दैनिक भास्कर हिंदी: सोनम कपूर को डोनाल्ड ट्रंप पर आया गुस्सा, सोशल मीडिया पर कह डाला 'मूर्ख'

March 10th, 2018

 

डिजिटल डेस्क, मुंबई । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब से गद्दी संभाली तभी से वो किसी ना किसी वजह से चर्चा में बने रहते हैं। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश के राष्ट्रपति का चर्चा में रहना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अगर दुनिया के शक्तिशाली नेता सुर्खियां सिर्फ इसलिए बटोर रहे हैं क्योंकि सोशल प्लेटफॉर्म पर अक्सर ही उसका मजाक उड़ाया जाता है तो सुनने में बड़ा अजीब लगता है। अमेरिकी रियलिटी स्टार किम कदर्शियन का वो बयान तो आपको याद ही होगा जिमसें उन्होंने का था कि 'अमेरिका में डोनाल्ड से बेहतर शासन उनकी 4 साल की बेटी कर सकती है।'  दरसअसल डोनाल्ड के कुछ फैसलों, नीतियों और बयानों ने उन्हें अपने देश में तो मजाक और नफरत का पात्र तो बनाया है, लेकिन अब दूसरे देशों के लोग भी उन्हें नापसंद करने लगे हैं। 

अब हाल ही में बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर को एक बात इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने दुनिया के सबसे ताकतवर लोगों में से एक डोनाल्ड ट्रंप को मूर्ख बता दिया। सोनम अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बेहद नाराज हैं। उन्होंने टि्वटर पर लिखा है कि उन्हें भारत से कुछ सीखना चाहिए।

 

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किस बात पर सोनम को ट्रंप पर आया गुस्सा?

सोनम कपूर की नाराजगी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति का एक फैसला है। ट्रंप ने शिकार के दौरान मारे गए हाथियों के अंग को अमेरिका आयात करने की अनुमति दे दी है, जबकि ओबामा प्रशासन ने इस फैसले पर रोक लगा रखी थी।

ट्रंप के इस फैसले पर वन्य जीव समूहों और कई गैर सरकारी संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। साथ ही ट्रंप प्रशासन की आलोचना की है। इसी से नाराज होकर सोनम ने एक ट्वीट में ट्रंप को मूर्ख कहा है। साथ ही कहा कि अमेरिका को भारत से सीखना चाहिए। यहां वन्य जीवों के श‍िकार प्रतिबंध है।

सोनम कपूर ने ट्वीट किया, 'भारत में शिकार अवैध है, ये एक ऐसी चीज है जो दुनिया हमसे सीख सकती है, ट्रंप मूर्ख हैं।' सोनम ने इस ट्वीट के साथ ट्रंप को टैग भी किया है।

 

 

 

क्या है अमेरिका का नियम?

 

बता दें कि अमेरिका के नेशनल राइफल एसोसिएशन और सफारी क्लब इंटरनेशनल फाउंडेशन का कहना है कि अफ्रीकी देशों में वो लोग शिकार करने के लिए राज्य सरकारों को भारी धन देते हैं। वहां की राज्य सरकारें इन पैसों का इस्तेमाल हाथियों के संरक्षण में करती है। इन संस्थाओं का कहना है कि पैसे के अभाव में इन देशों में हाथियों की उचित देखभाल नहीं हो पाती है।

अमेरिका में ये प्रावधान है कि यदि शिकार की वजह से किसी जानवर की कोई खास नस्ल के संरक्षण में सकारात्मक बदलाव होता है तो उस जानवर से जुड़े अंगों को आयात किया जा सकता है।