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टूलकिट मामला : निकिता जैकब की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, दिल्ली पुलिस ने जारी किया है गैर जमानती वारंट 

टूलकिट मामला : निकिता जैकब की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित, दिल्ली पुलिस ने जारी किया है गैर जमानती वारंट 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। किसानों के आंदोलन से जुड़े टूलकिट मामले में संदिग्ध आरोपी अधिवक्ता निकिता जैकब के ट्रांजिट अग्रिम जमानत आवेदन पर बांबे हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। हाईकोर्ट ने जैकब के आवेदन पर बुधवार को अपना फैसला सुनाने की बात की है। दिल्ली कोर्ट की ओर से जैकब के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है। मामले में गिरफ्तारी की आशंका के मद्देनजर जेकब ने हाईकोर्ट में चार सप्ताह तक के लिए जमानत दिए जाने की मांग को लेकर आवेदन दायर किया है। बुधवार को न्यायमूर्ति पीडी नाईक के सामने जैकब के आवेदन पर सुनवाई हुई। इस दौरान जैकब की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता मिहीर देसाई ने कहा कि हाईकोर्ट की औरंगाबाद खंडपीठ ने इसी मामले में दूसरे संदिग्ध आरोपी शांतनु मुलुक को 10 दिन के लिए ट्रांजिट जमानत प्रदान की है। मुलुक के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। हम अपने मुवक्किल के लिए सीमित समय के लिए सुरक्षा की मांग कर रहे है। मेरे मुवक्किल का खालिस्तान से कोई संबंध नहीं है। मेरे मुवक्किल को आशंका है कि उसके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मेरे मुवक्किल की टूलकिट में हिंसा का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए इस मामले में देशद्रोह से संबंधित धारा (124ए) नहीं लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि सिर्फ क्षेत्राधिकार की बंदिश के आधार किसी भी व्यक्ति की आजादी को खत्म नहीं किया जा सकता है। पुलिस ने मेरे मुवक्किल के घर पहुंचकर उनका बयान दर्ज कर चुकी है। इसके साथ उनके उपकरण भी पुलिस ने अपने कब्जे में लिए हैं। मेरी मुवक्किल इसी अदालत में प्रैक्टिस करती है। 

इस पर न्यायमूर्ति ने दिल्ली पुलिस की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता हितेन वेणेगांवकर ने कहा कि फिलहाल हम ट्रांजिट बेल के मुद्दे पर ही सुनवाई कर रहे। क्या आप इसका विरोध करते हैं। जवाब में श्री वेणेगांवकर ने कहा कि दिल्ली में किसान आंदोलन के दौरान हुई हिंसा में करीब 400 लोग घायल हुए थे। ऐसे में इस मामले में टूलकिट का अपलोड होना काफी महत्वपूर्ण नजर आ रहा है। आरोपी के खिलाफ दिल्ली में मामला दर्ज किया गया है, इसलिए यहां आरोपी के जमानत आवेदन को दायर करने का औचित्य नहीं है।

पुलिस के सामने नहीं हुई हाजिर

वेणेगांवकर ने कहा कि आरोपी ने पुलिस के सामने हाजिर होने का आश्वासन दिया था। इस लिए पुलिसकर्मी दिनभर आरोपी का इंतजार करते रहे किंतु वह हाजिर नहीं हुई। यदि किसी आरोपी के खिलाफ दूसरे राज्य में मामला दर्ज है तो वह गिरफ्तारी से बचने के लिए ट्रांजिट जमानत आवेदन के लिए आवेदन करता है। ताकि वह दूसरे राज्य में पहुंच कर नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सके। न्यायमूर्ति ने फिलहाल मामले से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। 

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