दैनिक भास्कर हिंदी: इराक स्ट्राइक: जानिए कौन था मेजर कासिम सुलेमानी, अमेरिका के लिए क्यों था खतरा?

January 3rd, 2020

हाईलाइट

  • सुलेमानी की मजबूती ईरान को फायदा पहुंचा रहा था
  • सुलेमानी ने कुर्द लड़ाकों और शिया मिलिशिया को एकजुट करने का काम किया था

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका ने बगदाद एयरपोर्ट पर एयर स्ट्राइक कर कद्स फोर्स(Quds Force) के जनरल कासिम सुलेमानी (Qassem Soleimani) को मार गिराया है। सुलेमानी ईरान में काफी लोकप्रिय था। उसे मध्य पूर्व में सबसे शक्तिशाली जनरल के रूप में जाना जाता था। उसे संभावित राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में भी देखा जाता था।यह कहा जा सकता है कि आज के ईरान को कसीम सोलेमानी को जाने बिना पूरी तरह से नहीं समझा जा सकता है।

कौन है कासिम सुलेमानी?
ईरान रिवॉलूशनरी गार्ड्स का प्रमुख कासिम सुलेमानी कद्स फोर्स का जिम्मा संभालते था। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई में सुलेमानी अमेरिका के लिए सिरदर्द बना हुआ था। कासिम सुलेमानी को ईरान की तरफ से लड़ने वाले अहम सिपाही को तौर पर जाना जाता था। पश्चिम एशिया के ज्यादातर मिशन में सुलेमानी का अहम भूमिका में रहा। अमेरिका नहीं चाहता था कि कासिम अपनी जड़े दूसरे देशों में भी मजबूत करें। सुलेमानी की ताकत का फायदा ईरान को मिल रहा था।

डोनाल्ड ट्रंप का विरोधी था सुलेमानी
सुलेमानी को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप का विरोधी माना जाता था। उन्होंने कई मौकों पर अमेरिका को चेतावनी दी थी। बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमले के बाद ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी थी। नए साल के पहले दिन ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा था कि ईरान को नुकसान उठाना पड़ेगा। ट्रंप की इस धमकी के बाद अमेरिका ने यह कार्रवाई की है। इस घटना के बाद पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण चल रहे रिश्तों में और तल्खी आनी तय मानी जा रही है।

हिजबुल्लाह और हमास का था समर्थन
इस्लामिक स्टेट आतंकी संगठन को इराक से खत्म करने के लिए सुलेमानी ने कुर्द लड़ाकों और शिया मिलिशिया को एकजुट किया था। ईरान से सहायता से उन्होंने इराक में पॉप्युलर मोबिलाइजेशन फोर्स तैयार किया। सुलेमानी को आतंकी संगठन हिजबुल्लाह और हमास का समर्थन था। 

ईरान और इराक युद्ध में सुलेमानी की भूमिका अहम 
ईरान और इराक के बीच 1980 के जंग में सुलेमानी ने काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। युद्ध में अमेरिका ने इराक तानाशाह सद्दाम हुसैन का साथ दिया था। तब से अमेरिका और कासिम सुलेमानी के बीच दुश्मनी पनप गई थी। हालांकि बाद में सद्दाम व अमेरिका के बीच रिश्ते खराब हो गए थे।