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सर्दियों की आहट के साथ यात्रियों की चिता बढ़ी, कोहरे के हालात बनने पर कार से भी सफर नहीं आसान

सर्दियों की आहट के साथ यात्रियों की चिता बढ़ी, कोहरे के हालात बनने पर कार से भी सफर नहीं आसान

नई ट्रेनें जल्द नहीं चलीं तो शादी की खुशियाँ फीकी रह जाएँगी..
डिजिटल डेस्क जबलपुर ।
परिवार की शादी में सपरिवार शामिल होना है और किसी ट्रेन में कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहा है। अगर रेलवे ने नई ट्रेन नहीं चलाई तो शादी की खुशियाँ फीकी रह जाएँगी.. यह दर्द है उन यात्रियों का, जिन्हें वैवाहिक समारोह में जाना है और उन्हें कन्फर्म सीट नहीं मिल रही है, टिकट के नाम पर सिर्फ वेटिंग मिल रही है, जिसके कन्फर्म होने की संभावना न के बराबर है। दरअसल दीपावली के उल्लास के बाद अब देवउठनी ग्यारस के शुभ मुर्हूत के साथ शादी की शहनाईयाँ गूँजने का समय नजदीक आ रहा है और लोग वैवाहिक समारोह में शामिल होने के लिए ट्रेनों से बाहर रिश्तेदारी में जाने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन उन्हें ट्रेनों में कन्फर्म टिकट नहीं मिल रहे हैं। 
पेपर पास पर सफर कर सकेंगे रेलकर्मी
रेलकर्मी अब पेपर पास पर ट्रेन में सफर कर सकेंगे। रेलवे बोर्ड ने एनएफआईआर और वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ की माँग पर पास और पीटीओ की अवधि को बढ़ाने की घोषणा के साथ पुरानी व्यवस्था को फिलहाल बहाल करने की घोषणा कर दी है। संघ के अनुसार बोर्ड ने माँग को स्वीकार करते हुए एचआरएमएस की साइट से मिलने वाले ऑनलाइन पास और पीटीओ की तिथि को रेल कर्मचारियों के लिए बढ़ाकर 31 दिसम्बर 2020 कर दी है। 
यह भी कहा है कि जब तक ऑनलाइन पास और पीटीओ की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो जाती तब तक फिजिकली पेपर पर पास और पीटीओ बनाकर दिया जाए, जिस पर  रेलकर्मी ट्रेन में सफर कर सकेंगे। अभी तक एचआरएमएस की खामियों की वजह से रेलकर्मी पास नहीं बनवा पा रहे थे, इसी माँग को संघ ने रेलवे बोर्ड के समक्ष उठाया था। 
स्पेशल गाडिय़ों की माँग 
 दीपावली से लेकर नए साल तक रेलवे अपने स्तर पर स्पेशल गाडिय़ाँ चलाता है, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से स्पेशल गाडिय़ाँ नहीं चलाई गई है। परेशान यात्रियों ने श्रीधाम एक्सप्रेस, महाकोशल एक्सप्रेस, कटरा एक्सप्रेस, जबलपुर मंडुआडीह एक्सप्रेस सहित अन्य गाडिय़ों के जल्द चलाने की माँग रेल प्रशासन से की है। 
इनका कहना है
त्योहार और वैवाहिक सीजन पर यात्रियों की माँग को देखते हुए कई नई गाडिय़ों को जल्द ही चलाया जा सकता है। प्रस्ताव बनाकर हमने भेज दिया है, रेलवे बोर्ड से जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। 
संजय विश्वास, डीआरएम जबलपुर  
 

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।