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5 नवंबर तक एसटी बसों का किराया बढ़ा, 10 प्रतिशत अधिक देना होगा

5 नवंबर तक एसटी बसों का किराया बढ़ा, 10 प्रतिशत अधिक देना होगा

डिजिटल  डेस्क, नागपुर। त्योहारों के कारण यात्रियों की भीड़ बहुत ज्यादा बढ़ गई है। ट्रेनों के साथ बसों में भी जमकर भीड़ देखने मिल रही है। लेकिन इन दिनों एस टी बसों का किराया यात्रियों की जेब खाली कर रहा है। क्योंकि प्रशासन ने 24 अक्तूबर के मध्यरात्रि से 5 नवंबर तक 10 प्रतिशत एस टी बसों का सफर महंगा कर दिया है। ऐसे में नागपुर से पुणे शिवशाही का किराया 15 सौ को भी पार कर गया है। ऐसे में ट्रेनें हाउसफुल व निजी बसों में लूट के बाद एस टी बसों पर निर्भर रहनेवाले यात्रियों पर जाएं तो जाएं कहां की स्थिति आ गई है। यात्री अपने गंतव्य तक जाने के लिए परेशान हो रहे हैं।।  नागपुर विभाग में कुल 580 से ज्यादा बसें है। जिसमें लाल बसों के अलावा शि‌वशाही बसें भी शामिल हैं। इन बसों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री निर्भर रहते हैं। दिवाली के दिनों में रेलवे के अलावा बसों में भी यात्रियों की भीड़ बढ़ जाती है।  इसी बात को ध्यान में रखते हुए एस टी प्रशासन ने हालही में किराया बढ़ाया है।

शिवशाही का किराया  

शहर                 पुराना किराया          नया किराया

 पुणे                 1370                1507 रुपये

हैद्राबाद               900                 990 रुपये

यवतमाल              290                 320

चंद्रपुर                290                 320

औरंगाबाद             940                 1034 रुपये

वर्धा                  145                 159 रुपये

लाल बसों का किराया 

रायपुर                305                 335 रुपये

चंद्रपुर                195                 205 रुपये

पुणे                  925                 1017 रुपये

औरंगाबाद             635                 698 रुपये

शिवनी                150                 165 रुपये

इंदौर                 665                 731 रुपये

कर्मचारियों को मिलेगा बोनस 
दिवाली के दो दिन पहले एस टी प्रशासन उपरोक्त बढ़ाये किराये से मिलेनेवाली आमदनी से कर्मचारियों को खुश करनेवाली है। कर्मचारियों को ढाई हजार रुपये बोनस दिया जाने वाला है। हालांकि इससे कर्मचारी संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं।  कंर्मचारियों  का कहना है कि इतनी महंगाई में ढाई हजार रुपए में दिवाली कैसे मनाई जा सकती है। महाराष्ट्र एस टी कामगार सेना ने बोनस की राशि बढ़ाने की मांग भी की है। 

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।