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एफएटीएफ: चीन ने दिया समर्थन-अमेरिका मौन, पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से हो सकता है बाहर

एफएटीएफ: चीन ने दिया समर्थन-अमेरिका मौन, पाकिस्तान ग्रे लिस्ट से हो सकता है बाहर

हाईलाइट

  • संभावना है कि पाकिस्तान अगले महीने ग्रे लिस्ट से बाहर हो सकता है
  • एफएटीएफ ने आतंकी समूहों पर कार्रवाई के प्रयासों पर संतोष जताया है

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आतंकियों के पनाहगार देश पाकिस्तान से जुड़ी एक बड़ी खबर है। एक बार फिर पाकिस्तान के दोस्त चीन ने उसकी मदद की है। इस मदद के चलते पाक जल्द ही ग्रे लिस्ट से बाहर हो सकता है। एफएटीएफ ने आतंकी समूहों पर कार्रवाई के लिए पाकिस्तान के प्रयासों पर संतुष्टी जताई है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इसी सप्ताह एफएटीएफ की अहम बैठक में चीन ने पाक के पक्ष में माहौल बनाने का प्रयास किया था। पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट से बाहर निकालने में चीन और कुछ पश्चिमी देशों ने समर्थन दिया है।

27 बिंदुओं की एक कार्ययोजना दी 
रिपोर्ट के अनुसार चीन, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, अमेरिका और जापान जैसे देशों ने पाकिस्तान पर कोई टिप्पणी नहीं की है। एफएटीएफ ने मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फंडिंग को रोकने के लिए पाक को 27 बिंदुओं की कार्ययोजना दी थी। इन बिंदुओं पर पाकिस्तान ने कितना अमल किया इसके लिए एफएटीएफ की 21-23 जनवरी को बीजिंग में मीटिंग हुई। वहीं चीन ने आतंकी फंडिंग रोकने के लिए पाकिस्तान की प्रशंसा की है। चीन ने कहा है कि दूसरे देशों को भी पाकिस्तान का हौसला बढ़ाना चाहिए। 

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अमेरिका ने भी दिया समर्थन
अमेरिका ने भी पाकिस्तान को समर्थन दिया है। दरअसल अमेरिका, अफगानिस्तान में तालिबान से शांति वार्ता में जुटा हैं। जहां उसे पाक के सहयोग की जरूरत है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव से पहले पाकिस्तान को लेकर नरम रुख अपनाना चाहते हैं। वहीं पाकिस्तान मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जल्द ट्रंप देश का दौरा कर सकते हैं।

भारत को होगी मुश्किल
पाकिस्तान के ग्रे लिस्ट से बाहर होने पर भारत की मुश्किले बढ़ेगी। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों को छूट मिल जाएगी। दोनों ही संगठनों पर भारत में हुए कई हमलों के जिम्मेदार है। एफएटीएफ के फैसले से आतंकी समूहों को राहत मिलेगी। इससे जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद है। 

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जून 2018 में ग्रे लिस्ट में डाला था पाक को
गौरतलब है​ कि एफएटीएफ ने जून 2018 में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाल दिया था और 27 पॉइंट का एक्शन प्लान देते हुए एक साल का समय दिया था। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी संगठनों की टेरर फाइनैंशिंग को बैंकिंग व नॉन-बैंकिंग, कॉर्पोरेट व नॉन-कॉर्पोरेट सेक्टरों से रोकने के उपाय करने थे, लेकिन पाकिस्तान सिर्फ 6 पॉइंट पर ही खरा उतर सका था। पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट किए जाने से पहले डार्क-ग्रे लिस्ट में डालकर अंतिम मौका दिया है।

डार्क-ग्रे' का अर्थ है सख्त चेतावनी
एफएटीएफ के नियमों के अनुसार ग्रे और ब्लैक लिस्ट के बीच डार्क-ग्रे की भी कैटि​गरी होती है। 'डार्क-ग्रे' का अर्थ है सख्त चेतावनी, ताकि संबंधित देश को सुधार का एक अंतिम मौका मिल सके। अगर ऐसा होता है, तो यह पाकिस्तान के लिए कड़ी चेतावनी होगी कि वह एक अंतिम अवसर में खुद को सुधार ले, अन्यथा उसे ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
 

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