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शहडोल न्यूज: कोयला गैसीफायर से औद्योगिक विकास की तैयारी

डिजिटल डेस्क शहडोल कोयला से भरपूर शहडोल संभाग में कोयला गैसीफायर प्लांट की स्थापना को लेकर मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल डेव्लपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआईडीसी) ने तैयारी तेज कर दी है। शहडोल संभाग में ब्योहारी, उमरिया व कटनी से लगे क्षेत्र में सिरेमिक टाइल्स उद्योग की स्थापना के लिए मिट्टी/सिलिका प्रचुर मात्रा में है। कोयला गैसीफायर प्लांट की स्थापना से सिरेमिक यूनिट को चलाना सस्ता पड़ता है। एमपीआईडीसी के अधिकारियों का मानना है कि गुजरात की मोरबी की तरह ही यहां भी सिरेमिक इंडस्ड्री लगाने में कोयला गैसीफायर से लाभ मिलेगा। एमपीआईडीसी शहडोल के ईडी ने एसईसीएल सीएमडी से की चर्चा शहडोल संभाग में कोयला गैसीफायर प्लांट स्थापना को लेकर एमपीआईडीसी के ईडी एपी सिंह ने 13 अगस्त को साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन से मुलाकात की और कोयला गैसीफायर को चर्चा की। उन्होंने बताया कि एसईसीएल सीएमडी इस दिशा में काम करने को लेकर उत्साहित हैं और उन्होंने पहली ही मुलाकात मेें अपनी पूरी टीम को बुलाकर इस दिशा में प्रोजेक्ट तैयार करने के निर्देश दिए। दोनों संस्थान इस दिशा में जल्द ही एक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। क्या है कोयला गैसीफायर यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें कोयले को पूरी तरह जलाने के बजाय उसे ऑक्सीजन और भाप के साथ नियंत्रित परिस्थितियों में रासायनिक रूप से बदला जाता है। इससे कोयला एक उपयोगी गैस में बदल जाता है, जिसे सिनगैस कहते हैं। कोयला गैसीफायर संयंत्र को पर्यावरण के अनुकूल माना गया है। सेरेमिक फैक्ट्री में कोयला गैसीफायर का उपयोग करने से उत्पादन लागत में भारी कमी आती है, ईंधन दक्षता बढ़ती है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है। पारंपरिक रूप से महंगे ईंधनों जैसे नेचुरल गैस, एलपीजी या प्रोपेन की तुलना में कोयला गैसीफायर से बनी सिनगैस एक बेहद किफायती विकल्प साबित होती है। सेरेमिक फैक्ट्री को कोयला गैसीफायर से ईंधन लागत में 50 से 70 प्रतिशत तक बचत होती है।
Created On :   21 Aug 2026 4:58 PM IST
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