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 वेब सीरीज इफेक्टः पंकज त्रिपाठी ने कहा, बिना सहमति यौन संबंध बनाना शादी के बाद भी गलत    

 वेब सीरीज इफेक्टः पंकज त्रिपाठी ने कहा, बिना सहमति यौन संबंध बनाना शादी के बाद भी गलत    

डिजिटल डेस्क ( भोपाल)।  वेब सीरीज क्रिमिनल जस्टिस : बिहाइंड क्लोज्ड डोर्स में काम करने के बाद अभिनेता पंकज त्रिपाठी का कहना है कि वह समझ पा रहे हैं कि महिलाएं अपनी शादी के बाद घरेलू हिंसा से लेकर यौन शोषण जैसे मुद्दों को लेकर क्यों चुप रहती हैं। इस वेब सीरीज की कहानी अनु चंद्रा के इर्द-गिर्द बुनी गई है। यह किरदार कीर्ति कुल्हारी ने निभाया है। इसमें वैवाहिक जीवन में होने वाले यौन शोषण पर प्रकाश डाला गया है। दिखाया गया है कि किस तरह एक पीड़िता बंद दरवाजे के अंदर तमाम यातनाएं सहती रहती हैं। सीरीज में पंकज वकील का किरदार निभा रहे हैं। वह अनु का केस लड़ते हैं।

पंकज कहते हैं, मैं इस बात से अनजान था कि महिलाएं जब अपनी निजी जिंदगी में किसी तरह की यातना से गुजरती हैं, तो वे चुप क्यों रहती हैं। जब उन्हें अपनी समस्या के बारे में औरों से साझा करने की बात कही जाती है, तो वे चुप्पी साधी रहती हैं। एक पुरुष के तौर पर इन्हें समझना मेरे बस में वाकई में नहीं था। 

अभिनेता ने आगे कहा, यह मुद्दा हमारे समाज में मौजूद है, चाहे शहर हो या गांव, तो फिर क्यों कोई खुलकर इन पर बात नहीं करता है। लेकिन माधव मिश्रा के किरदार को निभाने और अनुराधा चंद्रा ने अपने पति की हत्या क्यों की, इस मामले को सुलझाने के बाद मैं आखिरकार समझ पाया कि क्यों उसके जैसी अधिकतर महिलाएं अपनी समस्याओं को लेकर मुखर नहीं रहती हैं।

वह आगे कहते हैं, खासकर ये समस्याएं महिलाओं की शादीशुदा जिंदगी से संबंधित होती हैं, क्योंकि जाहिर सी बात है कि समाज की मांग यही रही है कि बंद दरवाजे की बातें बाहर किसी तरह न आए। इस शो के माध्यम से हम यही उम्मीद करेंगे कि अधिक से अधिक महिलाएं अपनी दिक्कतों पर खुलकर बात करें और अपने लिए उचित कदम उठाएं।

प्रतीक गांधी, विजय वर्मा, पावेल गुलाटी, नकुल मेहता और करण ठक्कर जैसे कलाकारों के साथ पंकज अपने एक वीडियो में सहवास से पहले सहमति की महत्ता पर बात करते नजर आ रहे हैं।वीडियो में वह कहते हैं, बिना सहमति के यौन संबंध बनाना यौन शोषण है, चाहे वह शादी से पहले हो या बाद।

क्रिमिनल जस्टिस : बिहाइंड द क्लोज्ड डोर्स में जिशु सेनगुप्ता, आशीष विद्यार्थी, शिल्पा शुक्ला, पंकज सारस्वत, अयाज खान, कल्याण मुले, अजित सिंह पलावत, खुशबू अत्रे और टीरथा मुर्बदकर भी शामिल हैं। इसे डिज्नी प्लस हॉटस्टार वीआईपी पर स्ट्रीम किया जा रहा है।

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Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।