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ढाई साल बाद वरवरा राव को मिली जमानत, एल्गार परिषद मामले में 2018 में हुई थी गिरफ्तारी 

ढाई साल बाद वरवरा राव को मिली जमानत, एल्गार परिषद मामले में 2018 में हुई थी गिरफ्तारी 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बांबे हाईकोर्ट ने भीमा कोरेगांव के एल्गार परिषद व माओवादियों से कथित संबंध रखने के मामले में आरोपी वरवरा राव को अंतरिम जमानत प्रदान की है। हाईकोर्ट ने राव को सेहत ठीक न होने के आधार पर 6 माह के लिए सशर्त जमानत दी है। कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले में मूकदर्शक नहीं बन सकते है और हिरासत के दौरान 82 वर्षीय राव की सेहत को और नहीं बिगड़ने दे सकते। 92 पन्ने के अपने फैसले में कोर्ट ने कहा है कि यदि राव को दोबारा जेल में भेजा जाता है तो इससे उनके जीवन को खतरा पैदा हो सकता है। क्योंकि उनकी सेहत ठीक नहीं है। ऐसे में यह उनके जीवन व स्वास्थ्य़ से जुड़े मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। राव का मामला मेडिकल के आधार पर जमानत देने के लिए बिल्कुल सही व उपयुक लग रहा है।  अगस्त 2018 से जेल में बंद राव को कोर्ट ने मुंबई स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत के क्षेत्राधिकार में रहने व एनआईए के पास अपना पासपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया है। अदालत राज्य सरकार के उस आग्रह को भी अस्वीकार कर दिया दिया है जिसके तहत सरकार ने कहा था कि नानावटी अस्पताल से छुट्टी के बाद राव को जेजे अस्पताल में बने कैदियों के वार्ड में रखा जाएगा। इसलिए राव को जमानत न दी जाए ।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि राव से बड़ी संख्या में लोगों को न मिलने दिया जाए। कोर्ट ने राव को राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय फोन करने तथा प्रेस से बात करने से मना किया है। कोर्ट ने राव को मुकदमे की सुनवाई के दौरान कोर्ट में हर तारीख में  तथा जरुरत पड़ने पर जांच एजेंसी के सामने प्रत्यक्ष अथवा ऑनलाइन उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। हालांकि अदालत ने राव को सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन करने की छूट दी है। 

न्यायमूर्ति एस एस शिंदे व न्यायमूर्ति मनीष पीटले की खंडपीठ ने सोमवार को राव को जमानत देते समय मुख्य रुप से उनकी खराब सेहत व तलोजा जेल में अपर्याप्त मेडिकल सुविधाओं का संज्ञान लिया है। खंडपीठ ने कहा कि यदि हम आरोपी को इस मामले में जमानत नहीं देते हैं तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन होगा। इसके अलावा यदि राव की हिरासत को जारी रखा गया तो वे विभिन्न बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। इसलिए राव को सेहत ठीक न होने के आधार पर जमानत प्रदान की जाती है। 

इस फैसले के बाद एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने खंडपीठ से अपने फैसले पर तीन सप्ताह तक के लिए रोक लगाने का आग्रह किया। किंतु खंडपीठ ने अपने फैसले पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। राव फिलहाल नानावटी अस्पताल में हैं। खंडपीठ ने कहा कि यदि राव की अस्पताल में सेहत ठीक हो तो वहां से उन्हें छुट्टी दे दी जाए और उन्हें वहीं से 50 हजार रुपए की मुचलके पर जमानत दी जाए। गौरतलब है कि खंडपीठ ने मामले से जुड़े सभी पक्षों को सुनने के बाद 1 फरवरी 2021 को अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। जिसे खंडपीठ ने सोमवार को सुनाया है। 
    

 
 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।