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अनुराग कश्यप को मिला पूर्व पत्नी कल्कि कोचलिन का समर्थन

September 21st, 2020 18:01 IST
 अनुराग कश्यप को मिला पूर्व पत्नी कल्कि कोचलिन का समर्थन

हाईलाइट

  • अनुराग कश्यप को मिला पूर्व पत्नी कल्कि कोचलिन का समर्थन

मुंबई, 21 सितंबर (आईएएनएस) पूर्व पति व फिल्मकार अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री पायल घोष द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बाद अभिनेत्री कल्कि कोचलिन फिल्मकार के समर्थन में सामने आई हैं।

कल्कि ने एक खुले पत्र में कहा कि फिल्मकार ने अपनी स्क्रिप्ट्स में महिलाओं की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी है, और पेशेवर और व्यक्तिगत स्थानों पर उनकी गरीमा का बचाव किया है।

अभिनेत्री ने सोमवार सुबह इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया, जिसमें कहा कि कश्यप ने हमेशा उन्हें अपने बराबरी में रखा और तलाक के बाद भी उनकी गरीमा के लिए खड़े रहे हैं।

कल्कि ने लिखा, प्रिय अनुराग, इस सोशल मीडिया सर्कस को अपने आप तक न पहुंचने दें, आपने अपनी स्क्रिप्ट्स में महिलाओं की आजादी के लिए संघर्ष किया है। आपने अपने व्यावसायिक स्थान के साथ-साथ अपने निजी जीवन में भी उनकी गरीमा का बचाव किया है।

उन्होंने आगे लिखा, मैं इसकी एक गवाह रही हूं, निजी और पेशेवर जगह में आपने मुझे हमेशा अपने बराबर के रूप में देखा है, आप हमारे तलाक के बाद भी मेरी ईमानदारी के लिए खड़े हुए हैं, और हमारे एक होने से पहले जब मैंने काम के माहौल में असुरक्षित महसूस किया था, तब भी आपने मेरा समर्थन किया।

कल्कि को लगता है कि यह खतरनाक समय है।

उन्होंने लिखा, यह अजीब समय है, जहां हर कोई एक दूसरे का दुरुपयोग करता है और बिना किसी नतीजे के झूठे दावे करता है, यह एक खतरनाक और अप्रिय है। यह परिवारों, दोस्तों और देशों को नष्ट कर रहा है।

कल्कि ने आगे लिखा, लेकिन गरिमा का एक स्थान है जो इस वर्चुअल रक्त स्नान से परे मौजूद है, जो आपके आस-पास के लोगों की जरूरतों पर ध्यान देने की जगह है, एक ऐसी जगह है जहां कोई भी नहीं दिखता है, और मुझे पता है कि आप उस जगह से परिचित हैं। उस गरिमा पर टिके रहें, मजबूत रहें और जो काम आप करते हैं उसे करते रहें। पूर्व पत्नी से प्यार।

कल्कि कोचलिन और अनुराग कश्यप ने साल 2011 में शादी की थी। हालांकि 2013 में दोनों अलग हो गए और साल 2015 में उन्होंने तलाक के लिए आवेदन किया।

एमएनएस/जेएनएस

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।