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फ्लॉप फिल्मों से थे परेशान थे संजय दत्त, इन फिल्मों ने बनाया स्टार

June 28th, 2018 16:39 IST

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉलीवुड स्टार संजय दत्त की लाइफ पर बेस्ड फिल्म ‘संजू’ 29 जून को रिलीज हो रही है। अपने करीबी दोस्तों में बाबा और फैंस के बीच डेडली दत्त के नाम से मशहूर संजय की निजी जिंदगी की तरह उनका करियर भी उतार चढ़ाव से भरा रहा है। संजय के खाते में फ्लॉप फिल्मों की भरमार हैं, लेकिन उनकी जो भी फिल्में हिट रही उनका इम्पैक्ट इतना बड़ा हुआ कि वो हमेशा स्टार बने रहे। आइये संजू बाबा की कुछ ऐसी ही फिल्मों पर नजर डालते हैं।

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1. रॉकी (1981)
ये संजय दत्त की डेब्यू फिल्म थी। इस फिल्म को उनके पापा सुनील दत्त ने प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया था। 'रॉकी' की रिलीज से सिर्फ 5 दिन पहले ही संजू की मम्मी नरगिस की मौत हो गई थी। नरगिस अपनी बीमारी के बावजूद अपने बेटे की फिल्म के प्रीमियर पर आना चाहती थीं। उन्होंने अपनी ये ख्वाहिश अपने पति सुनील दत्त को बताई और सुनील दत्त ने भी नरगिस को 'रॉकी' के प्रीमियर तक लाने का पूरा इंतजाम कर रखा था। अफसोस कि इससे पहले ही नरगिस दुनिया से चल बसीं। उनकी याद में सुनील दत्त ने प्रीमियर के दौरान उस कुर्सी को खाली रख छोड़ा था जिस पर नरगिस को बैठना था। संजय दत्त की ये पहली फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही और इंडस्ट्री को एक हैंडसम हीरो मिल गया, लेकिन संजय दत्त 'रॉकी' की सफलता को बरकरार नहीं रख पाए और इसके बाद उनकी फिल्में लगातार फ्लॉप होने लगी। ये वो दौर था जब संजय दत्त पूरी तरह से ड्रग्स की गिरफ्त में आ चुके थे और हर कोई मान चुका था कि उनका करियर खत्म हो गया है। आलोचकों ने संजय को भी उनके दोस्त और जीजा कुमार गौरव की तरह ही वन फिल्म वंडर कह दिया था।

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2. नाम (1986)
'रॉकी' को रिलीज हुए 5 साल गुजर चुके थे, लेकिन संजय के पास कोई हिट फिल्म नहीं आई थी। इसी दौरान संजय ने ड्रग्स की लत के खिलाफ अपनी लड़ाई शुरू की और कुमार गौरव के साथ फिल्म 'नाम' साइन की। 'नाम' को कुमार गौरव के पापा राजेंद्र कुमार ने प्रोड्यूस किया था ताकि वो अपने बेटे के डूबते करियर को सहारा दे सके। ऐसा कहा जाता है कि पापा राजेंद्र कुमार चाहते थे कि कुमार गौरव इस फिल्म में विक्की का रोल करें जिसे संजय दत्त निभा रहे थे। उन्हें विश्वास था कि इस रोल को निभाने वाला एक्टर रातों-रात स्टार बन जाएगा, लेकिन कुमार गौरव को विक्की का रोल काफी एंटी हीरो जैसा लगा और वो अपनी इमेज के साथ कोई एक्सपीरिमेंट नहीं करना चाहते थे। आखिरकार, उन्होंने नूतन के सीधे-सादे और आज्ञाकारी बेटे रवि का रोल करना पसंद किया। जब सितंबर 1986 में ये फिल्म रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त हिट साबित हुई। इस फिल्म की कहानी, म्यूजिक, डायलॉग्स सभी दर्शकों को बेहद पसंद आए। साथ ही लगातार फ्लॉप फिल्मों की मार झेल रहे कुमार गौरव और संजय दत्त को बड़ी हिट मिल गई थी, लेकिन जैसा कि राजेंद्र कुमार ने कहा था ठीक वैसा ही हुआ। संजय का रोल कुमार गौरव के रोल पर भारी पड़ा था और ज्यादातर लोगों ने उनके किरदार और अभिनय को ही पंसद किया था। इस फिल्म के बाद संजू बाबा के खत्म होते करियर को रफ्तार मिली, लेकिन कुमार गौरव को कुछ खास फायदा नहीं मिल पाया।

