक्ष हॉस्पिटल इंडस्ट्री एसोसिएशन, बॉडी बिल्डिंग मेगा ग्रुप और जागरूक पालक ग्रुप

हो रहे कई नुकसान
बिना डॉक्टरी सलाह हाई प्रोटीन व स्टेराइड लेने के कई नुकसान हैं। यह हडि्डयों को कई तरह से नुकसान पहुंचाता है। रूमेटाइड आर्थराइटिस मरीजों को हाई प्रोटीन नहीं लेना चाहिए। इससे मांसपेशियों व हड्डियाें का कैल्शियम कम होने लगता है। किडनी, लिवर, हार्ट को भी नुकसान होता है। -डॉ. अभिजीत बंसोड, अार्थोपेडिक
 

कमेंट करें
RMEri
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।