comScore

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के लिए आयुष्मान भारत योजना को लेकर निजी अस्पतालों से सवाल किए

June 05th, 2020 22:00 IST
 सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के लिए आयुष्मान भारत योजना को लेकर निजी अस्पतालों से सवाल किए

हाईलाइट

  • सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के लिए आयुष्मान भारत योजना को लेकर निजी अस्पतालों से सवाल किए

नई दिल्ली, 5 जून (आईएएनएस)। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जानना चाहा है कि क्या देश के वे निजी अस्पताल, जिन्हें सरकार ने मुफ्त में जमीन दी है, वे आयुष्मान भारत योजना के लिए तय कीमत पर कोविड-19 मरीजों का इलाज करने के लिए तैयार हैं?

प्रधान न्यायाधीश एस. ए. बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक हलफनामे में निजी अस्पतालों को अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया।

शीर्ष अदालत ने वकील सचिन जैन द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह प्रश्न सामने रखा। वकील सचिन जैन ने दलील दी कि निजी अस्पतालों को मुफ्त में जमीन दी गई है, जहां कोविड-19 मरीजों से भारी शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने 27 मई को जनहित याचिका पर केंद्र की प्रतिक्रिया मांगी थी।

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि वह सभी निजी अस्पतालों से कोविड-19 के कुछ मरीजों का मुफ्त इलाज करने के लिए नहीं कह रहे हैं। उन्होंने कहा, धर्मार्थ अस्पताल ऐसा क्यों नहीं कर सकते, जिन्होंने सरकार से बहुत लाभ उठाया है (नि: शुल्क भूमि सहित), तो कुछ प्रतिशत काम मुफ्त होना चाहिए।

अस्पतालों के महासंघ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और अस्पतालों के संघ की ओर से मुकुल रोहतगी ने अदालत के इस सुझाव का विरोध किया और कहा कि यह आर्थिक रूप से टिकने वाला नहीं है।

वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि कोविड-19 महामारी के कारण अस्पताल पहले से ही एक बड़ी राजस्व हानि उठा रहे हैं क्योंकि कई अन्य रोगी अन्य बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल नहीं आ रहे हैं।

रोहतगी ने सर गंगा राम अस्पताल को एक समर्पित कोरोनावायरस अस्पताल में बदलने के दिल्ली सरकार के आदेश का हवाला दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अस्पताल केवल कोविड-19 रोगियों का इलाज करेगा, जो इसके राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा और कोई भी उपचार के लिए अस्पताल नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, इससे अंतत: अस्पताल बंद हो जाएंगे।

साल्वे और रोहतगी दोनों ने कहा कि निजी अस्पतालों का राजस्व 60 से 70 प्रतिशत के बीच गिर गया है, क्योंकि लोग महामारी के दौरान अस्पताल आने से बच रहे हैं।

साल्वे ने कहा, लोग इलाज के लिए अस्पतालों में नहीं आ रहे हैं। लोगों के आने का ग्राफ नीचे चला गया है।

जैन ने दलील दी कि निजी अस्पतालों का समर्थन करने वाला सरकारी रवैया सही नहीं है। उन्होंने पीठ के समक्ष दलील दी कि केंद्र की आयुष्मान भारत योजना के तहत एक लाभार्थी से प्रति दिन 4000 रुपये लिए जाते हैं, जबकि निजी अस्पताल उस व्यक्ति के लिए 50,000 रुपये लेते हैं, जो इस योजना के तहत लाभार्थी नहीं है।

प्रधान न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को कहा कि अगर अदालत लागत के पहलू पर एक आदेश देती है तो लागत का निर्धारण कौन करेगा?

इस पर जैन ने दलील दी कि आयुष्मान भारत योजना में अस्पताल का लाभप्रदता पहलू शामिल है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अदालत सामाजिक कल्याण पहलू पर विचार करते हुए एक मानक दर निर्धारित कर सकती है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि यह योजना समाज के सबसे निचले तबके के लिए बनाई गई है, खासकर उन लोगों के लिए, जो निजी स्वास्थ्य सेवाओं की उच्च लागत वहन नहीं कर सकते। मेहता ने कहा, योजना में शामिल लोग कूड़ा बीनने वाले, भिखारी आदि हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कहना सही नहीं है कि संकट की इस घड़ी के दौरान केंद्र निजी अस्पतालों के साथ है।

रोहतगी ने कहा कि निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों का भी इलाज करते हैं और यह सुविधा उन लोगों तक नहीं बढ़ाई जा सकती है, जो लाभार्थी नहीं हैं।

कमेंट करें
SUco5
NEXT STORY

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का खात्मा ठोस रणनीति से संभव - अभय तिवारी

