दैनिक भास्कर हिंदी: सावन तक आधे भी नहीं भरे जलाशय, तोतलाडोह में 20.73 प्रतिशत पानी, जल संकट का खतरा

August 18th, 2018

डिजिटल डेस्क , नागपुर। वर्ष ऋतु आधी बीत चुकी है। सावन महीने तक जिले के जलाशय आधे भी नहीं भर पाए हैं। बारिश के अचानक गायब होने से नागपुर शहर पर जलसंकट का खतरा बढ़ता दिख रहा है। गत सप्ताह पेंच-तोतलाडोह जलाशय में 27 प्रतिशत जल भंडारण था, लेकिन जलस्तर लगातार गिर रहा है और 20.73 प्रतिशत पर आ गया है। इससे आगामी वर्ष शहर के लिए जलापूर्ति चिंताजनक साबित हो सकती है। चिंता इसलिए भी बढ़ी है कि मौसम वैज्ञानिकों ने भी आगामी दिनों में अच्छी बारिश की उम्मीद कम जताई है।

अगर अच्छी बारिश नहीं होती है, तो शहर को जलापूर्ति करने वाले जलाशयों में पर्याप्त जल भंडारण होना मुश्किल है। जबकि इसी महीने पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने पेंच प्रकल्प का पानी किसानों को खरीफ फसल के लिए छोड़ने का निर्णय लिया है। पालकमंत्री के इस निर्णय से शहर का पानी वैसे ही कम हो रहा था, अब बारिश के नदारद होने से संकट और बढ़ गया है। 

जिले में हैं 5 बड़े जलाशय
नागपुर जिले में 5 बड़े जलाशय हैं। इसमें तोतलाडोह, नवेगांव खैरी, खिंडसी, नांद, वड़गांव शामिल हैं। तोतलाडोह और नवेगांव खैरी शहर को जलापूर्ति के लिए बड़े साधन हैं। 17 अगस्त तक तोतलाडोह में 20.73 प्रतिशत, नवेगांव खैरी में 47.64 प्रतिशत, खिंडसी में 31.91 प्रतिशत, नांद में 54.53 प्रतिशत और वड़गांव में 59.07 प्रतिशत पानी शेष है। तोतलाडोह का प्रति वर्ष अनुसार आकलन करने पर जलाशय में अगस्त तक 60 से 70 प्रतिशत तक पानी भंडारण होता था, लेकिन चौराई बांध ने पानी का प्रवाह रोक दिया है, जिससे मध्यप्रदेश की ओर से आने वाला पानी तोतलाडोह में सीमित रह गया है। दूसरी मार बारिश की है। बारिश नहीं होने से जलस्तर में तेजी से गिरावट आई है। 

अच्छी बारिश का इंतजार
शहर को साल भर पानी मिले, इतना पानी भी जलाशय में नहीं है। अगर अच्छी बारिश नहीं हुई, तो आगामी जनवरी से ही शहर में जलसंकट हो सकता है। मध्यम प्रकल्पों की भी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। नागपुर जिले के 13 मध्यम प्रकल्पों में 54.12 प्रतिशत पानी है। हालांकि यह जलापूर्ति के उपयोग में नहीं आते हैं। इसका सिंचाई सुविधा व अन्य के लिए उपयोग होता है, जिससे जलापूर्ति के साधन फिलहाल सीमित हो गए हैं। ऐसे में बारिश की बेरुखी ने शहरवासियों का संकट बढ़ा दिया है। 

पानी आरक्षण पर सीधा असर 
फिलहाल शहर को कन्हान जलशुद्धिकरण केंद्र से 65.71 एमएमक्यूब, पेंच नवेगांव से 112 एमएमक्यूब पानी मिल रहा है। अस्थायी व्यवस्था से होने वाली जलापूर्ति में से 78 एमएमक्यूब शहर को जलापूर्ति होती है। पेंच-तोतलाडोह का जलभंडारण कम होने पर उसका सीधा असर शहर के लिए पानी आरक्षण पर हो सकता है। जानकारों की मानें, तो अगर शहर में पानी बर्बादी पर ठोस उपाय योजना की जाए, तो कुछ हद तक जलसकंट कम हो सकता है। 50 प्रतिशत से घटाकर इसे 15 प्रतिशत तक लाने की जरूरत भी बताई गई है।