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किसानों का जीवन सुधारने विज्ञान का प्रयोग आवश्यक : डा. पेशवे

किसानों का जीवन सुधारने विज्ञान का प्रयोग आवश्यक : डा. पेशवे

डिजिटल डेस्क,  नागपुर।  किसानों का जीवनस्तर सुधारने के लिए विज्ञान व प्राद्योगिकी का प्रयोग आवश्यक है। यह कहना है डा. दिलीप पेशवे का। वे सी.पी. एण्ड बेरार महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा 'इंटरवेंशन आफ साइंस एंड टेक्नालाॅजी फाॅर दी डेवलपमेंट आफ विदर्भ रीजन' विषय पर आयोजित 2 दिवसीय चर्चासत्र में बोल रहे थे। 

उन्होंने कहा कि विभिन्न शिक्षा संस्थाओ में समाजोपयोगी अनुसंधान होने चाहिए। साथ ही वे केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रह कर अधिक से अधिक स्थानों पर पहुंचें, इसके लिए भी प्रयत्न होने चाहिए। चतुर्थ सत्र के प्रारंभ में वरिष्ठ पत्रकार कार्तिक लोखंडे ने विदर्भ विकास वैज्ञानिक मंडल द्वारा किए हुए महत्वपूर्ण शोध के विषय में जानकारी दी। उपरांत वरिष्ठ पत्रकार योगेश पांडे ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर विशेषज्ञ सदस्य कपिल चंद्रायण प्रमुखता से उपस्थित थे।  समन्वय सचिव अरविंद जोशी ने प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। अंत में समापन सत्र के अध्यक्ष प्राचार्य डा. मिलिंद बारहाते ने मंडल की भूमिका व योगदान पर चर्चा की। आभार प्रदर्शन समाजशास्त्र विभाग के डा. अरविंद जोशी ने तथा संचालन डा. रश्मि पारसकर ने किया। 

नए पुराने -गीतों ने श्रोताओं की दिल जीता

रजनीगंधा के गायकों ने बॉलीवुड के नए, पुराने गीतों  पर प्रस्तुति कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। ‘छूकर मेरे मन को...’ कार्यक्रम का आयोजन साईं मंदिर के पीछे वर्धा रोड स्थित विकास सभागृह में किया गया। कार्यक्रम की संकल्पना रजनीगंधा की संचालिका  परिणीता मातूरकर की तथा सह-संयोजन तुषार विघ्ने तथा एडवोकेट सिमरन नायडू का था। डॉ. प्रशांत मातुरकर व दीपक तांबेकर का विशेष सहयोग रहा। गायक कलाकार अंजलि बागडे, सुदेश अय्यर, प्रतिभा कडू, अजय देशपांडे, विजय पांडे, आशुतोष चहांदे, डॉ. हेमा फुलारे, गिरीश शर्मा, माधव पटले, मंगेश देशमुख, किरण जायस्‍वाल, प्रमोद अंधारे, प्रशांत मानकर, प्रिया गुप्‍ता, राजेश खरवडकर, रवींद्र परांजपे, सैले गुप्‍ता, एड. शाम अहीरकर, एस. के. दीक्षित और अनिल मोहता ने विविध गीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम की शुरूआत "इतनी शक्ति हमें दे ना दाता...’ से की गई।  उपरांत "रस्‍मे उलफत को, नजर न लग जाए..., देखता हूं कोई लड़की हंसी..., मुझे इश्‍क है तुम्ही से..., कोई नजराना लेके आया है..., दिल के टुकड़े..., है दिल तो आवारा...' गीत प्रस्तुत किए।  कार्यक्रम का समापन "जय-जय शिवशंकर' गीत से किया गया।  

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।