डिजिटल डेस्क, भोपाल। 21वीं सदी में भारत की राजनीति में तेजी से बदल रही हैं। देश की राजनीति में युवाओं की बढ़ती रूचि और अपनी मौलिक प्रतिभा से कई आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। बदलते और सशक्त होते भारत के लिए यह राजनीतिक बदलाव बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा ऐसी उम्मीद हैं।

अलबत्ता हमारी खबरों की दुनिया लगातार कई चहरों से निरंतर संवाद करती हैं। जो सियासत में तरह तरह से काम करते हैं। उनको सार्वजनिक जीवन में हमेशा कसौटी पर कसने की कोशिश में मीडिया रहती हैं।

आज हम बात करने वाले हैं मध्यप्रदेश युवा कांग्रेस (सोशल मीडिया) प्रभारी व राष्ट्रीय समन्वयक, भारतीय युवा कांग्रेस अभय तिवारी से जो अपने गृह राज्य छत्तीसगढ़ से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते हैं और छत्तीसगढ़ को बेहतर बनाने के प्रयास के लिए लामबंद हैं।

जैसे क्रिकेट की दुनिया में जो खिलाड़ी बॉलिंग फील्डिंग और बल्लेबाजी में बेहतर होता हैं। उसे ऑलराउंडर कहते हैं अभय तिवारी भी युवा तुर्क होने के साथ साथ अपने संगठन व राजनीती  के ऑल राउंडर हैं। अब आप यूं समझिए कि अभय तिवारी देश और प्रदेश के हर उस मुद्दे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगातार अपना योगदान देते हैं। जिससे प्रदेश और देश में सकारात्मक बदलाव और विकास हो सके।

छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या बहुत पुरानी है. लाल आतंक को खत्म करने के लिए लगातार कोशिशें की जा रही है. बावजूद इसके नक्सल समस्या बरकरार है।  यह भी देखने आया की पूर्व की सरकार की कोशिशों से नक्सलवाद नहीं ख़त्म हुआ परन्तु कांग्रेस पार्टी की भूपेश सरकार के कदम का समर्थन करते हुए भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर अभय तिवारी ने विश्वास जताया है कि कांग्रेस पार्टी की सरकार एक संवेदनशील सरकार है जो लड़ाई में नहीं विश्वास जीतने में भरोसा करती है।  श्री तिवारी ने आगे कहा कि जितने हमारे फोर्स हैं, उसके 10 प्रतिशत से भी कम नक्सली हैं. उनसे लड़ लेना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन विश्वास जीतना बहुत कठिन है. हम लोगों ने 2 साल में बहुत विश्वास जीता है और मुख्यमंत्री के दावों पर विश्वास जताया है कि नक्सलवाद को यही सरकार खत्म कर सकती है।  

बरहाल अभय तिवारी छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री बघेल के नक्सलवाद के खात्मे और छत्तीसगढ़ के विकास के संबंध में चलाई जा रही योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं. ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने यह कई बार कहा है कि अगर हथियार छोड़ते हैं नक्सली तो किसी भी मंच पर बातचीत के लिए तैयार है सरकार। वहीं अभय तिवारी  सर्कार के समर्थन में कहा कि नक्सली भारत के संविधान पर विश्वास करें और हथियार छोड़कर संवैधानिक तरीके से बात करें।  कांग्रेस सरकार संवेदनशीलता का परिचय देते हुए हर संभव नक्सलियों को सामाजिक  देने का प्रयास करेगी।  

बीते 6 महीने से ज्यादा लंबे चल रहे किसान आंदोलन में भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अभय तिवारी की खासी महत्वपूर्ण भूमिका हैं। युवा कांग्रेस के बैनर तले वे लगातार किसानों की मदद के लिए लगे हुए हैं। वहीं मौजूदा वक्त में कोरोना की दूसरी लहर के बाद बिगड़ी स्थितियों में मरीजों को ऑक्सीजन और जरूरी दवाऐं निशुल्क उपलब्ध करवाने से लेकर जरूरतमंद लोगों को राशन की व्यवस्था करना। राजनीति से इतर बेहद जरूरी और मानव जीवन की रक्षा के लिए प्रयासरत हैं।

बहरहाल उम्मीद है कि देश जल्दी करोना से मुक्त होगा और छत्तीसगढ़ जैसा राज्य नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ देगा। देश के बाकी संपन्न और विकासशील राज्यों की सूची में जल्द शामिल होगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब अभय तिवारी जैसे युवा और विजनरी नेता निरंतर रणनीति के साथ काम करेंगे तो जल्द ही छत्तीसगढ़ भी देश के संपन्न राज्यों की सूची में शामिल होगा।