Satluj Film Controversy: ‘सतलुज’ मामले पर दिल्ली सिख कमेटी ने उठाया बड़ा कदम, दिलजीत दोसांझ की फिल्म की होगी पब्लिक स्क्रीनिंग

‘सतलुज’ मामले पर दिल्ली सिख कमेटी ने उठाया बड़ा कदम, दिलजीत दोसांझ की फिल्म की होगी पब्लिक स्क्रीनिंग
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को जी5 से हटाए जाने के बाद विवाद बढ़ता जा रहा है। अब दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (DSGMC) ने इस फैसले का विरोध किया है और इसे जसवंत सिंह खालरा की कहानी दबाने की कोशिश बताया है।

डिजिटल डेस्क, मुंबई। दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों विवादों में हैं। इस फिल्म को 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज किया गया था लेकिन रिलीज के दो दिन बाद ही फिल्म पर बैन लगा दिया और फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म से हट गई। फिल्म ‘सतलुज’ डायरेक्टर हनी त्रेहान ने बनाई है और यह 1990 के दशक के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी और उनकी मौत पर आधारित है। अब फिल्म के जी5 से हटा दिए जाने के बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी ने इस फैसले का विरोध किया है और एक बड़ा फैसला सुनाया है।

DSGMC ने क्या कहा?

मंगलवार को DSGMC के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका ने कहा कि यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है और इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक सामाजिक कार्यकर्ता ने लोगों को सच्चाई दिखाई है। उन्होंने कहा, ‘खालरा ने 25,000 ऐसे शवों का खुलासा किया था जिन्हें ‘लावारिस’ बताकर जला दिया गया था। उन्होंने इस मुद्दे को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाया। ऐसी कहानी को दबाना बिल्कुल गलत है और इससे सिख समुदाय में काफी गुस्सा है।’

फिल्म की होगी पब्लिक स्क्रीनिंग

उन्होंने आगे कहा कि कमेटी ने फैसला लिया है कि अलग-अलग जगहों पर फिल्म की स्क्रीनिंग कराई जाएगी और स्कूल-कॉलेजों में खालरा के जीवन पर सेमिनार आयोजित होंगे। उन्होंने आगे कहा, ‘हमने सभी गुरुद्वारा कमेटी सदस्यों से कहा है कि वे फिल्म डाउनलोड करके अपने-अपने इलाकों में दिखाएं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देख सकें। इसके अलावा, हम जल्द ही अपने स्कूल और कॉलेज के प्रमुखों के साथ बैठक करेंगे। हर कॉलेज में जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर चर्चा होगी, ताकि लोग समझ सकें कि एक व्यक्ति समाज में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है।’

क्या है ‘सतलुज’ की कहानी?

फिल्म ‘सतलुज’ में दिलजीत दोसांझ ने जसवंत सिंह खालरा का किरदार निभाया है, जो एक बैंक क्लर्क से मानवाधिकार कार्यकर्ता बने थे। उन्होंने 1980 और 1990 के दशक में पंजाब में हुए कथित फर्जी एनकाउंटर और गुप्त अंतिम संस्कारों का खुलासा किया था। साल 1995 में खालरा अचानक गायब हो गए थे। करीब 10 साल बाद पंजाब पुलिस के चार कर्मियों को उनके अपहरण, यातना और हत्या के आरोप में दोषी ठहराया गया था। हालांकि, उनका शव आज तक नहीं मिला है।

Created On :   8 July 2026 12:03 PM IST

Tags

Next Story