US-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान शांति वार्ता के बीच बड़ा खुलासा! चीन ने युद्ध के दौरान ऐसे की तेहरान की मदद?

अमेरिका और ईरान शांति वार्ता के बीच बड़ा खुलासा! चीन ने युद्ध के दौरान ऐसे की तेहरान की मदद?
अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। इस युद्ध के दौरान ईरान की चीन ने मदद की है, जिसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियां किसी हालत में पकड़ नहीं पाई है।

डिजिटल डेस्क, बीजिंग। अमेरिका-इजरायल और ईरान जंग को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। इस युद्ध के दौरान ईरान की चीन ने मदद की है, जिसे अमेरिकी खुफिया एजेंसियां किसी हालत में पकड़ नहीं पाई है। यह दावा अमेरिकी मीडिया में किया गया है। जिसमें बताया गया है कि चीन के जासूसी सैटेलाइट की मदद से ईरान ने पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की रेकी की थी, इसी के चलते तेहरान को एयरबेस पर उपस्थित फाइटर जेट्स और अन्य सैन्य सामान की स्थिति के बारे में पता चल सका था।

चीन की कंपनी 'अर्थ आई' ने TEE-01B सैटेलाइट को बनाया है। यह कंपनी दावा करती है कि वो इन-ऑर्बिट डिलीवरी करती है। यानी इसका मतलब है कि अंतरिक्ष में सैटेलाइट भेज देती है, इसके बाद विदेशी ग्राहक आराम से जानकारियां ले सकता है। इस सैटेलाइट की मदद से करीब आधा मीटर के रिजॉल्यूशन पर इमेज खींच सकता है।

ट्रंप ने हमले की बाद की थी स्वीकार

रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि इस सैटेलाइट ने 13, 14 और 15 मार्च को सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस की तस्वीरें कैप्चर की थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 14 मार्च को एक बयान में कहा था कि इस बेस पर मौजूद अमेरिकी विमानों को टारगेट किया गया था, इस हमले में उसके एयरफोर्स के पांच रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट नष्ट हो गए थे।

इन ठिकानों की भी दी जानकारियां

रिपोर्ट के मुताबिक, इसी सैटेलाइट की सहायता से ईरान को जॉर्डन में मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस, बहरीन के मनामा में अमेरिकी नौसैनिक अड्डे और इराक के एरबिल हवाई अड्डे की जानकारियां जुटाई गई थी, इसी समय ईरान की आईआरजीसी ने इन हमलों का दावा किया था। ईरान के लीक हुए सैन्य डॉक्यूमेंट से पता चला है कि TEE-01B सैटेलाइट को चीन से अंतरिक्ष में भेजा गया था।

एक्सपर्ट ने इस मामले में क्या कहा?

ईरान मामलों के जानकार निकोल ग्रेजेव्स्की का कहना है, "इस सैटेलाइट का इस्तेमाल स्पष्ट रूप से सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है क्योंकि इसे ईरान के नागरिक अंतरिक्ष कार्यक्रम द्वारा नहीं बल्कि आईआरजीसी के एयरोस्पेस फोर्स द्वारा संचालित किया जा रहा है।" उन्होंने आगे बताया कि इस जंग के दौरान विदेशी मदद की वास्तव में बहुत जरूरत है, ताकि इस वजह से आईआरजीसी को समय से पहले हमले की पहचान और अपने हमलों की सफलता की जांच करने में सहायता मिलती है।

Created On :   15 April 2026 6:16 PM IST

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