मीडिय ईस्ट में जंग और तनाव: अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हुए हमलों के बाद दो खेमों में बंटी दुनिया ?

अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हुए हमलों के बाद दो खेमों में बंटी दुनिया ?
ईरान का गठबंधन अमेरिकी गठबंधन की तुलना में काफी कमजोर है। कई देशों ने अमेरिकी-इजराइली हमले की निंदा जरूर की है लेकिन कोई ईरान के साथ स्पष्ट तौर पर खड़ा होना नहीं चाह रहा है। चीन-रूस समेत कई देशों ने चुप्पी साध रखी है।

डिजिटल डेस्क, तेहरान। अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हुए हमलों के बाद दुनिया दो खेमों में बंटती हुई दिखाई दे रहे है। कुछ देश इजराइल और अमेरिका के साथ दे रहे हैं, तो कई देश ईरान के साथ एकजुटता दिखा रहे है। कुछ देश तटस्थ है। ईरान पर हुए हमलों की दुनिया के कई देश आलोचना तो कर रहे है, लेकिन चुप्पी बनाए रखे हुए है। ईरान ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, दुबई, कुवैत और बहरीन पर हमले किए हैं। मध्य ईस्ट की स्थिति काफी खतरनाक हो चुकी है। इसीलिए सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या ईरान पर हमले के साथ तीसरा वर्ल्ड वार शुरू हो गया है?

अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी और इजरायल के ऑपरेशन लायन्स रोअर ने पूरे ईरान में भारी तबाही मचाई है। दुनिया दो हिस्सों में बंटी हुई नजर आ रही है। अब लड़ाई सिर्फ तेहरान और वॉशिंगटन के बीच नहीं है। अब देखने की बात ये है कि मिडिल ईस्ट पर किसका कंट्रोल होगा। अमेरिका के साथ इजराइल और यूके के अलावा NATO के सहयोगी देश सक्रिय रूप से डिप्लोमैटिक कवर और अर्ली-वॉर्निंग रडार समर्थन दे रहे हैं। नाटो सदस्य देशों का मकसद ईरान की न्यूक्लियर और बैलिस्टिक क्षमताओं को पूरी तरह खत्म करना है ताकि पश्चिमी दबदबा बना रहे।

ईरानी हमलों पर गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल में शामिल सदस्य यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई), बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, कतर और कुवैत हैं , जीसीसी ने ईरानी हमलों की निंदा की, और ईरान पर उनकी संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया। ईरानी विदेश मंत्री, अब्बास अराघची ने अपने पड़ोसी मुल्कों को निशाना बनाने से साफ तौर पर इनकार किया।

इजराइल-अमेरिका ने शनिवार को ईरान पर हमले करना शुरु किए थे, जिनमें खामेनेई समेत कई शीर्ष नेता और अधिकारियों की मौत हुई है। पीएम मोदी ने शांति का आह्वान करते हुए कहा नागरिकों की सुरक्षा बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पीएम मोदी ने जल्द से जल्द संघर्ष रोकने की अपील की।

ब्रिटेन,फ्रांस और जर्मनी ने ईरान की मध्य पूर्व के देशों पर लगातार हमलों की आलोचना की है। इटली पीएम जॉर्जिया मेलोनी के कार्यालय ने ईरान की आम जनता के साथ एकजुटता जाहिर की। ऑस्ट्रेलिया पीएम एंथनी अल्बनीज ने कहा कि उनका देश ईरान के बहादुर लोगों के साथ खड़ा है, लेकिन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के अमेरिकी प्रयासों का समर्थन करता है। चीन और रूस ने इजराइल अमेरिकी हमलों की आलोचना करते हुए UN चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के खिलाफ बताया।

ईरान का समर्थन करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने खामेनेई की मौत पर दुख जताया है। उन्होंने कहा पाकिस्तान की सरकार और जनता दुख की घड़ी में ईरान के लोगों के साथ है। लेकिन ट्रंप के खिलाफ पाकिस्तान जा नहीं सकता, वह अमेरिका के साथ खड़ा है।

ईरान का गठबंधन अमेरिकी गठबंधन की तुलना में काफी कमजोर है। कई देशों ने अमेरिकी-इजराइली हमले की निंदा जरूर की है लेकिन कोई ईरान के साथ स्पष्ट तौर पर खड़ा होना नहीं चाह रहा है। चीन-रूस समेत कई देशों ने चुप्पी साध रखी है।

ईरान अपने प्रॉक्सी मिलिशिया के बड़े, मल्टी-नेशनल नेटवर्क को सक्रिय कर रहा है। इसे एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस कहा जाता है। इसमें लेबनान के हिज्बुल्लाह, यमन के हूती विद्रोही और इराक और सीरिया में भारी हथियारों से लैस शिया मिलिशिया शामिल हैं।

Created On :   2 March 2026 7:12 PM IST

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