दैनिक भास्कर हिंदी: कच्ची उम्र की नादानी : पीड़िता ने ही आरोपी के पक्ष में अदालत से लगाई गुहार

November 11th, 2019

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  समाज में आए दिन किशोरवर्ग (टीनएजर्स) से जुड़े ऐसे विवाद देखने को मिलते हैं, जो गंभीर रूप लेकर पुलिस थानों और अदालत की दहलीज तक पहुंचते हैं। कच्ची उम्र, नादानी और मार्गदर्शन की कमी के कारण लिए गए फैसले आगे चल कर बड़ी मुसीबत भी बन सकते हैं। ऐसा ही एक मामला बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ में न्या.सुनील शुक्रे और न्या.मिलिंद जाधव की तत्कालीन बेंच के समक्ष भी आया। इसमें खास बात यह थी कि पीड़िता ने खुद आरोपी का पक्ष लिया और उसे मामले से मुक्त करने की गुहार लगाई। वर्ष 2015 में लकड़गंज पुलिस में दर्ज मामले को रद्द कराने के लिए आरोपी और पीड़िता ने मिलकर हाईकोर्ट में अर्जी लगाई। कोर्ट में दलील दी कि उन दोनों की कच्ची उम्र, नादानी और गलतफहमी के कारण यह सारा विवाद हुआ था। दोनों के भविष्य की खातिर आरोपी के खिलाफ सत्र न्यायालय में जारी मुकदमा खारिज किया जाए।

हाईकोर्ट ने बरी किया
हाईकोर्ट ने इस तथ्य पर गौर किया कि पीड़िता ने आरोपी पर लगाए सभी आरोप वापस ले लिए हैं और दोनों पक्षों में समझौता हो चुका है। लेकिन चूंकि पुलिस इस प्रकरण में सत्र न्यायालय में चार्जशीट दायर कर चुकी है, तो महज ट्रायल एक औपचारिकता रह जाएगा। किशाेरावस्था में हुई इस चूक के लिए अब आरोपी और पीड़िता दोनों को कोर्ट के चक्कर लगाने होंगे। ऐसे में हाईकोर्ट ने माना कि यह एकतरफा प्रेम का मामला था और दोनों को परिस्थिति से निपटने की "मैच्योरिटी' नहीं थी। वहीं आरोपी की पत्नी भी गर्भ से है और पीड़िता के सामने पूरा शैक्षणिक करियर है। ऐसे में हाईकोर्ट ने आरोपी के खिलाफ दायर प्रकरण रद्द करके उसे मामले से मुक्त कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से एड.पी.एस.जयस्वाल और सरकार की ओर से सरकारी वकील के.एस.जोशी ने पक्ष रखा। 

ऐसे बढ़ा था विवाद
वर्ष 2015 में प्रिया ने रवि (दोनों परिवर्तित नाम) के खिलाफ शहर के लकड़गंज थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उस वक्त प्रिया की उम्र 17 और रवि की 19 वर्ष थी। प्रिया की शिकायत थी कि  रवि उसे कई बार रोक कर दोस्ती बनाने के लिए कहा करता था, दोस्ती न करने पर आत्महत्या की धमकी देता था। यहां तक कि उसने उन दोनों के प्रेम संबंध और विवाह हो जाने की अफवाह भी क्षेत्र में उड़ा दी थी। प्रिया की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ लकड़गंज पुलिस में भादवि 354(ए)(1)(आई), 354(डी), 341, 506(बी) और पॉक्सो धारा 7, 8 के तहत मामला दर्ज करा दिया था। प्रकरण में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सत्र न्यायालय में चार्जशीट प्रस्तुत कर दी थी और निचली अदालत में ट्रायल शुरू होने वाला था। समय रहते दोनों पक्षों ने समझौता करके मामला रफा-दफा करने के लिए हाईकोर्ट की शरण ली।

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