comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

अंधमूक चौराहे से दो किलोमीटर के दायरे में चौड़ी सड़क पर ट्रकों का कब्जा, सर्विस रोड  पूरी तरह आगोश में 

अंधमूक चौराहे से दो किलोमीटर के दायरे में चौड़ी सड़क पर ट्रकों का कब्जा, सर्विस रोड  पूरी तरह आगोश में 

डिजिटल डेस्क जबलपुर । शहर के पश्चिमी हिस्से का प्रमुख चौराहा अंधमूक, सड़क पर ट्रकों के कब्जे की वजह से आम आदमी के लिए तकलीफदेय साबित हो रहा है। इस चौराहे के दो किलोमीटर के दायरे में हालात ऐसे हैं कि जैसे पूरी सड़कों पर ट्रक और गैराज मालिकों ने कब्जा कर लिया है। यदि ये ट्रक किनारे खड़ें हों या पार्किंग  की जगह हो तो इनसे किसी को परेशानी नहीं होगी, लेकिन स्थिति यह है कि ट्रकों को ऐसी जगह खड़े कर दिया जाता है जहाँ से लोगों को निकलना है। 
तेज गति से हाईवे पर आदमी चौराहे से निकल ही नहीं सकता। ट्रकों का कब्जा यहाँ आस-पास इस तरह समझा जा सकता है कि चौराहे पर फ्लाई ओवर बनाया गया है लेकिन उसके ऊपर तक वाहनों को खड़ा किया जा रहा है। पश्चिमी हिस्से से शहर में प्रवेश करने वाले इस उपयोगी चौराहे से लेकर कई किलोमीटर के दायरे में अतिक्रमण करने की होड़ सी मच गई है। कोई समझने तैयार नहीं है कि बड़ी मशक्कत और लंबे इंतजार के बाद हाईवे को चौड़ा किया गया है। यह आम आदमी की सहूलियत के लिए बनाया गया है लेकिन यहाँ देखकर लगता है कि जैसे इस 20 0 फीट के चौड़े हाईवे को ट्रक मालिकों के लिए कब्जा करने के लिए ही बनाया गया है। पहले जब सड़क सँकरी थी तब  यहाँ पर इतने गैराज और ट्रक नहीं दिखाई देते थे पर इस समय तो जैसे बाढ़ सी आ गई है। 
ट्रकों का सड़कों पर कब्जा होने से यहाँ गुजरने वाले लोगों को बड़ी परेशानी हो रही है। यह हाईवे पर सुगम ट्रैफिक के लिहाज से भी उचित नहीं है। सर्विस रोड की हालत तो ऐसी है कि पूरी तरह इसको निगल लिया गया है।
यहाँ तक कब्जे ही कब्जे 
चौराहे से भोपाल रोड तेवर गाँव तक, इसी तरह कटनी की ओर बहदन के रेलवे ब्रिज के करीब और तिलवारा की ओर सगड़ा गढ़ा रेलवे स्टेशन के पहले तक ट्रकों से यातायात पूरी तरह से चौपट हो रहा है। केवल ट्रैफिक की समस्या नहीं मुख्य खतरा यह है कि कब्जों की वजह से हादसों का खतरा भी लगातार बढ़ रहा है। चौराहे के नीचे गुमटियाँ, चाय-पान के ठेले हैं इनकी वजह से सड़क पर चलना मुश्किल है। पूरे एरिया को कब्जा करने वालों  ने कस्बाई शक्ल में उभार दिया है।


 

कमेंट करें
Qa9wP
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।