शहडोल न्यूज: 350 करोड़ के मेडिकल कॉलेज में इलाज का टोटा

350 करोड़ के मेडिकल कॉलेज में इलाज का टोटा
मरीजों का कहना है कि यहां एक्स-रे व पैथोलॉजी जांच की सुविधा को ऐसा बनाने की जरूरत है कि समय कम लगे और रिपोर्ट भी जल्दी मिलनी चाहिए।
डिजिटल डेस्क शहडोल तीन सौ पचास करोड़ रूपए की लागत से ज्यादा मे तैयार शासकीय बिरसामुंडा चिकित्सा महाविद्यालय मेडिकल कॉलेज में कामचलाऊ इलाज अब बड़ी समस्या बनती जा रही है। कामचलाऊ इलाज इसलिए क्योंकि प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर, अस्टिेंट प्रोफेसर, सीनियर और जूनियर रेजिडेंट में ऐसा एक भी पद ऐसा नहीं है जो पूरे भरे हों। इसके पीछे का कारण आवागमन में बेहतर कनेक्टिविटी का अभाव है। ेदूसरी बड़ी समस्या मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने की है। बस स्टैंड से दो सौ और रेलवे स्टेशन से मेडिकल कॉलेज तक छोडऩे के एवज में कई बार ऑटो वाले तीन सौ रूपए तक लेते हैं। किसी भी जरूरतमंद मरीज के लिए यह बड़ी राशि होती है और वे मेडिकल कॉलेज नहीं जाते हैं। कुछ मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद में पहुंच भी गए तो इलाज इस पर निर्भर करत है कि उस समय ओपीडी कौन डॉक्टर हैं और उस दिन उनका मूड कैसा है। ओपीडी और आईपीडी में लगातार घट रही मरीजों की संख्या- शहडोल में मेडिकल कॉलेज चालू हुए 6 साल हुए हैं और ओपीडी व आईपीडी में मरीजों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। मरीजों का कहना है कि यहां एक्स-रे व पैथोलॉजी जांच की सुविधा को ऐसा बनाने की जरूरत है कि समय कम लगे और रिपोर्ट भी जल्दी मिलनी चाहिए। सडक़, रेल व हवाई सेवाएं नहीं, डॉक्टर भी मान रहे बड़े शहरों तक आसान पहुंच जरूरी- मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के अधिकारी बताते हैं कि शहडोल में 350 करोड़ रूपए से ज्यादा लागत से तैयार मेडिकल कॉलेज भवन अनुपयोगी साबित हो रहा है तो इसका सबसे का बड़ा कारण कनेक्टिविटी की समस्या है। आसपास के बड़े शहर जैसे जबलपुर, रायपुर, प्रयागराज के लिए बेहतर सडक़ें नहीं है। रेलवे में देश के बड़े महानगरों तक सीधी रेल सेवाएं नहीं है और एयरपोर्ट नहीं होने के कारण भी बाहर के डॉक्टर शहडोल आने से कतराते हैं।

Created On :   23 Aug 2026 9:31 PM IST

Tags

Next Story