दैनिक भास्कर हिंदी: आरक्षक ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में लिखा- जिन्दगी से हार गया हूं

October 18th, 2017

डिजिटल डेस्क  जबलपुर । मैं जिन्दगी की परेशानियों से हारकर अपनी जान दे रहा हूं। कोई भी व्यक्ति मेरी मौत के लिए जिम्मेदार नहीं है। यह लिखकर मंगलवार दोपहर पुलिस लाइन क्वार्टर में रहने वाला 27 वर्षीय आरक्षक विक्रम जांगड़े फांसी पर झूल गया। आरक्षक सिविल लाइन्स थाने में पदस्थ था। आरक्षक की आत्महत्या की खबर मिलते ही एसपी सहित वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस ने बताया कि मूलत: छिंदवाड़ा जिले का रहने वाला आरक्षक विक्रम जांगड़े  सिविल लाइन्स थाने में पदस्थ था। वह पुलिस लाइन क्वार्टर में अकेले रहता था।  मंगलवार सुबह वह पुलिस की जनरल परेड में शामिल हुआ था। परेड के बाद विक्रम थाने अपनी ड्यूटी पर गया था। दोपहर में वह घर लौटकर आया था। विक्रम का खाना सामने रहने वाले आरक्षक दिनेश उइके के घर पर बनता था। दोपहर 3.30 बजे तक जब विक्रम खाना खाने नहीं आया तो दिनेश उसे बुलाने के लिए आया। कई बार आवाज लगाने के बाद विक्रम ने दरवाजा नहीं खोला। दिनेश ने जब धक्का देकर दरवाजा खोला तो विक्रम फंदे पर झूल रहा था। दिनेश ने घटना की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी।
एसपी के सामने हुई कार्रवाई -घटना की सूचना मिलते ही एसपी शशिकांत शुक्ला, एएसपी जीपी पाराशर, सीएसपी अजीम खान, आरआई दिलीप परिहार और टीआई अरविंद जैन मौके पर पहुंच गई। एसपी ने एफएसएल और फिंगर प्रिंट की टीम को भी बुला लिया। मौके पर आरक्षक का शव पंखे पर झूलता मिला। शव के नीचे एक प्लास्टिक की कुर्सी और स्टूल गिरे हुए मिले। मौके की तलाशी लेने पर एक सुसाइड नोट मिला। एफएसएल और फिंगर प्रिंट की टीम ने मौके से अनेक साक्ष्य एकत्रित किए।
छोटू, अम्मा और गुडिय़ा का ख्याल रखना - सुसाइड नोट में आरक्षक ने लिखा था कि मैं अपनी जिन्दगी की परेशानियों से हारकर अपनी जान दे रहा हूं। कोई व्यक्ति मेरी मौत का जिम्मेदार नहीं है। किसी को भी व्यर्थ परेशान नहीं किया जाए। न ही किसी के साथ मेरा नाम जोड़ा जाए। छोटे भाई छोटू, अम्मा और गुडिय़ा का ख्याल रखना। अम्मा को हो सके तो रुक कर बताना। पापा सबको संभालना, मैं जा रहा हूं। मोहल्ले वालों का त्यौहार खराब कर रहा हूं। माफी चाहता हूं। दोस्तों ने भी हमेशा बहुत मदद की है, उनसे भी माफी चाहता हूं। सर्विस रिकॉर्ड में नॉमिनी का नाम बदलकर मेरे छोटे भाई का कर दिया जाए। पैसे और गहने ड्रॉज में रखे हैं।
अविवाहित था विक्रम - आरक्षक विक्रम वर्ष 2011 में पुलिस में भर्ती हुआ था। वह वर्तमान में एसआई की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। उसका विवाह नहीं हुआ था। बताया जा रहा है कि विक्रम एसआई बनने के बाद शादी करना चाहता था।  
डीजीपी ने स्वीकारा- पुलिस में बढ़ रहा तनाव -दो दिन पहले जबलपुर प्रवास के दौरान डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला ने स्वीकार किया था कि पुलिस में लगातार तनाव बढ़ रहा है। इसकी वजह से पुलिस कर्मी आत्महत्या कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि तनाव प्रबंधन के लिए पुलिस दो विश्वविद्यालयों से शोध करवा रही है। इसके दो दिन बाद ही एक आरक्षक ने आत्महत्या कर ली।
मामले की बारीकी से जांच की जाएगी - पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला ने कहा कि आरक्षक की आत्महत्या के मामले की बारीकी से जांच की जाएगी। आरक्षक के परिजनों के भी बयान दर्ज किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आरक्षक के परिजनों को अनुकम्पा नियुक्ति देने पर भी विचार किया जाएगा।