दिनेश आनंद प्रोडक्शन के बनाई बिहार की पहली AI जेनेरेटेड बायोपिक द सेंचुरी मैन

बिहार के जाने-माने पत्रकार और फिल्मकार दिनेश आनंद ने बिहार की पहली बेहतरीन एआई (Artificial Intelligence) बायोपिक बनाकर फिल्म प्रेमियों को पूरी तरह चौंका दिया है। दिनेश आनंद द्वारा ही लिखित और निर्देशित यह अनूठी फिल्म "द सेंचुरी मैन" आगामी 26 जून को इनके ऑफिशियल यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज "दिनेश आनंद प्रोडक्शन" पर एक साथ रिलीज हो चुकी है।
यह फिल्म 100 साल की आयु पूरी कर चुके बिहार के पीरपैति निवासी डॉ. दिलीप कुमार सिंह के जीवन पर आधारित एक ऐसी रोचक और दिलचस्प कहानी है जो किसी को भी हैरान कर सकती है। फिल्मकार दिनेश आनंद बताते हैं कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉ. दिलीप के बेहतर कामों को देखते हुए भारत सरकार द्वारा 95 वर्ष की उम्र में न केवल उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया, बल्कि शराब मुक्ति के लिए उनके द्वारा बनाई गई दवा को भारत सरकार के अलावा विश्व के 156 देशों ने पेटेंट भी प्रदान किया है।
इस कहानी का एक और सबसे बड़ा और दिलचस्प पहलू यह है कि भारत सरकार द्वारा देश में पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत साल 1995 में की गई थी, लेकिन पीरपैति के इस लाल ने इस अभियान की शुरुआत सरकार से 15 साल पहले यानी 1980 में ही कर दी थी। फिल्म में बेहद रोचक अंदाज में दिखाया गया है कि 1980 के उस दौर में डॉ. दिलीप ने कैसे अपने निजी खर्चे पर मॉस्को से पोलियो वैक्सीन का आयात किया और बर्फ की पेटी में उस वैक्सीन को सुरक्षित रखकर पीरपैति से कलकत्ता तक सालों साल आते-जाते रहे, ताकि सैकड़ों बच्चों को 'दो बूंद जिंदगी की' पिलाकर उनकी जान बचाई जा सके।
तकनीकी और रचनात्मक रूप से इस फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष डॉ. दिलीप सिंह की यह अद्भुत कहानी, दमदार स्क्रिप्ट, दिनेश आनंद की बुलंद आवाज, बेहतरीन म्यूजिक और एआई का वो जादुई क्रिएशन है जो दर्शकों को पूरी फिल्म देखने पर मजबूर कर देगा।
एक प्रसिद्ध जमींदार परिवार में जन्मे डॉ. दिलीप कुमार सिंह के पारिवारिक रिश्तों की कहानी भी अपने आप में बेहद अनोखी है। फिल्म देखने पर पता लगता है कि इनकी रिश्तेदारी उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के राजा और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिनेश सिंह के चाचा कुंवर ब्रजेश सिंह से होकर सीधे रूस की राजधानी मॉस्को तक पहुंचती है, और इस तरह रूस के शक्तिशाली नेता जोसफ स्टालिन की रिश्तेदारी इस भारतीय परिवार से जुड़ जाती है। इतना ही नहीं, इस फिल्म से यह भी साफ होता है कि डॉ. सिंह की रिश्तेदारी पड़ोसी देश नेपाल के प्रसिद्ध राणा परिवार, नेपाल के पूर्व सेनाध्यक्ष राणा बब्बर शमशेर और पूर्व प्रधानमंत्री मोहन शमशेर से सीधे तौर पर थी। वहीं, भारत का प्रसिद्ध जयपुर राजघराना डॉ. दिलीप कुमार सिंह का ससुराल है और जयपुर के महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय इनकी पत्नी रूपकुमारी सिंह जी के सगे मामा थे।
जानकार इसे इतिहास का एक दुर्लभ संयोग मानते हैं, जहां एक भारतीय परिवार के रिश्ते दुनिया के तीन अलग-अलग देशों की सत्ता और सियासत से सीधे तौर पर जुड़े हुए थे।
दिनेश आनंद प्रोडक्शन की आधिकारिक वेबसाइट को देखने से यह भी पता लगता है कि आनंद के इस बेहतरीन काम और विजन को देखते हुए उन्हें बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के अलावा अभिनेता अनुपम खेर, शत्रुघ्न सिन्हा, पंकज त्रिपाठी, मनोज बाजपेयी और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह के हाथों सम्मानित भी किया जा चुका है। बिहार के जाने-माने सर्जन, नेशनल मेडिकल कमीशन के सदस्य और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सहजानंद प्रसाद सिंह कहते हैं कि बिहार में संभवतः दिनेश आनंद पहले ऐसे फिल्मकार हैं जिन्होंने बिहार के ख्यातिप्राप्त चिकित्सकों पर दर्जनों फिल्में और डॉक्यूमेंट्रीज बनाई हैं।
फिल्मकार दिनेश आनंद का कहना है कि बायोपिक और बायोग्राफी का निर्माण करना उनका पैशन है और जमीनी स्तर की अच्छी कहानियों पर काम करने में उन्हें बेहद मजा आता है। इसके साथ ही उन्होंने देशवासियों से यह गुजारिश भी की है कि अगर किसी भी परिवार के पास समाज को प्रेरित करने वाली कोई अच्छी कहानी है, तो उसे हमारे समक्ष रखें और हम उसे सिनेमा के माध्यम से पूरी दुनिया के सामने लेकर आएंगे।
बहरहाल, बिहार की इस पहली एआई बायोपिक को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है ,और रिलीज़ के बाद डीएपी के ऑफिसियल फेसबुक पेज पर अब तक लाखों में व्यूज दिख रहे हैं।बहरहाल इतना तो साफ है कि दिनेश आनंद का यह अनूठा प्रयास बिहार के फिल्म जगत में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।
Created On :   8 July 2026 3:21 PM IST












