दैनिक भास्कर हिंदी: थिएटर आपको एक इंसान के रूप में विकसित करता है: पंकज त्रिपाठी

May 21st, 2018

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड एक्टर पंकज त्रिपाठी ने कहा कि थिएटर आपको एक इंसान के रूप में विकसित करता है। दरअसल पंकज त्रिपाठी रविवार को मुकेश छाबरा के एक्टिंग वर्कशॉप में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने बच्चों से बातचीत करते हुए थिएटर को लेकर कहा कि मुझे दुख होता है कि जब मैं छोटा था तब मुझे इन बच्चों की तरह ट्रेनिंग नहीं मिली। इसके आगे उन्होंने कहा कि, यह वर्कशॉप शायद ये गारंटी नहीं देती है कि आप भविष्य में बड़ा स्टार बनेंगे, लेकिन ये निश्चित रूप से आपको एक इंसान के रूप में विकसित करेगा। 

 


मुंबई में 14 साल में करीब 40 फिल्मों और कई टीवी कार्यक्रमों में काम करने के बाद एक्टर पंकज त्रिपाठी को हाल ही के वर्षों में जो खास पहचान मिली है। लंबे समय तक छोटे किरदार निभाने वाले पंकज को अब केंद्र में रखकर फिल्में लिखी और बनाई जा रही हैं। एक इंटरव्यू के दौरान पंकज त्रिपाठी ने बताया था कि अब इतनी पटकथाएं आ रही हैं कि उन्हें पढ़ पाना भी संभव नहीं हो पा रहा है।

 

 

पिछले दिनों ‘न्यूटन’ फिल्म में अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था। पंकज त्रिपाठी बरेली की बर्फी, न्यूटन, अनारकली ऑफ आरा, निल बटे सन्नाटा, मसान, सिंघम रिटर्न्स, गैंग्स ऑफ वासेपुर, दबंग 2, फुकरे, फुकरे रिटर्न्स जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं।

 


पंकज त्रिपाठी तमिल फिल्म 'काला' के बाद अब पंजाबी फिल्म नजर आएंगे। विजय कुमार अरोड़ा निर्देशित फिल्म 'हरजीता' से वो पंजाबी फिल्म उद्योग में कदम रख रहे हैं। यह फिल्म भारतीय हॉकी खिलाड़ी हरजीत सिंह के जीवन पर बेस्ड है, जिन्होंने 2016 में पुरुषों के हॉकी जूनियर वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की कप्तानी की थी। पंकज फिल्म में पंजाबी अभिनेता और गायक एम्मी विर्क के कोच के रूप में नजर आएंगे।

 


नेशनल अवॉर्ड मिलने के बाद पंकज त्रिपाठी ने कहा था कि इस अवॉर्ड के बाद अब उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्होंने कहा अब वो और अधिक सोच विचार करने के बाद फिल्में साइन करेंगे। इसके साथ ही उन्होने ऐसी फिल्मों में काम करने की इच्छा जताई जिनमें मनोरंजन के साथ समाज को एक संदेश भी मिलता हो।

 

 


हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा ने वर्कशॉप में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि बच्चों के लिए इन सभी एक्टिंग प्रोजेक्ट्स में मैं अपने आप को बिजी रखता हूं, क्योंकि बच्चे सिनेमा में महत्वपूर्ण रोल निभाते हैं। मैं बच्चों में टैंलेट को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग शहरों में जाऊंगा।  उन्होंने कहा कि मैं खुद एक संघर्षकर्ता हूं। इस नाते से मैं फिल्म इंडस्ट्री में न्यू कमर्स की मदद करने के लिए पूरी कोशिश करता हूं।

 

 

बता दें कि कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबरा ने बिना किसी गॉड फादर के हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था और आज वो  फिल्म इंडस्ट्री में पावरफुल शख्सियतों में से एक हैं। मुकेश एक्टर और डायरेक्टर के बीच एक दरवाजे के रूप में काम करते हैं। मुंबई में खुद की कास्टिंग कंपनी बनाने से पहले उन्होंने सहायक कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम करना किया था। फिल्म चिल्लर पार्टी में उनकी कास्टिंग के बाद उन्हें एक ख़ास पहचान मिली जिसके बाद उन्होंने अनुराग कश्यप की फ़िल्म गैंग्स ऑफ़ वासेपुर और उसके दूसरे भाग के लिए कास्टिंग की।