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शनि जयंती 2020: आज कर्म और न्‍याय के देवता की ऐसे करें पूजा, जानें मुहूर्त


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सूर्य पुत्र और कर्म और न्‍याय के देवता माने जाने वाले शनिदेव की जयंती हर वर्ष ज्‍येष्‍ठ मास के कृष्‍ण पक्ष की अमावस्‍या को मनाई जाती है। इस वर्ष यह जयंती 22 मई शुक्रवार यानी कि आज मनाई जा रही है। इस दिन शनिदेव के मंदिर के साथ श्रीराम भक्त हनुमान जी के मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। हालांकि इस वर्ष कोरोना लॉकडाउन के चलते मंदिरों में कार्यक्रम नहीं होंगे। ऐसे में धर्मगुरुओं ने घर पर रहकर ही आराधना करने की अपील की है। आपको बता दें कि इस दिन महिलाएं पति की दीर्घायु के लिए वट सावित्री की भी पूजा करती हैं। 

मान्यता है कि साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा जैसे शनि से जुड़े दोषों से निजात पाने के लिए शनि अमावस्या पर शनिदेव की पूजा का विशेष महत्व होता है। शास्त्रों के अनुसार जिन लोगों को हमेशा कष्ट, निर्धनता, बीमारी व अन्य तरह की परेशानियां होती हैं, उन्हें भगवान शनिदेव की पूजा जरूर करनी चाहिए।

ऐसे करें शनिदेव को प्रसन्न, पूरे होंगे बिगड़े हुए काम 

शनि अमावस्या/ जयंती तिथि
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 21 मई 2020 शाम 09 बजकर 35 मिनट से 
अमावस्या तिथि समापन: 22 मई 2020 रात 11 बजकर 07 मिनट तक 
शनि जयंती: 22 मई 2020 को रहेगी

ऐसे करें शनिदेव को प्रसन्न
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव की पूजा करने से सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके अलावा शनि जयंती के दिन शनि देव को प्रिय काली चीजें जैसे काली उड़द, काले कपड़े आदि दान कर सकते हैं। वहीं, शनिवार के दिन पीपल के पेड़ पर शनिदेव की मूर्ति के पास तेल चढ़ाएं या फिर उस तेल को गरीबों में दान करें। शनिवार के दिन काला तिल और गुड़ चीटियों को खिलाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।

तो आप नहीं होंगे परेशाान
शनिदेव को भगवान सूर्य और उनकी पत्‍नी छाया की संतान माना जाता है। वैसे तो 9 ग्रहों के परिवार में इन्‍हें सबसे क्रूर ग्रह माना जाता है। लेकिन असल में शनि न्‍याय और कर्मों के देवता हैं। यदि आप किसी का बुरा नहीं सोचते और किसी के साथ धोखाधड़ी नहीं करते और किसी पर कोई जुल्म या अत्याचार नहीं करते यानी किसी भी बुरे काम में नहीं हैं तो आपको शनि से घबराने की आवश्‍यकता नहीं है। शनिदेव भले मानुषों का कभी बुरा नहीं करते।

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ऐसे करें पूजा
- शनि जयंती के दिन व्रती को नित्यक्रम के बाद सर्वप्रथम स्नान करना चाहिए। 
- इसके बाद एक लकड़ी के पाट पर काला कपड़ा बिछाएं
- इस कपड़े पर शनि देव की प्रतिमा या फोटो या एक सुपारी रखें।
- इसके बाद दोनों ओर शुद्ध घी व तेल का दीपक जलाकर धूप जलाएं।
- इस शनि स्वरूप के प्रतीक को जल, दुग्ध, पंचामृत, घी, इत्र से स्नान कराएं।
- शनि देव को इमरती, तेल में तली वस्तुओं का नैवेद्य लगाएं।
- नैवेद्य से पहले उन पर अबीर, गुलाल, सिंदूर, कुमकुम और काजल लगाकर नीले या काले फूल अर्पित करें।
- नैवेद्य अर्पण करके फल व ऋतु फल के संग श्रीफल अर्पित करें।
- पूजा के दौरान शनि स्त्रोत का पाठ करना बहुत उत्तम रहता है।

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