comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

गेम ऑफ थ्रोन्स में अब नहीं दिखेंगी मदर ऑफ ड्रैगन्स

September 06th, 2018 18:26 IST

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चाहे तलवार चलाना हो, घुड़सवारी करना हो, ड्रैगन्स को माँ की तरह प्यार करना हो या अपने दुश्मन को बेदर्दी से मार देना, ये सब सत्ता की जंग पर बनी टीवी सीरीज 'गेम ऑफ थ्रोन्स' में देखने को मिलता है। टीवी का ये शो पूरी दुनिया में मशहूर है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से लेकर हॉलीवुड और बॉलीवुड स्टार्स तक इस सरीज के फैन हैं। लेकिन इस शो के चाहने वाले लोगों के लिए एक बुरी खबर है। इस शो में टार्गैरियन वंश की आखरी वारिस और मदर ऑफ ड्रैगन्स कही जाने वाली डेनरीस टार्गैरियन यानी एमिलिया क्लार्क को अब उनके फैन्स इस शो में नहीं देख पाएंगे। दरअसल उन्होंने सीरीज को अपना गुडबाय कह दिया है। इसकी जानकारी उन्होंने अपने  इंस्टाग्राम पोस्ट से दी। 

उन्होंने लिखा- 'किसी दूसरे आइलैंड में जाने के लिए बोट पर बैठ गई हूँ और उस जगह को गुडबाय कह रही हूँ जो लगभग एक दशक से मेरा घर रहा है। 'गेम ऑफ थ्रोन्स' में काम करना एक ट्रिप की तरह रहा। मुझे एक ऐसी लाइफ और ऐसी फैमिली देने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया जिसे मैंने कभी इमेजिन भी नहीं किया था'।

इस टीवी सीरीज की शुरुआत 17 अप्रैल 2011 में अमेरिका में हुई थी। ये पॉपुलर टीवी शो, जॉर्ज आर. आर मार्टिन की बुक सीरीज 'अ सॉन्ग ऑफ आइस एंड फायर' पर बेस्ड है। हर सीजन में 10 एपिसोड के साथ इसे ब्रॉडकास्ट किया जाता है। सीरीज की कहानी कई छोटी-छोटी कहानियों और कैरेक्टर्स को मिलाकर बनाई गई है। इसकी कहानी ऐसे साम्राज्य वेस्टेरस (Westeros) की है, जो एक जमाने में सात साम्राज्यों पर राज करता था। उस पर काबिज राजा की साजिश में मौत हो जाती है। इसके बाद उसके अधीन रह चुके सभी सातों राज्य खुद को उस सिंहासन के दावेदार की तरह पेश करना शुरू कर देते हैं और ऐसे शुरू होता है न रुकने वाला युद्ध। 

गेम ऑफ थ्रोन्स के आखिरी सीजन की शूटिंग पूरी हो चुकी है। इसे 26 जुलाई को ब्रॉडकास्ट किया जाएगा। यह सीरीज का आठवां और आखिरी सीजन होगा। अमेरिका ही नही भारत सहित कई देशों में इस सीरीज को पसंद करने वाले दर्शकों की संख्या करोड़ों में है। इसके दर्शक हर सीजन का बेसब्री से इंतजार करते रहे हैं।

एमिलिया क्लार्क को इस सीरीज से घर-घर में पहचान मिली थी। उनका पूरा नाम एमिलिया इसाबेल युफेमिया रोज क्लार्क हैं। सीरीज में एमिलिया क्लार्क को हर एपिसोड के लिए 1.1 मिलियन डॉलर मिलते थे। इसी शो की वजह से एमिलिया प्राइम टाइम शोज की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस बन गईं थीं। 

कमेंट करें
qEwdn
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।