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Statement: टीवी उद्योग को कथाकारों ने बनाया है, प्रोड्यूसर्स ने नहीं- अनंत महादेवन 

Statement: टीवी उद्योग को कथाकारों ने बनाया है, प्रोड्यूसर्स ने नहीं- अनंत महादेवन 

डिजिटल डेस्क, मुंबई। अभिनेता-फिल्म निर्माता अनंत महादेवन ने 1983 से अब तक भारतीय टेलीविजन में आए उतार-चढ़ाव पर आधारित वन्स अपॉन ए प्राइम टाइम नाम से एक किताब लिखी है। उनका कहना है कि दैनिक धारावाहिक वर्तमान में अपना गौरव खो चुके हैं। अस्सी और नब्बे के दशक में टीवी मनोरंजन में क्रांति लाने वाले श्याम बेनेगल, बसु चटर्जी और अजीज मिर्जा जैसे अच्छे कहानीकारों की कमी के कारण ऐसा हुआ।

अनंत ने एक कारण खोजा कि क्यों टीवी सीरीज को दरकिनार कर वेब सीरीज ने केन्द्र की जगह ले ली है। अनंत ने आईएएनएस को बताया, हमें यह समझना होगा कि फिल्म निमार्ताओं और कहानीकारों ने टेलीविजन मनोरंजन को दिलचस्प बनाया है, कार्यकारी निमार्ताओं ने नहीं।

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उन्होंने कहा, मुझे उन तीन फिल्मकारों के नाम बताइए, जो अब टीवी सीरीज के साथ निर्देशन कर रहे हैं और अपनी पहचान बना रहे हैं। पहले लोग एक टीवी धारावाहिक के निर्देशक को जानते थे जो वे देखते थे। इन दिनों दर्शकों को यह नहीं पता है कि निर्देशक कौन है। वे जानते हैं कि निमार्ता कौन है। वे अभिनेता को जानते हैं, लेकिन ऐसी कोई चीज नहीं है जो एक शो को दूसरे से अलग करता है। टेलीविजन वास्तव में 2002 के बाद ढह गया है।

अनंत ने अपनी पुस्तक में भारतीय टेलीविजन शो, प्रतिष्ठित फिल्म निमार्ताओं द्वारा शुरू किए गए प्रायोजित कार्यक्रम और हम हिंदुस्तानी, भूतनाथ, नाचनेवाला गानेवाले, महानगर और खंडन जैसे टीवी धारावाहिकों का हिस्सा बनने के अपने व्यक्तिगत अनुभव को समेटने की कोशिश की है। उन्होंने आर. माधवन की विशेषता वाली कॉमेडी श्रृंखला घर जमाई के 1997 संस्करण का भी निर्देशन किया।

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हिंदी फिक्शन टेलीविजन में क्या गलत हुआ? इस पर अनंत कहते हैं कि हर दिन 20-मिनट के एपिसोड को बनाने का दबाव था ना कि उसकी गुणवत्ता न गिरने देने की बाध्यता। ये कारखाने आउटलेट से निकल रहे थे न कि एक रचनात्मक आउटलेट से? बता दें कि फिल्म निर्माता अनंत महादेवन ने मी सिंधुताई सपकाल में अपने मराठी निर्देशन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।