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धूल खा रही है यूनिवर्सिटी की डेटा बैंक योजना, यूजीसी के आदेश पर नहीं हो रहा अमल

धूल खा रही है यूनिवर्सिटी की डेटा बैंक योजना, यूजीसी के आदेश पर नहीं हो रहा अमल

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों का डिजिटल डेटा बैंक योजना बीते करीब चार वर्ष से धूल खा रही है। यूनिवर्सिटी  ने वर्ष 2015 में अपने यहां डेटा बैंक बनाने की घोषणा की थी। लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हो सका है। यूनिवर्सिटी  का इतिहास 90 साल पुराना है। ऐसे में विद्यार्थियों के पुराने से पुराने दस्तावेज सहेज कर रखना यूनिवर्सिटी  के लिए मुसीबत बन रहा है। यूनिवर्सिटी  के परीक्षा भवन मंे तो दस्तावेजों का ढेर लगा है, और पुराने दस्तावेज पड़े-पड़े कबाड़ हो रहे हैं। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए यूनिवर्सिटी  ने सन् 1956 से आगे सभी वर्षों के विद्यार्थियों के दस्तावेज डिजिटल फार्मेट में तब्दील करने का निर्णय लिया था। इसके स्टोरेज के लिए विवि ने डाटा बैंक बनाने की घाेषणा की थी, लेकिन अब तक यूनिवर्सिटी  प्रशासन की उदासीनता के चलते यह योजना शुरू नहीं हो पाई है।

एनएडी से जुड़ना है
 उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों के दस्तावेज डिजिटल करने की दिशा में यूजीसी भी गंभीर है। यूजीसी ने इसके लिए नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी (एनएडी) की स्थापना की है। इस विभाग में एनएसडीएल और सीडीएसएल दो उपविभाग तैयार किए गए हैं। उपविभागीय का काम सभी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों के दस्तावेज डिजिटल फार्मेट में तैयार कराना है। इस दिशा मे यूजीसी ने नागपुर यूनिवर्सिटी सहित देश के सभी विवि को एनएडी का स्वतंत्र कक्ष स्थापित करने का आदेश दिया है। इसके लिए एक नोडल अधिकारी की भी नियुक्ति जरूरी है। यह प्रक्रिया तत्काल पूरी की जाएं, यह भी यूजीसी के आदेश हैं। लेकिन नागपुर यूनिवर्सिटी  पर फिलहाल इस आदेश का कोई असर होता नजर नहीं आ रहा। शिक्षा संस्थानों को एक बार फिर इस उपक्रम की याद दिलाते हुए यूजीसी ने नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसमें दिसंबर तक सभी विश्वविद्याालयों को अपडेट डेटा अपलोड करने के निदेश दिए गए हैं।अब देखना है कि यूनिवर्सिटी  निर्धारित अवधि तक इसे अपडेट कर पाता है या नहीं।

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