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अंदर से कुछ ऐसा दिखता है दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, BCCI ने शेयर की तस्वीरें 

अंदर से कुछ ऐसा दिखता है दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, BCCI ने शेयर की तस्वीरें 

हाईलाइट

  • भारत-इंग्लैंड के बीच 4 मैचों की सीरीज का तीसरा टेस्ट (डे-नाइट) 24 फऱवरी से अहमदाबाद के मोटेरा में होगा।
  • भारत और इंग्लैंड के बीच बुधवार से इस पिच पर चार मैचों की टेस्ट सीरीज का तीसरा टेस्ट शुरू होगा
  • तीसरे टेस्ट में पिंक बॉल किस तरह का बर्ताव करेगी, यह कोई नहीं जानता।

डिजिटल डेस्क (भोपाल)।  भारत-इंग्लैंड के बीच 4 मैचों की सीरीज का तीसरा टेस्ट (डे-नाइट) 24 फऱवरी से अहमदाबाद के मोटेरा में होगा। यह दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम है। इसकी दर्शक क्षमता 1.10 लाख है। दूसरे सबसे बड़े स्टेडियम आस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड की क्षमता एक लाख है। बीसीसीआई ने मोटेरा की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया में शेयर की हैं। वहीं, आज मैच शुरू होने से पहले मोटेरा स्टेडियम में धीरे-धीरे पिच से घास हटा दी गई है, जिसकी कई तस्वीरें इंग्लैंड टीम की मीडिया ने सोशल मीडिया पर पोस्ट भी की है। पिच पर अब कुछ ही घास बचे है, ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस पिच पर पिंक बॉल किस तरह का व्यवहार करती है। भारत और इंग्लैंड के बीच बुधवार से इस पिच पर चार मैचों की टेस्ट सीरीज का तीसरा टेस्ट शुरू होगा, जो कि डे-नाइट होगा और यह पिंक बॉल से खेला जाएगा। लाल गेंद से पिच के बर्ताव को आसानी से समझा जा सकता है, लेकिन तीसरे टेस्ट में पिंक बॉल किस तरह का बर्ताव करेगी, यह कोई नहीं जानता।

मैच की पूर्व संध्या पर भारतीय कप्तान विराट कोहली ने कहा कि स्पिनरों के अनुकूल विकेट होने के बावजूद पिंक बॉल के कारण विकेट से तेज गेंदबाजों को भी मदद मिलेगी। हालांकि, रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा ने इस सप्ताह कहा था कि इस पिच पर पिंक बॉल किस का बर्ताव करेगी, इसकी भविष्यवाणी करना मुश्किल है। लेकिन शाम के समय उन्हें इससे सतर्क रहना होगा, खासकर तब जब गेंद नई होती है और तापमान में गिरावट देखने को मिलता है। ऐसा माना जाता है कि पिंक बॉल पर जो चमक होती है, वह लंबे समय तक रहती है।

एसजी बॉल के मार्केटिंग डायरेक्टर पारस आनंद ने आईएएनएस से कहा, आम तौर पर गुलाबी गेंद पर चमक लंबे समय तक रहती है क्योंकि इसमें रंगद्रव्य के कई कोटिंग्स होते हैं क्योंकि गुलाबी रंग का चमड़ा लाल रंग के चमड़े (लाल गेंद के मामले में) के विपरीत सुस्त होता है जो चमकीला होता है। पिंक बॉल पर दो कोट्स होते हैं। इसमें एक बिना कलर के और चार कोट्स पिंक कलर के होते हैं, जिस पर लेकर (एक खास तरल, जोकि किसी लकड़ी, शीशा या फिर चमड़े को चमकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। चमक लाने के लिए इन चीजों पर इसकी मल्टीपल कोटिंग की जाती है) के कोट्स लगाए जाते हैं। इसी वजह से गुलाबी गेंद लाल गेंद की तुलना में लंबे समय तक चमकती रहती है।

मेरठ स्थित एसजी कंपनी जो बॉल बनाती है, उसका इस्तेमाल भारत में टेस्ट क्रिकेट और घरेलू टूर्नामेंटों में किया जाता है। आनंद ने कहा, रेड बॉल पर कलर का कोट्स नहीं होता है। केवल लाल रंग का चमड़ा होता है। इसके बाद इसे चमकाने के लिए केवल लैकर का इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर पिंक बॉल 20-25 ओवर तक चमकती रहती है जबकि रेड बॉल केवल 10-15 ओवर तक ही चमकती है। इसका मतलब है कि तेज गेंदबाजों को पिंक बॉल से अधिक ओवर करने के मिलेंगे।

मोटेरा की पिच पर घास नहीं है, जिसका मतलब है कि पिंक बॉल 25 ओवर से भी ज्यादा समय तक अपनी चमक बरकरार रख सकती है। टेस्ट क्रिकेट में तीन तरह की गेंदों का इस्तेमाल होता है। इनमें ड्यूक गेंदें इंग्लैंड में बनाई जाती है जबकि भारत में एसजी पिंक बॉल टेस्ट और कभी कभी बांग्लादेश में भी इसका इस्तेमाल होता है। तीसरा और सबसे प्रसिद्ध कूकाबुरा गेंद होती है, जोकि सात देशों-आस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, पाकिस्तान, श्रीलंका, न्यूजीलैंड, जिम्बाब्वे और बांग्लादेश में इस्तेमाल होती है।

चूंकि कूकाबुरा का बाहरी सीम मशीन से सिला हुआ है, इसलिए स्पिनरों के लिए इस गेंद को पकड़ना मुश्किल हो जाता है। कूकाबुरा के विपरीत, एसजी गेंद के बाहरी सीम, जैसे कि अपने आंतरिक सीम, हाथ से सिले हुए हैं और यह स्पिनरों के लिए इस गेंद को पकड़ने में आसानी होती है। इसका सीम लंबे समय तक रहता है। ड्यूक बॉल भी एसजी के समान ही सुंदर है, क्योंकि इसका सीम भी स्पष्ट है। हालांकि, यह केवल इंग्लैंड, वेस्टइंडीज और आयरलैंड में ही उपयोग किया जाता है।

अहमदाबाद के मोटेरा में बना दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम-सरदार पटेल स्टेडियम का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखने की घोषणा बुधवार को की गई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंड ने बुधवार को इस स्टेडियम का उदघाटन किया। इस अवसर पर गृहमंत्री अमित शाह ने स्टेडियम के उदघाटन के बाद कहा, मोटेरा में सरदार वल्लभभाई पटेल स्पोर्ट्स एन्क्लेव और नरेंद्र मोदी स्टेडियम के साथ मिलकर, नारनपुरा में एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाएगा। ये तीनों किसी भी अंतर्राष्ट्रीय खेल आयोजन की मेजबानी करने के लिए सुसज्जित होंगे। अहमदाबाद को भारत के खेल शहर के रूप में जाना जाएगा।

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।