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कोहली ने कहा- मैक्सवेल ने ब्रेक लेकर सही उदाहरण पेश किया

कोहली ने कहा- मैक्सवेल ने ब्रेक लेकर सही उदाहरण पेश किया

हाईलाइट

  • कोहली ने मानसिक स्वास्थ्य कारणों से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से ब्रेक लेने पर मैक्सवेल की तारीफ की
  • श्रीलंका के खिलाफ टी-20 सीरीज के पहले दो मैचों में अंतिम एकादश का हिस्सा रहे मैक्सवेल ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर क्रिकेट से अनिश्चितकालीन ब्रेक लिया था

डिजिटल डेस्क, इंदौर। भारतीय कप्तान विराट कोहली ने मानसिक स्वास्थ्य कारणों से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट से ब्रेक लेने वाले आस्ट्रेलिया के हरफनमौला खिलाड़ी ग्लेन मैक्सवेल की तारीफ की है। श्रीलंका के खिलाफ टी-20 सीरीज के पहले दो मैचों में अंतिम एकादश का हिस्सा रहे मैक्सवेल ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर क्रिकेट से अनिश्चितकालीन ब्रेक लिया था।

कोहली ने गुरुवार से बांग्लादेश के साथ यहां होल्कर स्टेडियम में शुरू होने वाले पहले टेस्ट मैच की पूर्वसंध्या पर संवाददाता सम्मेलन में कहा, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलते हुए टीम में शामिल हर खिलाड़ी को अपनी बात रखने का कौशल आना चाहिए। मुझे लगता है कि ग्लेन ने शानदार काम किया है। कप्तान ने कहा, उन्होंने विश्व के क्रिकेटरों के सामने मिसाल पेश की है। अगर आप मानसिक तौर पर सही स्थिति में नहीं हैं तो कई बार ऐसा मौका आ जाता है कि आपको समय की जरूरत पड़ती है।

31 वर्षीय कोहली ने स्वीकार किया कि 2014 के इंग्लैंड दौरे पर वह अपने खराब फॉर्म से जूझ रहे थे। उन्होंने कहा, मैं भी अपने करियर में ऐसे मोड़ से गुजरा हूं कि मुझे लगा कि दुनिया खत्म हो गई। मुझे समझ नहीं आया कि क्या करूं और सबसे क्या कहूं। कैसे बात करूं।

कोहली ने साथ ही कहा, ईमानदारी से कहूं तो आपका (पत्रकारों का) ये काम है और हमारा भी एक काम है। हर कोई अपने काम पर फोकस करता है। ये पता करना मुश्किल है कि दूसरे व्यक्ति के दिमाग में क्या चल रहा है।

कोहली का मानना है कि अगर किसी खिलाड़ी के पास इससे निपटने के लिए मानिसक क्षमता नहीं है तो इससे निपटने के लिए उन्हें जगह दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, मैं उस समय कह नहीं सका कि मानसिक तौर पर अच्छा महसूस नहीं कर रहा हूं और खेल से दूर जाने की जरूरत है। आपको पता नहीं होता कि उसे किस रूप में लिया जाएगा।

भारतीय कप्तान ने कहा, मुझे लगता है कि इन चीजों का सम्मान किया जाना चाहिए और इसे नकारात्मक नहीं लिया जाना चाहिए। ये जीवन में किसी समय विशेष पर घट रही घटनाओं का सामना करने की क्षमता नहीं होने की बात है। इसे सकारात्मक रूप में लिया जाना चाहिए।

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