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3. साजन (1991) 
'नाम' जैसी कामयाब फिल्म के बाद संजय दत्त के पास फिल्मों की लाइन लग गई और उन्होंने भी एक के बाद एक कई सारी फिल्में साइन कर ली। ये दौर एक्शन पैक्ड फिल्मों का दौर था और संजय दत्त के अलावा सनी देओन, अनिल कपूर और जैकी श्रॉफ भी इसी तरह की फिल्में कर रहे थे। नतीजा ये हुआ कि एक जैसी कहानी वाली फिल्मों की भरमार हो गई और संजय एक बार फिर फ्लॉप पर फ्लॉप देने लगे। कुछ फिल्मों ने थोड़ा बहुत पैसा तो कमाया, लेकिन वो ऐसी नहीं थी जो संजय के स्टारडम को कायम रख पाती। संजू बाबा के अगले 5 साल इसी तरह औसत दर्जे की फिल्मों के बीच बीते। इस बीच एक्शन फिल्मों से बोर हो चुके दर्शकों को नए अभिनेताओं की रोमांटिक फिल्में पसंद आने लगी थी और इसी दौरान संजू बाबा ने डायरेक्टर लॉरेंस डिसूजा की फिल्म 'साजन' साइन की जिसमें उनके साथ सलमान खान और माधुरी दीक्षित भी थे। चार्टबस्टर म्यूजिक और संजय-माधुरी-सलमान के लव ट्राएंगल ने दर्शकों का दिल जीत लिया और ये फिल्म सुपरहिट हो गई। परदे पर दुश्मनों को एक मुक्के में ढेर करने वाले संजय दत्त इस फिल्म में अपाहिज शायर के किरदार में थे और उनके इस नए अंदाज को सभी ने बेहद पसंद किया। इस फिल्म की सफलता से संजू के करियर में उछाल आया और इसी साल उन्होंने एक और म्यूजिकल हिट फिल्म 'सड़क' दी, जिसमें पूजा भट्ट उनके साथ थी और 'नाम' के बाद उन्हें फिर से महेश भट्ट ने निर्देशित किया था।

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4. खलनायक (1993)
'साजन' और 'सड़क' के बाद संजय दत्त की करीब दर्जन भर फिल्में फ्लॉप रही। फिर रिलीज हुई सुभाष घई की फिल्म 'खलनायक' जो कि उनके करियर में वो फिल्म बनकर आई जिसने उनकी ऑनस्क्रीन इमेज को तैयार किया। ये इमेज एक एंटी हीरो की थी जो लाख बुरा होने के बाद भी दर्शकों का प्यार हासिल करने में कामयाब रहा। इस फिल्म की रिलीज तक संजू बाबा का नाम मुंबई बम कांड में आ चुका था और उन्हें रियल लाइफ का खलनायक माना जाने लगा। संजू के विरोधियों ने तो फिल्म के पोस्टरों तक पर जूतों की माला तक पहना दी थी। हालांकि संजू की हार्डकोर फैन अब भी उनके साथ थे और इसी का नतीजा रहा कि 'खलनायक' न केवल उस साल की, बल्कि 90 के दशक की बड़ी हिट साबित हुई। इस फिल्म से संजू बाबा को स्वैग भी मिला और नया स्टाइल भी।

