दैनिक भास्कर हिंदी: सीन-सीन पर दिखेगी तंबाकू के खिलाफ चेतावनी, स्मोकिंग सीन को लेकर और सख्त हुआ सेंसर बोर्ड

November 30th, 2020

डिजिटल डेस्क, मुंबई। हीरो-हीरोइन हो या खलनायक, फिल्मी पर्दे पर हर कोई धड़ल्ले से हर फिक्र को धुएं में उड़ाता दिखाई देता है, लेकिन अब यह सीन इतने आसान नहीं होंगे। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी सेंसर बोर्ड ने तंबाखू से हर साल हो रही लाखों मौतों से लोगों को अगाह करने का फैसला किया है। अब फिल्मों में धूम्रपान वाले दृथ्यों पर ‘धुम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इसके अलावा अब यह भी लिखना होगा कि ‘तंबाखू से हर साल 80 लाख लोगों की मौत हो रही है।

इसके पहले अक्टूबर 2011 में तत्कालिन स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद की पहल पर केंद्र सरकार ने यह नियम लागू किया था कि फिल्मों में सिगरेट, हुक्का पीने या तंबाखू खाने वाले हर दृश्य पर तंबाखू संबंधित चेतावनी प्रदर्शित करनी होगी। सफेद पृष्ठभूमि पर काले फांट में ‘धूम्रपान से कैंसर होता है’, ‘धूम्रपान जानलेवा है’, ‘स्मोकिंग किल’ जैसी चेतावनी लिखनी होगी। स्वास्थ्य चेतावनियां उसी भाषा में लिखने का नियम है, जिस भाषा की फिल्म हो। हालांकि हिंदी फिल्मों में भी यह चेतावनी अक्सर अंग्रेजी में ही दिखाई देती हैं। 

हालांकि अब इतनी चेतावनी लिखने से भी काम नहीं चलेगा। नए नियमों के तहत अब धूम्रपान वाले हर सीन पर उपरोक्त चेतावनी के अलावा यह भी लिखना होगा कि ‘तंबाकू से हर साल 80 लाख लोगों की जान जाती है।’ सेंसर बोर्ड ने इस नए नियम को लागू भी कर दिया है। आने वाली फिल्मों में अब स्मोकिंग वाले सीन पर यह चेतावनी दिखाई देगी। सेंसर बोर्ड की एक अधिकारी ने बताया कि इससे तंबाकू के खिलाफ संदेश और असरदार हो सकेगा। 

फिल्मों में धूम्रपान पाबंदी की उठती रही है मांग 

फिल्मी पर्दे के नायक-नायिकाओं को अपना आदर्श मानने वालों की कमी नहीं है। बहुत से लोगों का ऐसा मानना है कि फिल्मों में सिगरेट-शराब पीने के दृश्यों के कारण समाज में इसे बढ़ावा मिलता है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन वर्षों पहले फिल्मों में धुम्रपान के दृश्यों पर पाबंदी की मांग कर चुका है। एसोसिएशन का मानना है कि स्मोकिंग वाले दृथ्यों पर चेतावनी लिखना कारगर साबित नहीं हो रहा है। साल 2005 में तत्कालिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. अंबुमणि रामदास ने फिल्मों में धुम्रपान वाले दृश्यों पर पूरी तरह से पाबंदी लगाने की मांग की थी। हालांकि पेश से एमबीबीएस डाक्टर रामदास की इस मांग का फिल्म इंडस्ट्री ने कड़ा विरोध किया था जिसके चलते उनकी यह मांग लागू नहीं हो सकी थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन के मुताबिक बॉलीवुड की 72 प्रतिशत फिल्मों में सिगरेट पीने के दृश्य होते हैं।