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मिशन सूर्य: सूर्य के सफर के लिए निकला नासा का ‘सोलर प्रोब’

August 13th, 2018 12:54 IST
मिशन सूर्य: सूर्य के सफर के लिए निकला नासा का ‘सोलर प्रोब’

हाईलाइट

  • नासा का अंतरिक्ष यान पार्कर सोलर प्रोब 31 जुलाई को लॉन्च होगा।
  • सूरज की सतह से 40 लाख मील की दूरी से गुजर सकता है ‘सोलार प्रोब’।
  • यह मानव इतिहास का पहला सूर्य मिशन है।

डिजिटल डेस्क,वाशिंगटन। विश्व की सबसे बड़ी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अंतरिक्षयान ‘सोलर प्रोब’ को लॉन्च कर दिया है। कैप कानावरल एयर फोर्स स्टेशन के स्पेस लॉन्च कॉम्प्लेक्स-37 से इसकी लॉन्चिंग की गई है। इस अंतरिक्ष यान को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से शनिवार सुबह लॉन्च किया जाना था, लेकिन कुछ तकनीकि खामियों के चलते इसकी लॉन्चिंग रोक दी गई थी। नासा के अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने इस पर काम किया है। जिसके बाद रविवार दोपहर ‘सोलर प्रोब’ को लॉन्च किया जा सका। 


 

बता दें कि सोलर प्रोब यान सूर्य के काफी करीब पहुंचकर जानकारियां जुटाएगा। कार की तरह दिखने वाला यह अंतरिक्ष यान सूरज की सतह से 40 लाख मील की दूरी से गुजर सकता है। सूरज के इतने करीब से अब तक कोई और यान नही गुजर पाया है। नासा का यह मिशन अगर कामयाब होता है तो नासा के नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज हो जाएगा क्योंकि इससे पहले किसी भी अंतरिक्षयान ने इतने ताप और प्रकाश का सामना नहीं किया है।

 

नासा का अंतरिक्ष यान पार्कर सोलर प्रोब डेल्टा-4 हैवी लॉन्च व्हीकल से जोड़कर लॉन्च किया जाएगा। यह मानव इतिहास का पहला सूर्य मिशन है। इस अंतरिक्ष यान को फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया जायेगा।

सूर्य का ज्यादा करीब से अध्ययन संभव होगा
पार्कर सोलर प्रोब मानव द्वारा अब तक निर्मित किसी भी यंत्र के मुकाबले सूर्य के बारे में ज्यादा करीब से जानकारियां जुटा पायेगा। नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के हेलियोफिजिक्स साइंस डिविजन के सहयोगी निदेशक एलेक्स यंग ने कहा- 'हम कई दशकों से सूरज का अध्ययन कर रहे हैं और अब आखिरकार हमें पता चलेगा कि हम किस हद तक सफल हुए हैं।'

सूरज गतिशील और चुंबकीय रूप से सक्रिय है
एलेक्स यंग कहते हैं, 'हम जितना सूरज को समझ पाए हैं वो उससे कहीं ज़्यादा जटिल है। हमें यह भले ही स्थायी, एक गोले की तरह लगता है लेकिन सूरज गतिशील और चुंबकीय तरीके से सक्रिय है। पार्कर सोलर प्रोब विभिन्न उपकरणों से लैस है जो सूरज के अंदर और आसपास का अध्ययन करेगा। इससे जो जानकारियां उपलब्ध होंगी, उससे वैज्ञानिकों को सूरज के बारे में गहराई से जानने में खासी मदद मिलेगी।

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