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5. वास्तव (1999)
संजय दत्त ने जिंदगी का अहम हिस्सा किश्तों में जेल जाकर गुजारा और इसी तरह फिल्मों में भी उन्हें सफलता किश्तों में ही मिलती रही। संजू बाबा कभी भी बैंकेबल स्टार नहीं रहे और न तो उन पर पैसा लगाना प्रोड्यूसर्स के लिए सेफ गेम रहा। इसके बावजूद संजू की डिमांड और फैन फॉलोइंग हमेशा बनी रही। साल 1999 में संजू के खाते में आई डायरेक्टर महेश मांजरेकर की एक फिल्म 'वास्तव', जिसमें अंडर्वर्ल्ड की काली दुनिया की कहानी परदे पर दिखाई गई। फिल्म में संजय ने रघुनाथ उर्फ रघु का कैरेक्टर प्ले किया, जिसे हालात सीधे-सादे इंसान से एक खतरनाक गैंग्स्टर बना देते हैं। बतौर अभिनेता संजय दत्त के करियर की ये बेहतरीन फिल्म साबित हुई। 'वास्तव' में उनके अभिनय को न केवल क्रिटिक्स और उनके फैंस ने पसंद किया बल्कि अभिनय सम्राट दिलीप कुमार ने भी माना कि ये रोल उनके अलावा कोई और नहीं कर सकता था।

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6. मुन्नाभाई एमबीबीएस (2003)
संजय दत्त की ऑनस्क्रीन इमेज हमेशा ही अपने दोनों हाथों में विदेशी गन थामें, दुश्मनों पर फायर करते शख्स की रही। उनकी सफल फिल्मों में भी 'साजन' को छोड़ दिया जाए तो दर्शकों ने उन्हें एक्शन ड्रामा फिल्मों में ही पसंद किया। साल 2003 में संजय दत्त ने नए निर्देशक राजकुमार हिरानी की कॉमेडी-ड्रामा 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' साइन की। इस फिल्म से किसी को ज्यादा उम्मीदें नहीं थी। इससे पहले जब भी संजय ने कॉमेडी में हाथ आजमाएं थे उन्हें कोई खास सफलता नहीं मिली थी। जब फिल्म के प्रोमो भी सामने आए तो लोगों को लगा कि डेविड धवन की तरह की ही कोई कॉमेडी फिल्म आ रही है, लेकिन जब ये फिल्म रिलीज हुई तो इसने सभी को गलत साबित कर दिया। राजू हिरानी के कहानी कहने के नए तरीके और जादू की झप्पी देने वाले एक प्यारे से रहमदिल टपोरी के रोल में संजय दत्त को दर्शकों का बेहिसाब प्यार मिला। मुन्ना-सर्किट की जोड़ी बॉलीवुड की बेस्ट जोड़ियों में शामिल हो गई और ये फिल्म हिंदी सिनेमा की महानतम फिल्मों में शुमार की गई।

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7. 'लगे रहो मुन्नाभाई' (2006)
जब मु्न्नाभाई सीरीज की दूसरी फिल्म 'लगे रहो मुन्नाभाई' रिलीज हुई तो इसने भी बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी पाने के साथ-साथ एक नई मुहिम छेड़ दी। संजय दत्त अपनी सभी पुरानी इमेज तोड़ते हुए गांधीगिरी का पाठ पढ़ाते नजर आए। मुन्नाभाई सीरीज की फिल्मों से न केवल संजय के करियर को फायदा हुआ, बल्कि मुंबई बम कांड की वजह से खराब हुई उनकी सार्वजनिक छवि में भी काफी सुधार हुआ। इस फिल्म के बाद संजय दत्त कुछ सफल और बहुत सारी असफल फिल्मों का हिस्सा बने, लेकिन उन्हें दर्शकों का प्यार बराबर मिलता रहा। लंबे समय से संजू के खाते में कोई सोलो हिट नहीं आई है, लेकिन राजू हिरानी मुन्नाभाई सीरीज की तीसरी फिल्म बनाने को लेकर श्योर हैं और इसलिए माना जा सकता है कि संजू बाबा एक बार फिर अपने फैंस के बीच कोई नया फॉर्मूला लेकर आएंगे जिससे वो सबका दिल जीत लें। 

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।