दैनिक भास्कर हिंदी: Coronavirus Research: कोविड-19 के इलाज में कारगर नहीं है हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, 1400 मरीजों पर की गई रिसर्च में आया सामने

May 8th, 2020

हाईलाइट

  • कोविड-19 के इलाज में कारगर माने जाने वाली हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर स्टडी
  • कोविड-19 के इलाज में मलेरिया की दवा से लाभ का कोई सबूत नहीं
  • 1400 मरीजों का हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से इलाज के बाद रिसर्चर्स इस नतीजे पर पहुंचे

डिजिटल डेस्क, वॉशिंगटन। कोविड-19 के इलाज में कारगर माने जाने वाली मलेरिया की दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के लेकर एक स्टडी सामने आई है। स्टडी में कहा गया है कि इस बीमारी के इलाज में मलेरिया की दवा से लाभ का कोई सबूत नहीं मिला है। न्यूयॉर्क की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में 1400 मरीजों का हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन से इलाज के बाद रिसर्चर्स इस नतीजे पर पहुंचे हैं। इस दवा ने  न तो मरने के जोखिम को कम किया न ही ब्रीथिंग ट्यूब की जरुरत के जोखिम को। गुरुवार के न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन में ये रिसर्च छपी है।

हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन ‘संजीवनी बूटी’ नहीं
कई अन्य विशेषज्ञों ने भी आगाह किया है कि यह दवा कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज के लिए ‘संजीवनी बूटी’ नहीं है और कुछ मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के पूर्व निदेशक और भारत के शीर्ष सर्जनों में से एक डॉक्टर एम. सी. मिश्रा का कहना है, 'दुनिया में अकेले हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन देने या फिर उसे एजिथ्रोमाइसिन के साथ मिलाकर दिए जाने पर मरीजों की मौत होने की खबरें हैंष हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन शरीर में पोटैशियम के संचरण को रोक देता है और हृदयगति को धीमा कर देता है।  इसके कारण दिल का दौरा भी पड़ सकता है या हृदय गति से संबंधित बीमारियां भी हो सकती हैं। उन्होंने बताया कि अप्रैल के पहले सप्ताह में असम में एक डॉक्टर में कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण दिखने के बाद उन्हें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन का ‘हाई डोज’ दिया गया और बाद में दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।

ट्रंप के बयान से सुर्खियों में आई थी ये दवा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान के बाद एंटी-मलेरिया ड्रग हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन सुर्खियों में आई थी। 21 मार्च को डोनाल्ड ट्रंप ने कोरोना से बचने के लिए हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वाइन और एज़िथ्रोमाइसिन को कॉकटेल के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही थी। इसके बाद एरिजोना में एक व्यक्ति और उसकी पत्नी ने मछली के टैंकों को साफ करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एडिटिव क्लोरोक्विन फॉस्फेट ले लिया। इससे उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई, जबकि उसकी पत्नी को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद, नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एलर्जीस ऐंड इन्फेक्शियस डिसीज के प्रमुख डॉ. एंथोनी फाउची ने सफाई दी थी कि ट्रंप के बयान किसी क्लिनिकल ट्रायल पर आधारित नहीं हैं बल्कि ये सिर्फ अनुमान हैं। 

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन क्या है?
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का उपयोग मलेरिया के इलाज के लिए किया जाता है। साथ ही इसका प्रयोग आर्थराइटिस के उपचार में भी होता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दवा का आविष्कार किया गया था। उस वक्त सैनिकों के सामने मलेरिया एक बड़ी समस्या थी। 1955 में संयुक्त राज्य अमेरिका में चिकित्सीय उपयोग के लिए हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन को मंजूरी दी गई थी। यह विश्व स्वास्थ्य संगठन की आवश्यक दवाओं की सूची में है। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को ब्रांड नेम प्लाक्वेनिल के तहत बेचा जाता है और जेनेरिक के रूप में उपलब्ध है। इस दवा के साइड इफेक्ट भी है। दवा के साइड इफेक्ट्स में हार्ट ब्लॉक, हार्ट रिदम डिस्टर्बेंस, चक्कर आना, जी मिचलाना, मतली, उल्टी और दस्त हो सकते हैं।